आयकर विभाग के पोर्टल पर एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में विदेशी खातों की जानकारी अपडेट होते ही टैक्सपेयर्स के पास फॉरेन-एसेट्स से जुड़े ईमेल पहुंचने लगे हैं। अगर आपकी भी कोई विदेशी संपत्ति या आय अघोषित रह गई है, तो 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स – डिस्क्लोजर स्कीम 2026' (FAST-DS) के तहत इसे घोषित करने का एक मौका दिया जा रहा है। ₹1 करोड़ तक की लिमिट वाली इस स्कीम का लाभ 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकता है। ऐसे में कोई भी रास्ता चुनने से पहले अपना AIS खोलकर जरूर देख लें कि विभाग के पास आपके खातों से जुड़ा क्या डेटा मौजूद है। समय रहते कदम उठाने से आप किसी भी तरह की गलती और भारी ब्याज के बोझ से बच सकते हैं।
FAST-DS के तहत अघोषित विदेशी संपत्ति या आय, गैर-निवासी (NRI) रहते हुए बनाई गई एसेट्स और ऐसी कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को डिक्लेयर किया जा सकता है, जिस पर टैक्स तो दिया जा चुका है लेकिन रिटर्न में जानकारी नहीं दी गई थी। इसके लिए आपको ऑनलाइन Form 1 जमा करना होगा: e-File → Income Tax Forms → Forms under Other Acts → FAST-DS 2026 विकल्प पर जाएं। इसके बाद AY 2026-27 के लिए प्री-फिल्ड e-Pay Tax के जरिए भुगतान करें और इसे ई-वेरिफाई करें। यह विंडो 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।

FAST‑DS 2026: एलिजिबिलिटी, लिमिट और आखिरी तारीख
अगर आपकी विदेशी आय या अघोषित संपत्ति ₹1 करोड़ के भीतर है या आपसे पहले Schedule FA भरना छूट गया था, तो FAST-DS पर विचार करना फायदेमंद रहेगा। वहीं अगर आपने कमाई पर टैक्स दे दिया था लेकिन सिर्फ शेड्यूल शामिल नहीं किया था, तो आपके पास 48 महीनों के भीतर अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) फाइल करने का भी विकल्प है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्योर NRI या RNOR टैक्सपेयर्स को शायद किसी कार्रवाई की जरूरत न पड़े, लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले अपना रेजिडेंशियल स्टेटस जरूर री-कंफर्म कर लें।
AIS में फॉरेन एसेट्स डेटा: कैसे चेक और रीकंसाइल करें?
डेटा क्रॉस-चेक करने के लिए सबसे पहले e-File मेन्यू से AIS पर लॉगिन करें और फिर Reports सेक्शन में जाकर Foreign Assets Information रिपोर्ट खोलें। इसके बाद पासवर्ड से सुरक्षित PDF को डाउनलोड करके अपने बैंक बैलेंस, अकाउंट नंबर और विदेश से हुई कमाई का मिलान करें। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपकी सैलरी ₹18 लाख है और आपको विदेश से 300 डॉलर का डिविडेंड मिला था जो पहले नहीं दिखाया गया था—अगर इस पर टैक्स चुकाया जा चुका है, तो आप ITR-U फाइल कर सकते हैं। इसमें Schedules FA, FSI और TR जोड़ें और Form 67 सबमिट करें।
क्या करें: FAST‑DS, अपडेटेड ITR या कोई एक्शन नहीं?
अगर आपके AIS में बिना दिखाई गई विदेशी संपत्ति या आय शो हो रही है और आप जल्द से जल्द इस मामले को निपटाना चाहते हैं, तो FAST-DS चुनें। वहीं अगर टैक्स पहले ही भरा जा चुका है और सिर्फ डिक्लेरेशन शेड्यूल छूटा था, तो अपडेटेड रिटर्न भरना बेहतर रहेगा। कोई एक्शन न लेने का विकल्प सिर्फ तभी चुनें जब आप NRI या RNOR हों और आपकी विदेशी आय पर भारत में टैक्स न बनता हो। गलतियों से बचें: अगर आपके पास विदेशी संपत्ति है तो ITR-1 या ITR-4 भरने की भूल न करें; Schedule FA, FSI, TR को पूरा भरें, टैक्स चुकाएं और ई-वेरिफाई करना न भूलें।
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: एक नजर में
| फीचर | न्यू टैक्स रिजीम | ओल्ड टैक्स रिजीम |
|---|---|---|
| डिफ़ॉल्ट स्टेटस | बाय-डिफ़ॉल्ट लागू; चाहें तो बाहर हो सकते हैं | धारा 115BAC(6) के तहत चुनने पर ही उपलब्ध |
| सैलरी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹75,000 (धारा 16) | ₹50,000 (धारा 16) |
| डिडक्शंस (छूट) | ज्यादातर टैक्स छूट की अनुमति नहीं | 80C, 80D, HRA और अन्य छूट का लाभ |
सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप आज ही अपना AIS चेक करें, हर जानकारी का गहराई से मिलान करें और तुरंत सही कदम उठाएं। छोटी रकम के मामलों में FAST-DS तेजी से मामला सुलझाने का मौका देता है, जबकि टैक्स पहले ही चुकाए जाने की स्थिति में अपडेटेड रिटर्न आपकी पुरानी फाइलिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखता है। अपने पासपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स, Form 67 के प्रूफ और ई-वेरिफिकेशन रिसीप्ट को एक फोल्डर में तैयार रखें। यह अनुशासन आपको इनकम टैक्स विभाग के बार-बार आने वाले रिमाइंडर्स से बचाएगा और आपकी भावी फाइलिंग्स को भी सुरक्षित रखेगा।


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