Advance Tax Due: इनकम टैक्स से जुड़े मामलों में आज का दिन कई टैक्सपेयर्स के लिए अहम है। जिन लोगों की सालाना टैक्स देनदारी 10,000 रुपए से ज्यादा बनती है, उनके लिए एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की आज अंतिम तारीख है। समय पर टैक्स न भरने पर बाद में ब्याज का बोझ बढ़ सकता है, इसलिए सही समय पर अपनी स्थिति जांच लेना जरूरी है।

एडवांस टैक्स क्या होता है
एडवांस टैक्स का मतलब है कि टैक्स साल के आखिर में एक साथ न देकर, पहले से तय तारीखों पर किस्तों में जमा किया जाए। सरकार यह चाहती है कि जिन लोगों की आय ज्यादा है, वे टैक्स का भुगतान पूरे साल में धीरे-धीरे करें। इससे टैक्सपेयर्स पर अचानक बड़ा बोझ नहीं पड़ता।
सैलरी वालों को क्यों रहना चाहिए सतर्क
अधिकतर सैलरी पाने वाले लोग मान लेते हैं कि उनकी सैलरी से TDS कट रहा है, इसलिए उन्हें एडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपकी सैलरी के अलावा कोई और इनकम है, जैसे बैंक एफडी का ब्याज, किराये से कमाई, शेयर या म्यूचुअल फंड से फायदा, फ्रीलांस काम या कोई साइड इनकम, तो सिर्फ TDS काफी नहीं होता। ऐसी स्थिति में एडवांस टैक्स बन सकता है।
एडवांस टैक्स की चार तय तारीखें
एडवांस टैक्स पूरे वित्त वर्ष में चार हिस्सों में जमा किया जाता है।
पहली किस्त: 15 जून
दूसरी किस्त: 15 सितंबर
तीसरी किस्त: 15 दिसंबर
अंतिम किस्त: 15 मार्च
आज 15 दिसंबर को तीसरी किस्त जमा करनी होती है, जिसमें तय हिस्से तक टैक्स भरना जरूरी है।
कब देना जरूरी होता है एडवांस टैक्स
अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी से TDS घटाने के बाद भी 10,000 रुपए से ज्यादा टैक्स बचता है, तो आपको एडवांस टैक्स देना जरूरी है। इसे नेट टैक्स लायबिलिटी कहा जाता है। तय समय पर टैक्स न भरने पर हर महीने ब्याज लगाया जाता है, जिससे कुल रकम बढ़ जाती है।
किन लोगों को एडवांस टैक्स नहीं देना पड़ता
कुछ टैक्सपेयर्स को इस नियम से छूट दी गई है।
60 साल या उससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजन, जिनकी कोई बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है।
ऐसे सैलरी कर्मचारी जिनका पूरा टैक्स TDS के जरिए कवर हो जाता है।
जो लोग प्रेज़म्पटिव टैक्स स्कीम चुनते हैं, उन्हें साल में सिर्फ एक बार टैक्स देना होता है।
कैसे देखें आपकी टैक्स स्थिति
सबसे पहले अपनी पूरे साल की अनुमानित इनकम जोड़ें। फिर टैक्स स्लैब के अनुसार कुल टैक्स निकालें। अब Form 26AS या AIS से TDS की जानकारी देखें और उसे घटाएं। अगर बची हुई रकम 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स देना जरूरी है।
देरी क्यों पड़ सकती है भारी
एडवांस टैक्स समय पर न देने से ब्याज के साथ-साथ फाइनेंशियल प्लानिंग भी बिगड़ सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि आखिरी तारीख से पहले अपनी इनकम और टैक्स का सही आकलन करके भुगतान कर दिया जाए। इससे न सिर्फ अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है, बल्कि टैक्स से जुड़ी परेशानी भी कम होती है।
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