नौकरी छोड़ने के बाद अक्सर लोगों के मन में अपने पीएफ (EPF) बैलेंस को लेकर कई सवाल होते हैं। इस्तीफा देने या रिटायर होने के बाद पीएफ निकालने की प्रक्रिया को लेकर कई कर्मचारी परेशान रहते हैं। नियम के मुताबिक, अगर आप दो महीने तक बेरोजगार रहते हैं, तो अपने पीएफ की पूरी जमा राशि निकाल सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल हो चुकी है और आप अपने यूएएन (UAN) के जरिए ईपीएफओ पोर्टल पर जाकर इसे आसानी से पूरा कर सकते हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने मेंबर्स को ऑनलाइन फंड मैनेज करने की सुविधा देता है। प्रोसेस शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिव है। साथ ही, क्लेम रिजेक्ट होने से बचने के लिए अपने आधार और बैंक डिटेल्स को लिंक करना न भूलें। नौकरी बदलने पर आपके पास दो विकल्प होते हैं—या तो आप अपना पीएफ बैलेंस नई कंपनी में ट्रांसफर कर लें या फिर उसे निकाल लें।

नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकालने की शर्तें
पीएफ का पूरा पैसा आप तभी निकाल सकते हैं जब आप लगातार 60 दिनों तक बेरोजगार रहें। हालांकि, एक महीने तक नौकरी न रहने की स्थिति में आप अपनी कुल जमा राशि का 75 फीसदी हिस्सा निकाल सकते हैं। वहीं, 58 साल की उम्र पूरी होने पर आप पूरा फंड निकालने के हकदार हो जाते हैं। इन नियमों और समय-सीमा को समझकर आप बिना किसी देरी के अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकते हैं।
नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकालने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
अपना क्लेम सबमिट करने के लिए ईपीएफओ पोर्टल पर लॉग-इन करें और 'Online Services' टैब पर जाएं। पीएफ सेटलमेंट के लिए फॉर्म 19 और पेंशन के लिए फॉर्म 10C भरें। ध्यान रखें कि क्लेम प्रोसेस करने से पहले आपके पुराने एम्प्लॉयर ने पोर्टल पर आपकी 'Date of Exit' (नौकरी छोड़ने की तारीख) अपडेट कर दी हो। फाइनल सेटलमेंट के लिए यह स्टेप अनिवार्य है।
| फॉर्म का प्रकार | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| फॉर्म 19 | पीएफ का फाइनल सेटलमेंट |
| फॉर्म 10C | पेंशन की निकासी |
| फॉर्म 31 | पीएफ एडवांस (आंशिक निकासी) |
पीएफ निकासी से जुड़े टैक्स के नियम
अगर आप 5 साल की सर्विस पूरी होने से पहले पीएफ निकालते हैं, तो इस पर टैक्स लागू होता है। यदि निकासी की राशि 50,000 रुपये से अधिक है, तो टीडीएस (TDS) काटा जाता है। अगर आप इसके पात्र हैं, तो टैक्स बचाने के लिए फॉर्म 15G या 15H जमा कर सकते हैं। वैसे, पीएफ बैलेंस को नई कंपनी में ट्रांसफर करना टैक्स-फ्री ग्रोथ के लिहाज से बेहतर विकल्प है।
अपने रिटायरमेंट फंड को सही ढंग से मैनेज करने के लिए ईपीएफओ की लेटेस्ट गाइडलाइंस और डिजिटल टूल्स की जानकारी रखना जरूरी है। अपडेटेड रहने से नौकरी बदलने के दौरान भी आपकी सेविंग्स सुरक्षित रहती है। सही ऑनलाइन स्टेप्स फॉलो करके आप बिना दफ्तरों के चक्कर काटे अपना पैसा पा सकते हैं। क्लेम को तेजी से सेटल कराने के लिए सही डॉक्यूमेंटेशन सबसे महत्वपूर्ण है।


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