अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो शायद आप भी यही सोचते होंगे कि आपके वेतन से कटने वाला पीएफ का पूरा पैसा एक ही खाते में जमा होता है। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। आपके पीएफ योगदान का एक बड़ा हिस्सा 'एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम' (EPS) में जाता है। ईपीएफओ (EPFO) द्वारा मैनेज की जाने वाली यह स्कीम प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन की गारंटी देती है। अक्सर लोग करियर की भागदौड़ में इस जरूरी वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान देना भूल जाते हैं।
आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा कंपनी आपके रिटायरमेंट फंड के लिए देती है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह पूरा पैसा प्रोविडेंट फंड (PF) में जा रहा है, जबकि असल में आपकी सैलरी का 8.33% हिस्सा सीधे आपके पेंशन खाते (EPS) में जमा होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस योगदान के लिए सैलरी की सीमा फिलहाल 15,000 रुपये प्रति माह तय की गई है। यह जानकारी आपको यह समझने में मदद करेगी कि आपकी मेहनत की कमाई हर महीने कहां और कैसे निवेश हो रही है।

समझिए कैसे तय होती है आपकी EPS पेंशन की रकम
आपकी पेंशन कितनी बनेगी, यह ईपीएफओ के एक खास गणितीय फॉर्मूले पर निर्भर करता है। इस मासिक पेंशन का लाभ उठाने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी पूरी करना अनिवार्य है। पेंशन की गणना आपकी 'पेंशन योग्य सैलरी' और कुल 'सर्विस पीरियड' के आधार पर की जाती है। आमतौर पर, इसके लिए आपकी नौकरी के आखिरी 5 सालों की औसत सैलरी को आधार माना जाता है। इस पारदर्शिता से कर्मचारी आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें हर महीने कितनी रकम मिलेगी।
EPS पात्रता और पेंशन कैलकुलेशन के जरूरी नियम
अपनी मंथली पेंशन कैलकुलेट करने के लिए अपनी औसत सैलरी को नौकरी के कुल सालों से गुणा करें और फिर प्राप्त संख्या को 70 से भाग (Divide) दें। अगर आपने 20 साल या उससे ज्यादा समय तक काम किया है, तो आपको रिवॉर्ड के तौर पर 2 साल की अतिरिक्त सर्विस का बोनस मिलता है। यह नियम लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करता है और उनकी पेंशन राशि को बढ़ा देता है। इन बारीकियों को समझकर आप अपने रिटायरमेंट के बाद की लाइफ को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं।
| मापदंड | जरूरी जानकारी |
|---|---|
| न्यूनतम सेवा अवधि | 10 साल पूरे होने चाहिए |
| पेंशन की मानक उम्र | 58 साल |
| EPS के लिए सैलरी लिमिट | ₹15,000 प्रति माह |
कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि वे जब चाहें पेंशन का पूरा पैसा निकाल सकते हैं। असल में, पेंशन की निकासी पर कुछ पाबंदियां हैं और आमतौर पर यह 58 साल की उम्र के बाद ही मिलती है। हालांकि, आप 50 साल की उम्र में 'अर्ली पेंशन' का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की दर थोड़ी कम हो जाती है। इन नियमों को समय रहते समझ लेने से आप अपने रिटायरमेंट फंड को लेकर सही फैसले ले पाएंगे। आज की सही प्लानिंग ही आपके कल को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाएगी।


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