दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) ने शनिवार, 7 नवंबर को साइबर सुरक्षा को लेकर एक नया अलर्ट जारी किया है। इस एडवाइजरी में दिल्ली-एनसीआर के लोगों को दिवाली के मौके पर फर्जी गिफ्ट लिंक्स और QR कोड से जुड़े भ्रम फैलाकर की जा रही ठगी से आगाह किया गया है। साइबर अपराधी बधाई संदेशों या डिलीवरी अपडेट के नाम पर खतरनाक APK फाइलें भेज रहे हैं। त्योहारों की खरीदारी के बीच फिशिंग और फर्जी अधिकारी बनकर कॉल करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। किसी भी अंजान पेमेंट रिक्वेस्ट, OTP की मांग या ऐप डाउनलोड करने के मैसेज को तुरंत खतरे का संकेत समझें।
इस बार की एडवाइजरी में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर है कि पैसे पाने के लिए कभी भी QR कोड स्कैन न करें। किसी 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' को अप्रूव करने का सीधा मतलब है कि पैसा आपके खाते से कटेगा। जालसाज सरकारी गिफ्ट का झांसा देकर, फर्जी ई-चालान लिंक और OTP चुराने वाली APK फाइलों के जरिए लोगों को फंसा रहे हैं। कोई चाहे खुद को कितना भी बड़ा अधिकारी बताए, अपने UPI PIN या बैंकिंग OTP की मांग को पूरी तरह खारिज कर दें।

दिवाली साइबर स्कैम अलर्ट: QR कोड, फर्जी गिफ्ट लिंक और APK फाइलों का जाल
व्हाट्सएप और कॉल्स की सुरक्षा के लिए ये आसान कदम उठाएं: सबसे पहले अपना व्हाट्सएप खोलें, Linked Devices ऑप्शन में जाएं और किसी भी अंजान डिवाइस या सेशन को तुरंत लॉगआउट कर दें। टू-स्टेप वेरिफिकेशन (Two-Step Verification) को इनेबल करें और हफ्ते में एक बार लिंक किए गए डिवाइसेस को जरूर चेक करें। टेलीकॉम विभाग (DoT) और I4C ने कॉल-फॉरवर्डिंग स्कैम को लेकर भी चेतावनी दी है, जिसके जरिए वॉयस OTP चुराए जाते हैं। अगर यह एक्टिव है, तो अपने फोन से ##002# डायल करके सभी फॉरवर्डिंग सर्विस बंद कर दें। इसके अलावा, अपने एंड्रॉइड या आईफोन पर SIM PIN सेट करके अपने नंबर को पूरी तरह सुरक्षित बनाएं।
ठगी होने पर तुरंत क्या करें: हेल्पलाइन नंबर और रिकवरी का 'गोल्डन आवर'
अगर गलती से आपके खाते से पैसे कट जाएं, तो 'गोल्डन आवर' (शुरुआती एक घंटे) में तुरंत एक्शन लें। बैंकिंग फ्रीज प्रोसेस शुरू कराने के लिए सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पूरी जानकारी के साथ शिकायत दर्ज कराएं। मनी रिस्टोरेशन सिस्टम के जरिए बैंकों को अलर्ट भेजा जाता है ताकि पैसों को ट्रेस करके ब्लॉक किया जा सके। ठगी गई सटीक रकम, UPI ID और ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर देने से आपके पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
UPI सुरक्षा: 'Collect' और 'Pay' का फर्क समझें, ऑटो-डेबिट पर रखें नजर
फेस्टिव ऑफर्स का फायदा उठाते समय UPI का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करें। किसी भी अनजान कलेक्ट रिक्वेस्ट या रिफंड प्रॉम्प्ट को गिफ्ट न समझें, यह आपके खाते से पैसे काटने की मंजूरी मांगता है। सिर्फ भरोसेमंद दुकानदारों या मर्चेंट के QR कोड ही स्कैन करें और भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर आ रहे नाम और UPI ID का मिलान जरूर करें। अगर चैट पर भेजी गई ID मेल न खाए, तो पेमेंट रद्द कर दें। रिचार्ज और वॉलेट के लिए हमेशा ऑफिशियल ऐप्स का ही इस्तेमाल करें और फ्री ट्रायल खत्म होने के बाद ऑटो-डेबिट सेटिंग्स को जरूर रिव्यू करें।
यह एडवाइजरी भले ही दिल्ली-एनसीआर के लिए जारी की गई है, लेकिन ठगी का यह तरीका पूरे देश में अपनाया जा रहा है। व्हाट्सएप हैकिंग, कॉल-फॉरवर्डिंग और ई-चालान वाली APK फाइलों से सतर्क रहें। अपने फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें, सिम पर लॉक लगाएं, अनजान सोर्स से ऐप डाउनलोड न करें और हेल्पलाइन नंबर 1930 हमेशा याद रखें। बिना घबराए सही समय पर दी गई जानकारी आपके डूबे हुए पैसे वापस दिला सकती है।


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