ज्यादातर भारतीय कर्मचारी अपने ईपीएफ (EPF) को रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित और टैक्स-फ्री फंड मानते हैं। लेकिन, कई बार समय से पहले पैसे निकालने पर कटने वाला टैक्स उन्हें हैरान कर देता है। ईपीएफओ (EPFO) के नियमों की सही जानकारी होना आपके लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि टैक्स की गणना इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कुल कितने साल की लगातार सर्विस पूरी की है।
ईपीएफ का सबसे अहम नियम यह है कि 5 साल की लगातार सर्विस के बाद ही निकासी पर टैक्स की छूट मिलती है। अगर आपने नौकरी बदलते समय अपना पीएफ बैलेंस ट्रांसफर किया है, तो वह समय भी आपकी कुल सर्विस में गिना जाएगा। लेकिन अगर आप 5 साल पूरे होने से पहले पैसे निकालते हैं, तो यह रकम आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाएगी। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान और उस पर मिला ब्याज, सब कुछ टैक्स के दायरे में आता है।

PF निकासी के टैक्स नियम और TDS को समझें
अगर आप 5 साल की सर्विस से पहले 50,000 रुपये से ज्यादा की रकम निकालते हैं, तो इस पर टीडीएस (TDS) लागू होता है। अगर आपके पास पैन (PAN) कार्ड है और आपने उसकी जानकारी दी है, तो बैंक 10% टैक्स काटता है। लेकिन पैन कार्ड की जानकारी न देने पर यह कटौती सीधे 30% तक पहुंच जाती है। टैक्स के इस बड़े अंतर को देखते हुए हर सैलरीड प्रोफेशनल के लिए पैन कार्ड अपडेट रखना बेहद जरूरी है।
अक्सर ईपीएफओ मेंबर्स आवेदन करते समय 50,000 रुपये की इस लिमिट को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपकी निकासी की रकम इस लिमिट से कम है, तो कोई टीडीएस नहीं कटेगा। हालांकि, कई बार लोग एक ही साल में कई बार पैसे निकालते हैं जिससे कुल रकम बढ़ जाती है और टैक्स कट जाता है। बड़े अमाउंट की निकासी से पहले अपनी कुल सालाना इनकम का हिसाब जरूर लगा लें।
फॉर्म 15G का इस्तेमाल और ईपीएफ टैक्स से जुड़ी गलतियां
आप ईपीएफओ को फॉर्म 15G (Form 15G) जमा करके इस टैक्स कटौती से बच सकते हैं। यह फॉर्म इस बात की घोषणा है कि आपकी कुल सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से कम है। सीनियर सिटीजन्स को इसी काम के लिए फॉर्म 15H का इस्तेमाल करना चाहिए। समय पर ये दस्तावेज जमा करने से आपको बिना किसी देरी के पूरा पैसा मिल जाता है।
| सर्विस की अवधि | निकासी की सीमा | टीडीएस दर (पैन के साथ) |
|---|---|---|
| 5 साल से कम | ₹50,000 से ज्यादा | 10% |
| 5 साल से कम | ₹50,000 से कम | कोई टीडीएस नहीं |
| 5 साल से ज्यादा | कोई भी रकम | कोई टीडीएस नहीं |
अपनी रिटायरमेंट सेविंग को सही तरीके से मैनेज करने के लिए नियमों और जरूरी दस्तावेजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। फाइनल विड्रॉल एप्लीकेशन देने से पहले हमेशा अपनी कुल सर्विस के सालों की जांच करें। नौकरी बदलने पर पीएफ बैलेंस ट्रांसफर करना एक स्मार्ट तरीका है, क्योंकि इससे आप 5 साल की समय सीमा को आसानी से पूरा कर लेते हैं। भारी टैक्स के बोझ से बचने के लिए किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।


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