Credit Card Myths: क्रेडिट कार्ड से जुड़ी हुई ये बाते नहीं हैं सच, फटाफट कर लें चेक

आज के समय में क्रेडिट कार्ड भारत में बहुत आम हो चुके हैं। हर छोटे-बड़े खर्च के लिए लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आज भी कई लोग ऐसे हैं जो इससे जुड़ी गलत चीजों के कारण बड़ी फाइनेंशियल गलतियां कर बैठते हैं। 2025 में जब फाइनेंस की दुनिया और भी कठिन हो गई है, तो ज़रूरी है कि हम इन कार्ड्स को लेकर सही समझ रखें। वरना छोटी-छोटी गलतियों से क्रेडिट स्कोर बिगड़ सकता है, जुर्माने लग सकते हैं, और आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।

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हर महीने थोड़ा बकाया रखने से क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है

कई लोगों को लगता है कि अगर वे हर महीने कुछ पैसे बचाकर चुकाएं, तो इससे उनका क्रेडिट स्कोर सुधरेगा। लेकिन सच्चाई इससे उलटी है। अगर आप पूरा बिल समय पर नहीं चुकाते, तो बैंक आपसे भारी ब्याज वसूलता है जो सालाना 30% से ज्यादा हो सकता है। असल में हर महीने पूरा बिल समय से चुकाना ही क्रेडिट स्कोर को सुधारने का सबसे असरदार तरीका है।

खुद का क्रेडिट स्कोर चेक करने से स्कोर घटता है

यह बहुत आम गलतफहमी है। लोग सोचते हैं कि अगर वे बार-बार अपना क्रेडिट स्कोर चेक करेंगे तो उनका स्कोर कम हो जाएगा। जबकि सच यह है कि खुद स्कोर देखना 'सॉफ्ट इन्क्वायरी' होता है और इसका कोई खराब असर नहीं होता। बैंक जब लोन के लिए स्कोर चेक करते हैं, वह 'हार्ड इन्क्वायरी' कहलाता है और उसका हल्का असर पड़ सकता है।

क्रेडिट कार्ड सिर्फ मुश्किल समय के लिए होते हैं

अक्सर लोग सोचते हैं कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में ही करना चाहिए। लेकिन आज के दौर में कार्ड का नियमित और समझदारी से यूज करना आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है। रिवॉर्ड प्वाइंट, कैशबैक, छूट और फ्रॉड से सुरक्षा ये सभी सुविधाएं नियमित इस्तेमाल से ही मिलती हैं।

ज्यादा क्रेडिट कार्ड होने से स्कोर गिरता है

अगर आपके पास कई क्रेडिट कार्ड हैं, तो यह जरूरी नहीं कि यह बुरा ही हो। अगर आपने एक साथ कई कार्ड निकाले हैं तो थोड़े समय के लिए स्कोर पर असर पड़ सकता है। लेकिन लंबे समय तक अगर आप सभी कार्ड को समय पर पेमेंट के साथ इस्तेमाल करते हैं और क्रेडिट लिमिट का कम हिस्सा खर्च करते हैं, तो इससे स्कोर बेहतर होता है।

'मिनिमम अमाउंट ड्यू' भरना काफी है

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे हर महीने सिर्फ 'मिनिमम अमाउंट' चुका दें, तो उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। असल में इससे सिर्फ लेट फीस से बचा जा सकता है। बाकी बची रकम पर ब्याज लगता रहेगा, जो बाद में बड़ा कर्ज बन सकता है। इसलिए कोशिश करें कि हर महीने पूरा भुगतान करें, सिर्फ 'मिनिमम' नहीं।

'जीरो फीस' कार्ड मतलब कोई खर्च नहीं

कई बार कार्ड कंपनियां 'लाइफटाइम फ्री' या 'नो एनुअल फीस' कहकर कार्ड देती हैं। लेकिन इसमें दूसरे छिपे हुए चार्ज जैसे लेट पेमेंट फीस, विदेशी लेन-देन पर फीस, कैश निकासी फीस आदि होते हैं। कार्ड लेने से पहले शर्तें ध्यान से पढ़ें, तभी तय करें कि यह कार्ड सच में फ्री है या नहीं।

भारत में अब भी जानकारी की कमी

2024 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग आधे से ज्यादा कार्डधारकों को यह तक नहीं पता था कि क्रेडिट स्कोर कैसे बनता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि ग्राहकों को RBI, SEBI और EPFO जैसी संस्थाओं की वेबसाइट पर जाकर जानकारी लेनी चाहिए।

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