आज, 9 अक्टूबर 2026 की ताज़ा अपडेट: पूरे भारत में व्हाट्सऐप और QR कोड के ज़रिए साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। CERT-In और गृह मंत्रालय की ओर से जारी हालिया चेतावनियों के मुताबिक, जालसाज सीधे अकाउंट हैक करने और पेमेंट फ्रॉड को अंजाम देने में जुटे हैं। ये अपराधी मालवेयर वाली फाइलों, अटैचमेंट और QR कोड फ़िशिंग के ज़रिए UPI, SIM और OTT लॉगिन में सेंध लगा रहे हैं। इस गाइड की मदद से जानिए कि इन सरकारी चेतावनियों के आधार पर भारतीय यूज़र्स खुद को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत क्या-क्या कदम उठा सकते हैं।
साइबर अपराधी अब लोगों को अपनी बातों में फंसाने (सोशल इंजीनियरिंग) के साथ-साथ नई-नई तकनीकी चालाकियां भी अपना रहे हैं। ये व्हाट्सऐप पर खतरनाक APK लिंक भेजने, PDF फाइलों के अंदर QR कोड छिपाने से लेकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर फर्जी वीडियो कॉल तक कर रहे हैं। अगर आपको ज़रा भी फ्रॉड का अहसास हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और अपने ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी नोट कर लें। इसके बाद, संचार साथी (Sanchar Saathi) के चक्षु (Chakshu) पोर्टल पर संदिग्ध कॉल, SMS या व्हाट्सऐप मैसेज को तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि नेटवर्क लेवल पर ही ऐसे नंबरों को ब्लॉक किया जा सके।

CERT‑In की एडवाइजरी: व्हाट्सऐप, QR-कोड और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी के बड़े संकेत
साइबर फ्रॉड के इन संकेतों को पहचानना बहुत आसान है, फिर भी लोग अक्सर चूक जाते हैं। हमेशा याद रखें—पैसे पाने या रिसीव करने के लिए कभी भी QR कोड स्कैन न करें; QR स्कैन करने के बाद UPI पिन डालते ही आपके खाते से पैसे कट जाते हैं। व्हाट्सऐप पर बिना मांगे आई किसी भी अटैचमेंट फाइल को खतरनाक ही मानें, भले ही वो किसी जानने वाले ने भेजी हो। "SIM बंद कर दिया जाएगा" या "KYC एक्सपायर हो गया है" जैसी डराने वाली बातें डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध में फंसाने और ब्लैकमेल करने की चालें हैं।
UPI, SIM और OTT सिक्योरिटी: साइबर हमलों से बचने की 6-स्टेप चेकलिस्ट
| कदम | आज ही क्या करें |
|---|---|
| UPI लिमिट | डेली ट्रांसफर लिमिट घटाएं; बेफिजूल के ऑटोपे (Autopay) मेंडेट बंद करें; ऐप लॉक ऑन रखें। |
| व्हाट्सऐप सिक्योरिटी | टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें; हर हफ्ते लिंक्ड डिवाइसेस (Linked Devices) की जांच करें। |
| SIM/eSIM लॉक | मजबूत SIM PIN सेट करें; PUK कोड संभालकर रखें; eSIM का QR कोड किसी से शेयर न करें। |
| कॉल कंट्रोल | कॉल फॉरवर्डिंग और USSD डायवर्जन बंद करें; SIM बदलने के बाद इन्हें दोबारा ज़रूर चेक करें। |
| ऐप्स की सुरक्षा | अनजान APK इंस्टॉल ब्लॉक रखें; ऐप परमिशन चेक करें; Play Protect स्कैन चलाते रहें। |
| OTT एक्टिवेशन | प्लान हमेशा ऑफिशियल ऐप के अंदर से एक्टिवेट करें; चैट पर आए लिंक को नजरअंदाज करें। |
सुरक्षा से जुड़े इन कदमों को आज ही पूरा करें और आपात स्थिति में पहले एक घंटे में उठाए जाने वाले जरूरी कदमों को समझ लें। अगर धोखाधड़ी का अंदेशा हो, तो तुरंत मेंडेट फ्रीज करें, व्हाट्सऐप के सभी एक्टिव सेशन लॉगआउट (Revoke) करें और अपने डिवाइस को स्कैन करें। SIM PIN का इस्तेमाल करने और फॉरवर्डिंग बंद रखने से आपके अकाउंट का कंट्रोल दूसरों के हाथ में जाने से रुक सकता है। इसके अलावा, CERT-In ने फ़िशिंग अभियानों में इस्तेमाल होने वाले अटैचमेंट और QR कोड से सावधान रहने व टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखने की सलाह दी है।
चक्षु (Chakshu) पोर्टल और 1930 नंबर पर शिकायत कैसे दर्ज कराएं
अगर आपको पिछले 30 दिनों के भीतर कोई संदिग्ध कॉल, SMS या व्हाट्सऐप मैसेज मिला है, लेकिन कोई पैसों का नुकसान नहीं हुआ है, तो चक्षु (Chakshu) पोर्टल का इस्तेमाल करें। वहां स्क्रीनशॉट, मैसेज/कॉल का ज़रिया और समय दर्ज करें; इसका वेरिफिकेशन OTP के जरिए होता है। लेकिन अगर पैसे ठग लिए गए हैं, तो सबसे पहले 1930 पर कॉल करें, फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। आधिकारिक पोर्टल पर स्पष्ट निर्देश है, "cybercrime.gov.in या 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें।"
ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले आम बहानों जैसे "KYC बंद हो गया," "आपका SIM बंद हो जाएगा," या "तुरंत पैसा भेजो" जैसी बातों से हमेशा सावधान रहें। OTT सब्सक्रिप्शन हमेशा ऑफिशियल ऐप के अंदर ही एक्टिवेट करें, चैट पर मिले किसी लिंक या फॉर्म से नहीं। बाहर से मिलने वाली APK फाइलें इंस्टॉल करने से साफ इनकार कर दें और पैसे पाने के लिए कभी भी UPI PIN न दर्ज करें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपने फोन में 1930 नंबर सेव रखें और चक्षु पोर्टल को बुकमार्क कर लें।


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