नयी दिल्ली। रिटायरमेंट फंड के लिए पैसा जमा करने के लिए गंभीर विचार की जरूरत होती है क्योंकि आपके रिटायर होने के बाद, आपके पास अपनी सभी जरूरतों का ध्यान रखने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होगा। इसलिए रिटायरमेंट के लिए पहले से ही तैयारी करना बेहतर ऑप्शन है। खास कर किसी भी इमरजेंसी के लिए। इसके अलावा रिटायरमेंट के बाद आपकी कमाई की संभावना कम हो जाती है। इसलिए हमेशा विविध निवेश करने और ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि), सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) और स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) जैसे सुनिश्चित रिटर्न टूल में कुछ राशि निवेश करने की सलाह दी जाती है। मगर अब सवाल यह है कि ईपीएफ, पीपीएफ और वीपीएफ में से कौन सा प्रॉविडेंट फंड इन्वेस्टमेंट टूल बेहतर पैसा बनाने वाला जरिया है और आप अपने पैसे पर अधिकतम बेनेफिट कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
सैलेरी वालों के लिए ईपीएफ है जरूरी
हर प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले सभी सैलेरी पाने वालों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि या ईपीएफ विकल्प उपलब्ध है, जिसमें कम से कम 20 कर्मचारी काम करते हों। ईपीएफ एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य निवेश है जबकि पीपीएफ एक स्वैच्छिक प्रोविडेंट फंड उपकरण है जो सभी के लिए खुला है। इसमें वे लोग भी पैसा जमा कर सकते हैं, जो सैलेरी कर्मचारी नहीं हैं। आप किसी बैंक या डाकघर में पीपीएफ खाता खोल सकते हैं और कम से कम 15 वर्षों तक निवेश जारी रख सकते हैं, जो पीपीएफ खाते की लॉक-इन अवधि है। आपके पास इसके बाद भी इसे बढ़ाने का ऑप्शन होगा।
वीपीएफ में कर सकते हैं सैलेरी कर्मचारी निवेश
वीपीएफ उन वेतनभोगी लोगों के लिए भी उपलब्ध है जिनके पास पहले से ईपीएफ खाता है और वे अपने मूल मासिक वेतन के अनिवार्य 12 प्रतिशत से अधिक निवेश करना चाहते हैं। ईपीएफ में आपको रिटायरमेंट तक निवेश करना होगा, पीपीएफ में लॉक-इन अवधि 15 साल है और 15 साल के बाद या तो आप इसे अगले पांच साल तक बढ़ा सकते हैं या पैसे निकाल सकते हैं। वीपीएफ ईपीएफ की तरह ही है जहां आपको ईपीएफ वाले ही सभी नियम और शर्तें मिलती हैं। इन तीनों पर ईपीएफओ द्वारा हर तिमाही में ब्याज दर की घोषणा की जाती है। इस समय ईपीएफ ब्याज दर 8.5 है जबकि पीपीएफ ब्याज दर 7.1 प्रतिशत है। वीपीएफ में, जिसमें ईपीएफ वाली ही ब्याज दर मिलती है, में भी 8.5 फीसदी ब्याज दर है।
कौन सा है बेहतर ऑप्शन
जानकार बताते हैं कि अगर आप एक ईपीएफ खाताधारक हैं तो पीपीएफ में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि आपको ऐसे में अतिरिक्त निवेश के लिए वीपीएफ चुनना चाहिए, जहां आपको पीपीएफ के मुकाबले अधिक ब्याज मिलेगा। खास बात यह है कि आपको 1.5 लाख रुपये तक के निवेश के लिए ईपीएफ, वीपीएफ और पीपीएफ सभी पर धारा 80 सी आयकर छूट मिलेगी। इसलिए सिंगल टूल यानी ईपीएफ और वीपीएफ में निवेश करना बेहतर है। यानी एक वेतनभोगी व्यक्ति के लिए वीपीएफ पीपीएफ से बेहतर है। बाकी ईपीएफ में निवेश तो करना ही होगा।
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