बजट 2024 नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम (NTR) के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन (SD) की लिमिट बढ़ाकर ₹75,000 सालाना कर दी है। हालांकि, अब भी कई टैक्सपेयर्स इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर यह फायदा काम कैसे करता है। इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि आप इस बदलाव के जरिए अपनी ज्यादा से ज्यादा बचत कैसे कर सकते हैं।
स्टैंडर्ड डिडक्शन एक ऐसी फ्लैट छूट है, जिसे टैक्स कैलकुलेट करने से पहले आपकी कुल सैलरी से सीधे घटा दिया जाता है। इसके लिए आपको रेंट एग्रीमेंट या इंश्योरेंस जैसे किसी भी निवेश का सबूत देने की जरूरत नहीं होती। पहले न्यू टैक्स रिजीम में यह छूट सिर्फ ₹50,000 थी। अब इस लिमिट के बढ़ने से आपकी मेहनत की कमाई का ज्यादा हिस्सा आपकी जेब में बचेगा, जिससे यह टैक्स सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक हो गया है।

न्यू टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन का गणित: ऐसे करें प्लानिंग
नए नियमों के मुताबिक, अगर आपकी सालाना सैलरी ₹7.75 लाख तक है, तो आपको एक रुपया भी टैक्स नहीं देना होगा। दरअसल, ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन आपकी टैक्सेबल इनकम को काफी कम कर देता है और टैक्स रिबेट मिलने के बाद आपकी कुल देनदारी जीरो हो जाती है। खास बात यह है कि इसका फायदा सभी सैलरीड क्लास और पेंशनभोगियों को मिलेगा। इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान हो गई है और आपको भारी-भरकम कागजी कार्रवाई से भी मुक्ति मिलती है।
| टैक्सपेयर की कैटेगरी | पुराना स्टैंडर्ड डिडक्शन | नया स्टैंडर्ड डिडक्शन |
|---|---|---|
| नौकरीपेशा कर्मचारी | ₹50,000 | ₹75,000 |
| पेंशनभोगी | ₹50,000 | ₹75,000 |
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति की सालाना ग्रॉस टोटल इनकम (GTI) ₹10,00,000 है। स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने के बाद उसकी टैक्सेबल इनकम घटकर ₹9,25,000 रह जाएगी। इस बदलाव की वजह से टैक्सपेयर कम टैक्स वाले स्लैब में आ जाता है, जिससे उसे पिछले नियमों के मुकाबले सीधे ₹17,500 की बचत होती है। यह एक्स्ट्रा बचत मिडिल क्लास परिवारों को अपना मंथली बजट बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करेगी।
क्या आप इस छूट के हकदार हैं? जानें जरूरी नियम
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (ITD) ने साफ किया है कि यह डिडक्शन आपकी सैलरी पर अपने आप लागू हो जाता है। इसके लिए आपको अपनी कंपनी या एम्प्लॉयर के पास कोई स्पेशल क्लेम करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह जरूर चेक कर लें कि आपने न्यू टैक्स रिजीम (NTR) को चुना है या नहीं। वैसे तो ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, लेकिन अब सरकार ने NTR को 'डिफ़ॉल्ट' विकल्प बना दिया है। सही विकल्प का चुनाव आपके सालाना निवेश पर निर्भर करता है।
न्यू टैक्स रिजीम में हुए हालिया बदलावों ने टैक्स प्लानिंग को काफी सरल बना दिया है। स्टैंडर्ड डिडक्शन का सही इस्तेमाल करके आप हर महीने अपनी 'टेक-होम सैलरी' बढ़ा सकते हैं। बेहतर होगा कि आप साल की शुरुआत में ही अपनी सैलरी के कंपोनेंट्स और टैक्स स्लैब का रिव्यू कर लें। समय रहते की गई यह प्लानिंग न केवल आपको सरकारी नीतियों का पूरा लाभ दिलाएगी, बल्कि आपके फाइनेंशियल फ्यूचर को भी सुरक्षित करेगी।


Click it and Unblock the Notifications