नयी दिल्ली। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) निवेशकों के लिए एक बहुत बुरी खबर है। पीपीएफ निवेशकों के साथ कुछ ऐसा हो सकता है जो पिछले 46 सालों में नहीं हुआ। दरअसल पीपीएफ की ब्याज दरों को 7 फीसदी से कम किया जा सकता है, जो पिछले 46 सालों में सबसे कम होगी। अगले हफ्ते छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज की दरों की समीक्षा की जाएगी। बॉन्ड यील्ड में लगातार गिरावट का मतलब है कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती संभाव है। अगर उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती की जाती है तो 1974 के बाद यह पहली बार होगा कि पीपीएफ दर 7 फीसदी से नीचे आ जाए। जानकारी के लिए बता दें कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर समान मैच्योरिटी के सरकारी बॉन्ड यील्ड से लिंक होती है। पीपीएफ की ब्याज दर 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड से लिंक है।
हर तिमाही में होती है ब्याज दरों की समीक्षा
पीपीएफ सहित छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें रोज-रोज आधार पर नहीं बदलती, बल्कि पिछली तिमाही में औसत बॉन्ड यील्ड के आधार पर प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में इनकी समीक्षा की जाती है। चालू अप्रैल-जून तिमाही के लिए ब्याज दर मार्च के अंत में 7.1 फीसदी पर तय की गई थी जब जनवरी-मार्च तिमाही में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 6.42 फीसदी थी। अप्रैल में ब्याज दरों को काफी अधिक कटौती की गई थी। पीपीएफ की ब्याज दर 80 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के साथ 7.9 फीसदी से 7.1 फीसदी कर दी गई थी।
इन योजनाओं की भी घटीं दरें
अप्रैल में वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की दर 8.6 फीसदी से घटा कर 7.4 फीसदी कर दी गई थी। बेहद लोकप्रिय एनएससी (नेशनल पेंशन स्कीम) की रेट भी 7.9 फीसदी से 6.8 फीसदी तक घटा दी गई थी, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना की दर को 8.4 फीसदी से 7.6 फीसदी तक कम किया गया। इसके अलावा किसान विकास पत्र पर ब्याज दर घटा कर 6.9 फीसदी कर दी गई थी, जिससे इसकी मैच्योरिटी अवधि 11 महीने से बढ़ कर 124 महीने हो गई। 1 अप्रैल के बाद से 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड अब तक औसतन 6.07 फीसदी रही और इस समय 5.85 फीसदी है, जिसका साफ मतलब है कि छोटी बचत योजनाओं के लिए दर में कटौती बहुत संभव है।
क्या करें निवेशक
जानकार कहते हैं कि इससे पहले दरों में कटौती हो निवेशकों को उच्च दरों पर ही इन योजनाओं निवेश करना चाहिए। असल में दरों में कटौती से पहले एनएससी और किसान विकास पत्र में निवेश आपको मैच्योरिटी तक अनुबंधित ब्याज ही देंगे। यहां तक कि सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में भी यही रेट बरकरार रहेगी। लेकिन पीपीएफ और सुकन्या योजनाओं में निवेश प्रभावित होगा। छोटी बचत योजनाओं की दरों में कटौती बैंकों की जमा दरों में गिरावट से मेल खाती है। छोटी अवधि के लिए जमा दरें अब बचत खातों के करीब या उससे भी कम रेट ऑफर कर रही हैं। एसबीआई सात दिनों और 45 दिनों के बीच जमा पर 2.9 फीसदी रेट प्रदान करता है, जो बचत बैंक खातों पर दिए जा रहे 2.7 फीसदी से थोड़ा बेहतर है। कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक के लिए छोटी अवधि की एफडी दरें बचत दरों से कम हैं।
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