अमेज़न की 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' सेल की अर्ली डील्स 25 सितंबर की आधी रात (12:00 AM IST) से लाइव हो चुकी हैं। हालांकि मुख्य सेल 8 अक्टूबर से शुरू होगी, लेकिन तगड़ी बचत का मौका अभी से मिल रहा है। अमेज़न ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कार्ड्स (ईएमआई ट्रांसैक्शन सहित) पर 10% इंस्टेंट डिस्काउंट की पुष्टि की है। इसके अलावा, प्राइम मेंबर्स को 10% तक की एक्स्ट्रा छूट भी मिलेगी। स्मार्टफोन्स, टीवी और बड़े होम अप्लायंसेस पर भारी डिस्काउंट देखने को मिल रहा है।
ऑर्डर प्लेस करने से पहले 'Bank Offers' वाले सेक्शन में जाकर डिस्काउंट जरूर चेक कर लें। एसबीआई के नियमों के मुताबिक, डिस्काउंट पाने के लिए कम से कम ₹4,990 की खरीदारी जरूरी है, साथ ही कैटेगरी के हिसाब से शर्तें अलग हो सकती हैं। ध्यान दें कि कॉर्पोरेट, फ्लिपकार्ट SBI, पेटीएम SBI और कैशबैक SBI कार्ड्स पर यह ऑफर लागू नहीं है। इसके अलावा UPI से पे किए गए RuPay क्रेडिट कार्ड पर भी छूट नहीं मिलेगी। डिस्काउंट कार्ड के हर एक ट्रांसैक्शन पर मिलेगा, न कि पूरे कार्ट की टोटल वैल्यू पर।

10% एसबीआई कार्ड डिस्काउंट: मैक्सिमम लिमिट, ऑफर्स की क्लबिंग और रिटर्न नियम
मैक्सिमम डिस्काउंट लिमिट और ब्रांड की शर्तें प्रोडक्ट कैटेगरी और ईएमआई की अवधि के हिसाब से अलग हो सकती हैं, इसलिए पेमेंट स्क्रीन पर इन्हें अच्छे से जांच लें। अमेज़न और एसबीआई हर ऑर्डर और कार्ड पर मिलने वाली अधिकतम छूट की जानकारी चेकआउट के समय दिखाते हैं। अगर आप कोई आइटम कैंसिल या रिटर्न करते हैं, तो इंस्टेंट डिस्काउंट एडजस्ट हो जाएगा। यदि कैंसिल करने के बाद ऑर्डर वैल्यू न्यूनतम सीमा से कम हो जाती है, तो ऑफर रद्द हो सकता है। भविष्य में किसी परेशानी से बचने के लिए पेमेंट स्क्रीन का स्क्रीनशॉट जरूर रख लें।
प्राइम बोनस और शॉपिंग कार्ट की चेकलिस्ट
प्राइम मेंबर्स के लिए स्पेशल कूपन्स और बोनस का फायदा एक्सचेंज ऑफर और एसबीआई डिस्काउंट के साथ भी उठाया जा सकता है, बशर्ते कूपन या एक्सचेंज के बाद भी न्यूनतम खरीदारी की शर्त पूरी हो रही हो। याद रखें, इंस्टेंट डिस्काउंट केवल उसी रकम पर मिलेगा जो वास्तव में एसबीआई कार्ड से काटी गई है। अगर आप थोड़ा-बहुत पेमेंट अमेज़न वॉलेट से करते हैं, तो डिस्काउंट पाने वाली रकम कम हो जाएगी। अलग-अलग डिलीवर होने वाले प्रोडक्ट्स (स्प्लिट शिपमेंट) को अलग ट्रांसैक्शन माना जाएगा, जिससे डिस्काउंट की लिमिट पर असर पड़ सकता है। इसलिए पेमेंट करने से पहले हर इनवॉइस प्रीव्यू ध्यान से देख लें।
EMI का गणित: नो-कॉस्ट बनाम स्टैंडर्ड ईएमआई - किसका क्या है हिसाब?
नो-कॉस्ट ईएमआई में बैंक का ब्याज चुकाने के लिए आपको शुरुआत में ही उतना डिस्काउंट दे दिया जाता है, लेकिन ध्यान रखें कि बैंक प्रोसेसिंग फीस और जीएसटी वसूल सकते हैं। इसके अलावा, समय से पहले ईएमआई बंद (फोरक्लोज़) कराने पर भी चार्ज लग सकता है। दूसरी ओर, स्टैंडर्ड ईएमआई में रिड्यूसिंग बैलेंस पर ब्याज जुड़ता है, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है। ब्याज का बोझ कम रखने के लिए कम अवधि की ईएमआई चुनें; 6 से 9 महीने का विकल्प ज्यादातर खरीदारों के लिए बेहतर रहता है। पेमेंट स्क्रीन पर दिख रही ब्याज दरें, फीस और अवधि की जांच करना न भूलें।
| स्थिति (सिनेरियो) | मासिक EMI | अनुमानित कुल भुगतान |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड EMI: ₹50,000 पर 12 महीने के लिए 15% ब्याज (प्रोसेसिंग फीस सहित) | ₹4,513 | ₹54,272 |
| 12 महीने की EMI: 10% पूरा एसबीआई इंस्टेंट डिस्काउंट लागू होने के बाद (बिना किसी कैप के) | ₹4,062 | ₹48,856 |


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