EPFO Update: कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब अपनी योजनाओं के दायरे को और बढ़ाने की तैयारी में है। संगठन अनिवार्य सदस्यता की मौजूदा सीमा 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए करने पर विचार कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी EPF (Employees Provident Fund) और EPS (Employees Pension Scheme) का लाभ मिल सकेगा।

दिसंबर-जनवरी में मिल सकती है मंजूरी
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा EPFO की अगली बोर्ड मीटिंग में की जाएगी, जो दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में हो सकती है। वहीं, अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो इसका असर देश के 6.5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स पर पड़ेगा। इस सुधार को संगठन के अगले चरण 'EPFO 3.0' का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत बनाना है।
कर्मचारियों की बचत और पेंशन में बढ़ोतरी
फिलहाल EPF और EPS योजनाओं में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12-12% योगदान करते हैं। कर्मचारी का पूरा योगदान EPF में जाता है, जबकि नियोक्ता का 8.33% EPS में और 3.67% EPF में जमा होता है। अगर यह नई सीमा लागू होती है, तो कर्मचारियों की पेंशन फंड में हर महीने 1250 रुपए से बढ़कर 2083 रुपए तक राशि जमा हो सकेगी। इससे न केवल रिटायरमेंट पेंशन बढ़ेगी, बल्कि EPFO का कुल कॉर्पस फंड भी तेजी से बढ़ेगा।
अभी क्या हैं नियम?
मौजूदा समय में EPS-95 योजना के तहत पेंशन फंड की कैलकुलेशन 15,000 रुपए तक की बेसिक सैलरी पर की जाती है। यानी अगर आपकी बेसिक सैलरी 30,000 रुपए या 40,000 रुपए है, तब भी योगदान की सीमा 15,000 रुपए तक ही रहती है। इसी वजह से लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की जा रही थी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
EPS की सीमा आखिरी बार 2014 में 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए की गई थी।
अब महंगाई और न्यूनतम वेतन दोनों काफी बढ़ चुके हैं।
आज न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए के करीब है, इसलिए मौजूदा सीमा अब व्यवहारिक नहीं रही।
सीमा बढ़ने से कर्मचारियों को बेहतर पेंशन और वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी।
इससे देश में सोशल सिक्योरिटी सिस्टम और मजबूत होगा।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो यह देश के कर्मचारियों के लिए आर्थिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। पेंशन की राशि बढ़ने से लोगों का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा और EPFO के तहत आने वाले कर्मचारियों को बेहतर लाभ मिलेगा। यह सुधार भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाने वाला साबित हो सकता है।
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