नयी दिल्ली। बजट 2020 में केंद्र सरकार नया टैक्स सिस्टम भी लाई। सरकार का दावा था कि नये टैक्स सिस्टम से करदाताओं को फायदा होगा। मगर एक नये सर्वे में सरकार की यह बात गलत साबित होती मालूम हो रही है। कई कंपनियों में एचआर और फाइनेंशियल प्रोफेश्नल के बीच एक सर्वे किया गया है। इनमें 81 प्रतिशत अपने कर्मचारियों के लिए नए वैकल्पिक टैक्स सिस्टम को लाभकारी नहीं मानते हैं। यानी 81 फीसदी एम्प्लोयर्स का मानना है कि उनके स्टाफ के लिए नया टैक्स सिस्टम फायदेमंद नहीं होगा। बजट 2020-21 में सरकार ने उन करदाताओं के लिए नया टैक्स सिस्टम पेश किया, जो सभी मौजूदा कटौती और छूट छोड़ने को तैयार हों। नये टैक्स सिस्टम में 70 तरह की छूट से हाथ धोना पड़ेगा। इनमें आयकर कानून के सेक्शन 16 में मनोरंजन भत्ता और एम्प्लॉयमेंट/प्रोफेशनल टैक्स के लिए छूट और होम लोन चुकाने पर मिलने वाला टैक्स बेनेफिट शामिल है।
119 कंपनियों के बीच हुआ सर्व
एचआर विशेषज्ञ मर्सर ने ये सर्वे 119 कंपनियों के एचआर और फाइनेंशियल प्रोफेश्नल के बीच किया है। सर्वे में भाग लेने वाले 60 प्रतिशत लोगों को लगता है कि 5-10 लाख रुपये और 10-25 लाख रुपये की आय सीमा वाले लोग नये टैक्स सिस्टम से प्रभावित होंगे। वहीं जवाब देने वाले 80 प्रतिशत से अधिक एम्प्लोयर्स को लगता है कि नये टैक्स सिस्टम से उनके कर्मचारियों के रिटायरमेंट बचत व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्हें यह भी डर है कि नया टैक्स सिस्टम कर्मचारियों को उनके एम्प्लोयर से स्वैच्छिक लाभ लेने से रोकेगा।
बहुत कम लोग चुनेंगे नयी व्यवस्था
83 प्रतिशत उत्तरदाताओं को लगता है कि उनके 30 प्रतिशत से कम कर्मचारी ही नये टैक्स सिस्टम का विकल्प चुनेंगे। स्थिति यह है कि एचआर प्रमुखों को इस बात की चिंता है कि नये टैक्स सिस्टम के बारे में कर्मचारियों से बातचीत करना भी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा दोहरी कर व्यवस्था को संभालना भी एचआर सिस्टम के लिए एक चुनौती होगी। जिन सेक्टरों में यह सर्वे किया गया है उनमें फाइनेंशियल सर्विसेज, मोटर वाहन निर्माण, आईटी / आईटीईएस, स्वास्थ्य सेवा, रसायन / जीवन विज्ञान, कंसल्टेंसी, दूरसंचार, एफएमसीजी / खुदरा, यात्रा / रसद, और शिक्षा शामिल हैं।
क्या है नया टैक्स सिस्टम
नये टैक्स सिस्टम में 5 लाख और 15 लाख रुपये के बीच की आय के लिए चार नए कर स्लैब पेश किए हैं, जिन पर 5 से 25 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा। अब ये करदाताओं को देखना है कि वे किस तरह से टैक्स छूट ले सकते हैं। नये सिस्टम के तहत आपको जिन छूटों को छोड़ना पड़ेगा उनमें सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले क्लेम खत्म होना शामिल है, जिसमें ईएलएसएस, एनपीएस, पीपीएफ आदि में निवेश आता है। इसके अलावा सेक्शन 80डी के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर क्लेम करके मिलने वाली छूट, सेक्शन 80डीडी और 80डीडीबी के तहत विक्लांगता पर टैक्स छूट और एजुकेशन लोन पर ब्याज भुगतान पर जैसी टैक्स छूट भी नहीं मिलेगी।
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