EPFO: जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है, तो PF में योगदान रुक जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि PF खाता तुरंत बंद हो जाएगा। खाता चलता रहता है, लेकिन उस पर ब्याज मिलने की एक तय सीमा होती है। EPFO के अनुसार, बिना योगदान वाले PF खाते पर एक तय समय तक ब्याज मिलता है, उसके बाद आपका खाता इनएक्टिव माना जाता है और ब्याज मिलना बंद हो जाता है।

रिटायरमेंट के बाद कितने समय तक मिलता है ब्याज?
EPFO नियमों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 55 साल की उम्र के बाद लेकिन 58 साल से पहले नौकरी छोड़ता है, तो उसके PF खाते में अगले 3 साल तक ब्याज मिलता रहेगा। इन 36 महीनों के बाद अगर पैसा नहीं निकाला जाता, तो PF खाता इनएक्टिव हो जाता है। इनएक्टिव अकाउंट पर कोई ब्याज नहीं मिलता। यानी PF में पैसा छोड़ देना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
10 साल की नौकरी के बाद पेंशन का अधिकार
EPF स्कीम में शामिल हर कर्मचारी को 10 साल की नौकरी पूरी करने पर पेंशन का अधिकार मिल जाता है। पेंशन की शुरुआत 58 साल की उम्र से होती है। 50 साल की उम्र में भी पेंशन ली जा सकती है, लेकिन कम राशि के साथ। इसलिए EPFO में लंबे समय तक योगदान करना भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
पेंशन (EPS) निकालने के लिए नया नियम
अब EPFO के नए नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बेरोजगार रहता है, तो वह EPS यानी पेंशन फंड की निकासी 2 महीने बाद नहीं, बल्कि 36 महीने बाद कर सकेगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य लोगों की लंबी अवधि की सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करना है।
PF ब्याज पर कब लगता है टैक्स?
PF पर ब्याज सामान्य स्थितियों में टैक्स-फ्री होता है, लेकिन अगर आपका सालाना PF योगदान 2.5 लाख रुपये से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त रकम पर मिलने वाला ब्याज taxable हो जाता है। अगर आपने 5 साल लगातार नौकरी नहीं की और PF निकाल लिया तो निकासी पर भी टैक्स लग सकता है।
रिटायरमेंट के बाद ब्याज का टैक्सेशन
रिटायरमेंट के बाद PF में योगदान पूरी तरह बंद हो जाता है। इस अवधि में जोड़ने वाला ब्याज Salary income में नहीं आता। इसे Income from Other Sources माना जाता है और इस पर टैक्स लगता है, यानी PF का ब्याज भी रिटायरमेंट के बाद टैक्स के दायरे में आ जाता है।


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