EPFO: ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक अहम फैसला लिया है। अब EPFO अपने रिकॉर्ड में नाम और जेंडर में बदलाव के लिए ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट या कार्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार करेगा। यह प्रमाण पत्र नेशनल पोर्टल फॉर ट्रांसजेंडर पर्संस के जरिए जारी किया जाता है। इस कदम से ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को अपनी पहचान के अनुरूप सरकारी रिकॉर्ड अपडेट कराने में काफी सहूलियत मिलेगी।

पहचान के सम्मान की दिशा में कदम
लंबे समय से ट्रांसजेंडर समुदाय यह मांग करता रहा है कि सरकारी दस्तावेजों में उनकी पहचान को सही तरीके से दर्ज किया जाए। कई बार नाम और जेंडर में अंतर होने के कारण उन्हें नौकरी, सैलरी और पीएफ से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। EPFO का यह फैसला उनकी इस परेशानी को काफी हद तक खत्म कर सकता है।
अब नहीं होगी ज्यादा भागदौड़
नए नियम के तहत ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को नाम और जेंडर बदलवाने के लिए अलग-अलग दस्तावेज या बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट को ही पर्याप्त माना जाएगा। इससे प्रोसेस आसान होगा और समय की भी बचत होगी।
पहले से आसान हो रही थी प्रक्रिया
EPFO ने पहले ही प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया को आसान बनाने की शुरुआत कर दी थी। जनवरी 2025 में जॉइंट डिक्लेरेशन से जुड़े नियमों को आसान किया गया था, ताकि कर्मचारी अपनी पर्सनल जानकारी आसानी से सुधार सकें। अब इसी क्रम में ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट को भी मान्यता दे दी गई है।
ऑनलाइन बदलाव की सुविधा
EPFO ने यह भी साफ किया है कि जिन कर्मचारियों का UAN आधार से जुड़ा और सत्यापित है, वे कई जानकारियां खुद ही ऑनलाइन बदल सकते हैं। इसमें जन्मतिथि, जेंडर, माता-पिता का नाम, जीवनसाथी का नाम और नौकरी से जुड़ी तारीखें शामिल हैं। ऐसे मामलों में न तो किसी दस्तावेज की जरूरत होगी और न ही नियोक्ता की मंजूरी लेनी पड़ेगी।
DigiLocker से भी आसान हुआ काम
जहां दस्तावेज अपलोड करना जरूरी होगा, वहां DigiLocker की मदद ली जा सकती है। इससे कागजी काम कम होगा और दस्तावेज सुरक्षित तरीके से जमा हो सकेंगे। डिजिटल माध्यम से काम होने से प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राहत
इस फैसले को ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे न सिर्फ उनकी पहचान को आधिकारिक मान्यता मिलेगी, बल्कि सरकारी सर्विसों तक उनकी पहुंच भी आसान होगी। साथ ही, यह कदम समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करता है।
समावेशी व्यवस्था की ओर बढ़ता EPFO
EPFO का यह फैसला सिर्फ एक नियम बदलाव नहीं है, बल्कि एक सोच का बदलाव है। यह दिखाता है कि सरकारी संस्थान अब हर वर्ग को साथ लेकर चलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे फैसले ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बेहतर अवसर और सम्मानजनक जीवन की राह खोल सकते हैं।
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