Delhi Lakhpati Bitiya Yojana: राजधानी दिल्ली में इस बार होली से पहले हजारों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान आने वाली है। राज्य सरकार 2 मार्च को करीब 40,000 बेटियों के बैंक खातों में लगभग 100 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने जा रही है। इसी मौके पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें द्रौपदी मुर्मू योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे।

लाडली योजना से आगे का कदम
दिल्ली में पहले से चल रही 'लाडली योजना' को अब नए रूप में लागू किया गया है। पहले इस योजना में जन्म और स्कूल के अलग-अलग चरणों पर छोटी-छोटी किस्तों में रकम जमा की जाती थी। अब सरकार ने इसे और प्रभावी बनाने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत कुल 56,000 रुपए अलग-अलग समय पर जमा किए जाएंगे। यह रकम 21 साल की उम्र तक ब्याज के साथ बढ़कर एक लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बेटियों को 12वीं के बाद भी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। कई बार आर्थिक तंगी की वजह से लड़कियों की पढ़ाई बीच में रुक जाती है। नई योजना का मकसद ऐसी स्थिति को रोकना है।
किन परिवारों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का फायदा उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी सालाना इनकम 1.20 लाख रुपए से कम है। परिवार को कम से कम तीन साल से दिल्ली में रहना जरूरी है और बच्ची का जन्म भी यहीं हुआ होना चाहिए। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही इस योजना का फायदा ले सकती हैं।
योजना का दायरा अब उन छात्राओं तक भी बढ़ा दिया गया है जो किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या University Grants Commission से मान्य संस्थान में ग्रेजुएशन या डिप्लोमा कर रही हैं। हालांकि अंतिम भुगतान तभी होगा जब छात्रा तय पढ़ाई पूरी करेगी।
जल्दी शादी पर नहीं मिलेगा पैसा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि अगर 18 साल से पहले बेटी की शादी कर दी जाती है तो उसे योजना की अंतिम राशि नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि बेटियां पहले पढ़ें, आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।
100 करोड़ की सीधी राहत
सरकार का कहना है कि पहले कई बच्चियां इस योजना से बाहर रह गई थीं। अब विशेष अभियान चलाकर हजारों नई लाभार्थियों को जोड़ा गया है। इस बार 40,000 बेटियों के खातों में 100 करोड़ रुपए डालने की तैयारी है।
सरकार इसे बेटियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। इससे न सिर्फ परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि समाज में लड़कियों की स्थिति और मजबूत होगी।


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