दिवाली गिफ्ट पर टैक्स का गणित: ₹50,000 से ज्यादा का तोहफा पड़ सकता है भारी

आज 6 नवंबर 2026 को दिवाली गिफ्टिंग का दौर चरम पर है, लेकिन आखिरी वक्त पर ली गई आपकी कुछ वित्तीय चॉइस टैक्स बिल का गणित बदल सकती हैं। इसके बुनियादी नियम बेहद साफ हैं। एक वित्तीय वर्ष में गैर-रिश्तेदारों (non-relatives) से मिले ₹50,000 से अधिक के गिफ्ट टैक्स के दायरे में आते हैं। वहीं, तय रिश्तेदारों से मिले तोहफे और शादी के मौके पर मिलने वाले उपहारों पर टैक्स नहीं लगता। ध्यान दें कि टैक्स गणना के लिए सोने-चांदी और ज्वेलरी की वैल्यूएशन बिल की कीमत से नहीं, बल्कि फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) के आधार पर तय की जाती है।

यहाँ दो आंकड़े सबसे ज्यादा ध्यान देने वाले हैं। गैर-रिश्तेदार से मिला ₹49,999 तक का गिफ्ट पूरी तरह टैक्स-फ्री है; लेकिन जैसे ही यह रकम ₹50,001 होती है, पूरी की पूरी राशि पर 'इंकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत टैक्स लग जाता है। गोल्ड या ज्वेलरी के मामले में जरूरत पड़ने पर Rule 11UA के तरीके अपनाएं या रजिस्टर्ड वैल्यूअर से वैल्यूएशन कराएं, और इसके इनवॉइस या अप्रैजल रिपोर्ट संभालकर रखें। अगर आप विदेश में कोई गिफ्ट भेज रहे हैं या वहां से पा रहे हैं, तब भी सेक्शन 56(2)(x) के सामान्य नियम ही लागू होंगे।

Diwali Gifting Tax Rules 2026: How to Avoid Tax on Gifts, Bonuses, and Donations This Festive Season

कंपनी से मिलने वाले दिवाली गिफ्ट्स और बोनस: क्या हैं नियम?

एम्प्लॉयर की ओर से मिलने वाला दिवाली बोनस आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाता है और इस पर TDS कटता है। वहीं कंपनी की तरफ से सालभर में मिलने वाले ₹5,000 तक के नॉन-कैश (गैर-नकद) गिफ्ट्स टैक्स-फ्री रहते हैं, जबकि कैश या भुनाए जा सकने वाले वाउचर्स पर 'परक्विजिट' (perquisites) के रूप में टैक्स देना पड़ता है। प्रमाण के तौर पर अपनी पे-स्लिप और फॉर्म 16 संभालकर रखें। इसके अलावा, फूड वाउचर्स पर Rule 3 और हालिया गाइडलाइंस के तहत अलग लिमिट्स लागू होती हैं।

80C और 80G में छूट का गणित और जरूरी डॉक्युमेंट्स

सेक्शन 80G के तहत मिलने वाली छूट सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) में मिलती है। सेक्शन 115BAC(1A) के तहत नई डिफ़ॉल्ट टैक्स व्यवस्था में 80C और 80G जैसी डिडक्शन्स पर रोक है, लेकिन सेक्शन 80CCD(2) के तहत मिलने वाले एम्प्लॉयर के NPS योगदान पर छूट जारी रहेगी। अगर आप ₹2,000 से अधिक का दान (donation) दे रहे हैं, तो भुगतान नॉन-कैश माध्यमों से ही करें और रसीद जरूर लें। बाद में इन प्रविष्टियों को अपने AIS या फॉर्म 26AS से मैच जरूर कर लें।

मद (Item)ओल्ड रिजीम (Old regime)न्यू रिजीम (New regime)
80C (PF, ELSS, PPF आदि)₹1.5 लाख तक उपलब्धअनुमति नहीं
80G (पात्र दान)सीमाओं के अधीन 50% या 100%अनुमति नहीं
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000₹75,000
एम्प्लॉयर NPS 80CCD(2)अनुमति हैअनुमति है

आसान उदाहरण और क्लबिंग के नियम: अनजाने नुकसान से बचें

मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी ₹12,00,000 है, आपको ₹50,000 का दिवाली बोनस और ₹4,500 का नॉन-कैश गिफ्ट हैम्पर मिला है। बोनस पर पूरी तरह टैक्स लगेगा, जबकि गिफ्ट हैम्पर टैक्स-फ्री रहेगा। यदि आप 80G के लिए पात्र किसी NGO को UPI के जरिए ₹10,000 दान करते हैं, तो ओल्ड रिजीम में 50% डिडक्शन के हिसाब से आपकी कर योग्य आय में ₹5,000 की कमी आएगी, वहीं न्यू रिजीम में कोई छूट नहीं मिलेगी। इसलिए 80G की रसीद और पेमेंट रिकॉर्ड जरूर रखें।

दिवाली पर गिफ्ट देने की सही रणनीति बहुत काम आती है। अगर आप अपने जीवनसाथी (Spouse) को कोई संपत्ति गिफ्ट करते हैं, तो उससे होने वाली आय आपकी इंकम में ही जोड़ी (Clubbed back) जा सकती है। इसी तरह नाबालिग बच्चे की आय भी आमतौर पर माता-पिता की आय में क्लब होती है, जिसमें प्रति बच्चा ₹1,500 की छूट मिलती है। सीधा पैसा ट्रांसफर करने के बजाय सही मामलों में साधारण लिखित एग्रीमेंट के साथ ब्याज-मुक्त लोन (Interest-free loan) देने पर विचार कर सकते हैं। UPI या वॉलेट गिफ्ट्स के मामले में AIS में मिलान के लिए अपने बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन रसीदें संभालकर रखें।

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