आज के समय में पर्सनल लोन लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। वजह साफ है यह लोन जल्दी मिल जाता है और इसके लिए किसी संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। अचानक मेडिकल खर्च, शादी, बच्चों की पढ़ाई या यात्रा जैसे कामों के लिए लोग पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। हालांकि, इसकी ब्याज दरें दूसरे लोन की तुलना में ज्यादा होती हैं, फिर भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

लेकिन पर्सनल लोन लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी हर महीने की EMI किन बातों पर तय होती है। अगर आप इन बातों को नजरअंदाज करते हैं, तो EMI आपके बजट पर भारी पड़ सकती है।
क्रेडिट स्कोर निभाता है अहम भूमिका
पर्सनल लोन की मंजूरी में सबसे पहला रोल क्रेडिट स्कोर का होता है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बैंक आपको कम ब्याज दर पर लोन दे सकता है। वहीं कम स्कोर होने पर या तो लोन मिलने में दिक्कत आती है या ब्याज दर ज्यादा लगाई जाती है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांच लें और गलती होने पर उसे ठीक करवाएं।
लोन की अवधि से बदलती है EMI
लोन कितने साल के लिए लिया गया है, यह EMI को सीधे प्रभावित करता है। लंबी अवधि चुनने पर EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। वहीं कम समय के लिए लोन लेने पर EMI ज्यादा होती है, लेकिन ब्याज कम लगता है। अपनी आमदनी और खर्च को देखकर सही अवधि चुनना जरूरी है।
ब्याज दर का सीधा असर
ब्याज दर जितनी कम होगी, EMI उतनी कम होगी। कई बार बैंक अच्छे ग्राहकों को कम ब्याज दर का ऑफर देते हैं। सिर्फ आधा फीसदी ब्याज कम होने से भी EMI में अच्छा फर्क आ सकता है। इसलिए अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना जरूर करें।
प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज
पर्सनल लोन लेते समय प्रोसेसिंग फीस, GST और अन्य चार्ज भी लगते हैं। ये सीधे EMI को नहीं बढ़ाते, लेकिन कुल लोन लागत बढ़ा देते हैं। इसलिए लोन ऑफर लेते समय सभी छिपे चार्ज जरूर समझें।
लोन की राशि जितनी ज्यादा, EMI उतनी भारी
आप जितनी ज्यादा रकम उधार लेंगे, EMI भी उतनी ही बढ़ेगी। इसलिए जरूरत से ज्यादा लोन लेने से बचें। सिर्फ उतनी ही राशि लें, जितनी वाकई जरूरी हो।
समझदारी से लें फैसला
अगर आप चाहते हैं कि पर्सनल लोन आपकी आर्थिक परेशानी न बढ़ाए, तो लोन लेने से पहले EMI कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें और सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें। सही योजना बनाकर लिया गया पर्सनल लोन आपके काम को आसान बना सकता है।
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