भारत की साइबर क्राइम नोडल एजेंसी (I4C) ने आज, 20 अक्टूबर को एक अर्जेंट अलर्ट जारी किया है। 19 अक्टूबर की इस एडवाइजरी में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रहे डीपफेक विज्ञापनों से सावधान रहने की हिदायत दी गई है। इन विज्ञापनों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की फर्जी डीपफेक वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल कर मुफ्त सरकारी योजनाओं और कैशबैक का लालच दिया जा रहा है। जालसाज लोगों को झांसे में लेकर उनसे UPI Collect रिक्वेस्ट अप्रूव करवा रहे हैं या फिर उनका UPI PIN हासिल कर रहे हैं।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले ये स्पॉन्सर्ड विज्ञापन यूजर्स को पर्सनल चैट या फर्जी फॉर्म की तरफ रिडायरेक्ट करते हैं। इसके बाद ठग रजिस्ट्रेशन फीस, टैक्स या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठते हैं और बार-बार पेमेंट मांगकर अकाउंट खाली कर देते हैं। इन विज्ञापनों में स्क्रैच-कार्ड या 'स्पिन एंड विन' जैसे लुभावने प्रलोभन भी दिए जाते हैं, जो आखिर में यूजर्स को फिशिंग साइट्स या फर्जी मर्चेंट पेमेंट पेज पर ले जाते हैं।

I4C एडवाइजरी: समझिए क्या है UPI Collect स्कैम?
UPI Collect एक ऐसा फीचर है जिससे कोई मर्चेंट आपके ऐप पर पैसे की रिक्वेस्ट भेजता है और आपको उसे अप्रूव करना होता है। लेकिन ध्यान रखें, इसे अप्रूव करने के लिए PIN दर्ज करना पड़ता है, जिसका सीधा मतलब है कि आपके खाते से पैसे कटेंगे। एडवाइजरी में साफ कहा गया है: "UPI PIN केवल पैसे भेजने या पेमेंट ऑथराइज करने के लिए होता है, पैसे पाने (क्रेडिट) के लिए PIN डालने की कोई जरूरत नहीं होती।" इसलिए किसी भी अनजान रिक्वेस्ट को तुरंत रिजेक्ट करें, मर्चेंट का नाम ध्यान से चेक करें और अपनी डेली ट्रांजैक्शन लिमिट कम ही रखें।
डीपफेक सरकारी विज्ञापनों के बड़े रेड फ्लैग्स
| रेड फ्लैग (खतरे की घंटी) | यह क्यों खतरनाक है? |
|---|---|
| एडवांस रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस की मांग | असली सरकारी योजनाएं कभी भी पहले पैसे नहीं मांगतीं। |
| छोटे या गलत स्पेलिंग वाले लिंक (URLs) | असली वेबसाइट और लैंडिंग पेज को छिपाने का यह आम फिशिंग तरीका है। |
| स्क्रैच-कार्ड या स्पिन-एंड-विन से इनाम जीतना | इसका इस्तेमाल आपको पेमेंट रिक्वेस्ट तक खींचने के लिए किया जाता है। |
| कलेक्ट रिक्वेस्ट में मर्चेंट के नाम का मिसमैच होना | नाम में गड़बड़ी फर्जी मर्चेंट या म्यूल अकाउंट की निशानी है। |
| अनजान "सपोर्ट" ऐप डाउनलोड करने को कहना | इसमें मालवेयर का भारी जोखिम है और फोन का रिमोट एक्सेस मिल सकता है। |
| अनवेरिफाइड हैंडल या असली जैसे दिखने वाले पेज | फर्जी अकाउंट्स के जरिए ही डीपफेक वीडियो और झूठे दावे फैलाए जाते हैं। |
अब क्या करें: 1930 और बैंक से जुड़े जरूरी कदम
अगर आप इस फ्रॉड के संपर्क में आए हैं, तो तुरंत बातचीत बंद करें, स्क्रीनशॉट लें और ट्रांजैक्शन आईडी नोट कर लें। बिना देर किए तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें ताकि पैसे होल्ड कराए जा सकें, और इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। तुरंत अपने बैंक को सूचित करके यूपीआई और नेट बैंकिंग सेवा को लॉक करवाएं। अपने ऑटो-पे मैंडेट्स को रिव्यू करें और रिफंड की मांग करें। सोशल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे विज्ञापनों और अकाउंट्स को तुरंत रिपोर्ट करें और केवल वेरिफाइड ऑफिशियल हैंडल्स पर ही भरोसा करें।
डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों को गुमराह करना बेहद आसान हो गया है और अब विज्ञापनों के जरिए इस ठगी को बड़े पैमाने पर फैलाया जा रहा है। I4C की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट इन अभियानों पर लगातार नजर रख रही है, वहीं टेक कंपनियों को भी डिटेक्शन मजबूत करने को कहा गया है। यूजर्स अपने डिवाइस और ऐप्स पर सिक्योरिटी लॉक लगाएं, UPI लिमिट सेट करें और किसी भी अनजान थर्ड-पार्टी ऐप को इंस्टॉल करने से बचें। याद रखें, आपकी थोड़ी सी सतर्कता ही साइबर ठगी से आपका सबसे बड़ा बचाव है।


Click it and Unblock the Notifications