सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने कल शाम करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए दो अहम डेडलाइन्स आगे बढ़ा दी हैं। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की नई तारीख 21 अक्टूबर 2026 होगी। वहीं, ऑडिट वाले मामलों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। यह फैसला उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिन पर स्टैट्युटरी ऑडिट के नियम लागू होते हैं। प्रेस नोट में कहा गया, "इस संबंध में औपचारिक आदेश/अधिसूचना अलग से जारी की जा रही है।"
तारीखों के अलावा यह जानना भी बहुत जरूरी है कि इस राहत का फायदा किसे मिलेगा। यह छूट उन कंपनियों, फर्मों और अन्य टैक्सपेयर्स पर लागू होती है जिनके खातों का ऑडिट होना जरूरी है, जिनमें ऑडिटेड फर्मों के पार्टनर्स भी शामिल हैं। हालांकि, नॉन-ऑडिट वाले करदाताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ऑडिट की तय तारीख (specified date) 30 सितंबर से बढ़कर 21 अक्टूबर होने से टैक्स टीमों को सितंबर के आखिर में होने वाली आपाधापी से बड़ी राहत मिलेगी।

CBDT की राहत: नई तारीखें और आपकी तैयारी
| विवरण | पुरानी तारीख | नई तारीख | किन्हें मिलेगा फायदा |
|---|---|---|---|
| टैक्स ऑडिट रिपोर्ट | 30 सितंबर 2026 | 21 अक्टूबर 2026 | ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाता |
| ITR फाइलिंग | 31 अक्टूबर 2026 | 21 नवंबर 2026 | ऊपर बताए गए सभी करदाता |
इस मिले हुए समय का सही इस्तेमाल करने के लिए टैक्स टीमें इस हफ्ते ट्रायल बैलेंस फाइनल करें, लेजर फ्रीज करें और वर्किंग पेपर्स लॉक कर लें। रिपोर्ट अपलोड करने से पहले यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) जरूर जेनरेट करें और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की वैलिडिटी चेक कर लें। लेटेस्ट यूटिलिटी से JSON वैलिडेट करें और पोर्टल पर कम ट्रैफिक वाले समय में अपलोडिंग शेड्यूल करें। पोर्टल टोकन कतारों का इस्तेमाल करें, आखिरी दिन की आपाधापी से बचें और वीकेंड्स पर पार्टनर्स के रिव्यू का शेड्यूल व्यवस्थित रखें।
जुर्माना और पोर्टल टिप्स: क्या बदला और क्या नहीं
ध्यान रखें कि डेडलाइन बढ़ने से सिर्फ समय मिला है, पेनल्टी का खतरा खत्म नहीं हुआ है। समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने पर सेक्शन 271B के तहत जुर्माना लग सकता है। यह पेनल्टी टर्नओवर का 0.5 फीसदी या ₹1.5 लाख (जो भी कम हो) हो सकती है। वहीं, ITR की नई डेडलाइन चूकने पर सेक्शन 234F के तहत लेट फीस लगेगी—आय ₹5 लाख तक होने पर ₹1,000 और उससे ज्यादा होने पर ₹5,000 चुकाने होंगे।
| ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रिजीम | ओल्ड रिजीम | न्यू रिजीम |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹75,000 |
| रिबेट की सीमा | ₹5,00,000 तक टैक्स-फ्री | ₹12,00,000 तक टैक्स-फ्री |
| पॉपुलर डिडक्शंस | 80C/80D/HRA आदि की छूट शामिल | ज्यादातर छूट उपलब्ध नहीं |
इसे एक छोटे से उदाहरण से समझें। मान लीजिए न्यू रिजीम के तहत किसी सैलरीड पार्टनर की टैक्स योग्य आय ₹12 लाख है। मौजूदा रिबेट नियमों के तहत समय पर रिटर्न भरने पर टैक्स शून्य (Nil) बनता है। लेकिन अगर रिटर्न 21 नवंबर के बाद दाखिल किया गया, तो कुल आय ₹5 लाख से अधिक होने की वजह से ₹5,000 की लेट फीस देनी ही पड़ेगी। इसलिए फाइनल फाइलिंग से पहले ऊपर दी गई टेबल की मदद से रिजीम का सही चुनाव कर लें।


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