सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने टैक्स प्रोफेशनल्स के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी दो अहम डेडलाइन्स को 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। 17 सितंबर 2026 के नोटिफिकेशन नंबर 120/2026, G.S.R. 822(E) के जरिए सीबीडीटी ने नियम 246(4) और 256(4) के तहत अंतिम तिथि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया है। इसके साथ ही वैल्यूअर्स (Valuers) के लिए फॉर्म 169 और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए फॉर्म 171 में संशोधन किया गया है। यह आदेश गजट में प्रकाशन के साथ ही लागू हो गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह राहत नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए है, न कि आम टैक्सपेयर्स के रिटर्न फाइलिंग से जुड़ी। साफ कर दें कि यह ITR फाइल करने या टैक्स ऑडिट की आखिरी तारीख में कोई बढ़ोतरी नहीं है। गजट में किया गया यह बदलाव सिर्फ वैल्यूअर्स और टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन नियमों और फॉर्म्स तक ही सीमित है।

CBDT ने बढ़ाई रजिस्ट्रेशन डेडलाइन: किसे और कैसे करना होगा आवेदन
सेक्शन 514 के तहत आने वाले वैल्यूअर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद Income-tax Act 2025 के विकल्प में जाकर फॉर्म 169 (Form 169) सर्च करके प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर को आवेदन भेजना होगा। आवेदन के साथ पैन (PAN), शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण, पिछले 3 साल के अनुभव का ब्योरा और अगर पुराना वेल्थ-टैक्स एक्ट सर्टिफिकेट हो तो उसे अपलोड करना अनिवार्य है। इसके लिए ₹10,000 की फीस तय की गई है, हालांकि वेल्थ-टैक्स एक्ट वाले वैल्यूअर्स को इससे छूट दी गई है। आमतौर पर अथॉरिटी इन आवेदनों का निपटारा 6 महीने के भीतर कर देती है।
वहीं, सेक्शन 515 के तहत आने वाले अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स को पैन, पता, योग्यता के दस्तावेज और 1 साल की प्रैक्टिस की घोषणा के साथ संशोधित फॉर्म 171 (Form 171) जमा करना होगा। 1961 एक्ट के तहत रजिस्टर्ड प्रैक्टिशनर्स का रजिस्ट्रेशन फिलहाल मान्य रहेगा, लेकिन उन्हें 31 मार्च 2027 तक इसे अपडेट या माइग्रेट करना होगा। इसके अलावा, MSME कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी पेशेवर काम से पहले यह जांच लें कि उनका एक्सटर्नल टैक्स एजेंट पोर्टल पर 'My CA' या 'Authorised Partners' में दिख रहा है या नहीं, और उनसे नया सर्टिफिकेट नंबर जरूर प्राप्त कर लें।
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: नौकरीपेशा लोग ऐसे समझें अपना फायदा
इस वित्त वर्ष अपने कैश फ्लो की प्लानिंग का आसान तरीका यह है कि आप दोनों रिजीम की तुलना कर लें। डिफॉल्ट न्यू रिजीम के तहत, कुछ शर्तों के साथ रिबेट (छूट) के जरिए ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं बनता। डिडक्शन का दावा करने के लिए ओल्ड रिजीम चुनने से पहले दोनों के अंतर को समझ लेना बेहतर होगा। नीचे दिया गया उदाहरण AY 2026-27 (FY 2025-26) के लिए दिए गए टैक्स स्लैब पर आधारित है।
| टैक्स रिजीम | अनुमानित शर्तें/आंकड़े | अनुमानित टैक्स |
|---|---|---|
| न्यू रिजीम | सैलरी ₹12,00,000; स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000; ₹12 लाख तक रिबेट का फायदा | शून्य (रिबेट के कारण टैक्स जीरो हो जाता है) |
| ओल्ड रिजीम | सैलरी ₹12,00,000; स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000; सेक्शन 80C ₹1,50,000 | ≈₹1,17,000 (4% सेस सहित) |
अब सबसे जरूरी बात यह है कि समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। CAs, वैल्यूअर्स और MSME के फाइनेंस हेड्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने फॉर्म और जरूरी दस्तावेज पहले ही तैयार करके अपलोड कर दें, ताकि मार्च की आखिरी हड़बड़ी और अप्रूवल में देरी से बचा जा सके। पोर्टल पर अपने एप्लिकेशन का स्टेटस ट्रैक करते रहें और अथॉरिटी द्वारा मांगी गई किसी भी जानकारी का तुरंत जवाब दें। नियमों में हुए इस बदलाव से तैयारी का अतिरिक्त समय जरूर मिला है, लेकिन इससे आम टैक्सपेयर्स के फाइलिंग कैलेंडर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


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