EPF Vs VPF: अक्सर लोग ईपीएफ को केवल नौकरी के दौरान कर बचाने का साधन मानते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसी ईपीएफ के माध्यम से वे अपने सेवानिवृत्ति कोष को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इस सुविधा को वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) के नाम से जाना जाता है।

EPF (Employees' Provident Fund) एक अनिवार्य बचत है, लेकिन VPF (Voluntary Provident Fund) उन लोगों के लिए एक 'सीक्रेट वेपन' है जो रिटायरमेंट पर एक बहुत बड़ा फंड (Retirement Corpus) बनाना चाहते हैं।
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1. क्या है VPF (Voluntary Provident Fund)?
EPF में आपकी बेसिक सैलरी का 12% कटता है। VPF आपको यह आजादी देता है कि आप अपनी इच्छा से बेसिक सैलरी का 100% तक निवेश कर सकें। यह आपके मौजूदा EPF अकाउंट का ही विस्तार है, इसके लिए किसी नए अकाउंट की जरूरत नहीं होती।
2. VPF के बड़े फायदे
- बेहतर ब्याज दर: इस पर वही ब्याज मिलता है जो EPF पर मिलता है (वर्तमान में 8.25%)। यह बैंक FD, RD या PPF से अक्सर ज्यादा होता है।
- सुरक्षा की गारंटी: चूंकि यह सरकार द्वारा संचालित है, इसलिए इसमें जोखिम शून्य है।
- टैक्स बेनिफिट: निवेश की गई राशि पर Income Tax Act के Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है।
- आसान निवेश: आपको खुद कहीं जाकर पैसे जमा नहीं करने होते; बस अपने HR/Account विभाग को बताना होता है और पैसा सीधे सैलरी से कटकर EPF खाते में चला जाता है।
3. टैक्स का गणित (जरूरी जानकारी)
सरकार के नए नियमों के अनुसार, अगर एक वित्त वर्ष में आपका कुल योगदान (EPF + VPF) ₹2.5 लाख से ऊपर जाता है, तो उस अतिरिक्त राशि पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा। हालांकि, ₹2.5 लाख तक का निवेश और उस पर मिला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री रहता है।
4. रिटायरमेंट में कैसे मददगार है?
मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने EPF के अलावा ₹5,000 अतिरिक्त VPF में डालते हैं। 8.25% की चक्रवर्ती ब्याज (Compounding) की बदौलत, रिटायरमेंट (60 की उम्र) तक यह छोटी सी राशि ₹70 लाख से ज्यादा का अतिरिक्त फंड तैयार कर सकती है।
5. VPF शुरू करने का तरीका
- अपनी कंपनी के HR या पेरोल विभाग से संपर्क करें।
- एक फॉर्म भरकर बताएं कि आप अपनी बेसिक सैलरी का कितना प्रतिशत VPF में योगदान देना चाहते हैं।
- यह प्रक्रिया साल में कभी भी शुरू की जा सकती है (आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में)।
ध्यान रखे योग्य बात: VPF का लॉक-इन पीरियड EPF जैसा ही होता है। आप इसे रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर ही निकाल सकते हैं (विशेष परिस्थितियों जैसे शादी, बीमारी या घर बनाने के लिए आंशिक निकासी संभव है)।
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