आज यानी 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है। अगर TDS या TCS कटने के बाद आपकी अनुमानित टैक्स देनदारी ₹10,000 या उससे ज्यादा बनती है, तो अपना बकाया तुरंत चेक कर लें। आज तक आपको अपनी कुल सालाना टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा (जून की पहली किस्त मिलाकर) जमा कर देना चाहिए। अगर पेमेंट कम रहा या देरी हुई, तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि आप महज कुछ ही मिनटों में इसे ऑनलाइन भर सकते हैं।
किन्हें आज एडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं है? ऐसे रेजिडेंट सीनियर सिटिजन्स को इसमें छूट मिली हुई है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई कमाई नहीं होती। इसके अलावा, सेक्शन 44AD या सेक्शन 44ADA के तहत प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम चुनने वाले छोटे कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को भी आज पेमेंट नहीं करना है; वे अपना पूरा एडवांस टैक्स 15 मार्च तक एक ही किस्त में दे सकते हैं। इनके अलावा बाकी सभी टैक्सपेयर्स को तिमाही शेड्यूल के हिसाब से पेमेंट करना होता है।

एडवांस टैक्स का 45% नियम: आसान कैलकुलेटर और चेकलिस्ट
पेनल्टी और ब्याज से बचने के लिए 45% वाला नियम ज़रूर समझ लें। मान लीजिए, TDS कटने के बाद आपका कुल अनुमानित टैक्स ₹1,00,000 बनता है। आपने जून की पहली किस्त में ₹15,000 चुका दिए थे। 15 सितंबर तक आपका कुल टारगेट 45% यानी ₹45,000 बनता है। इसका मतलब है कि आपको अभी ₹30,000 की दूसरी किस्त भरनी होगी। पेमेंट करने से पहले Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) से अपने TDS, ब्याज और पुराने चालान का मिलान कर लें, और फिर अपना टैक्स एस्टीमेट अपडेट करें।
e‑Pay Tax के ज़रिए 3 आसान स्टेप्स में ऐसे भरें एडवांस टैक्स
स्टेप 1: इनकम टैक्स के e‑Filing पोर्टल पर जाकर e‑Pay Tax ऑप्शन खोलें। स्टेप 2: चालान फॉर्म जनरेट करें, 'Income Tax' चुनें, सही Assessment Year सिलेक्ट करें और फिर Advance Tax (Minor Head 100) का विकल्प चुनें। स्टेप 3: UPI, नेटबैंकिंग, कार्ड, NEFT या RTGS के ज़रिए पेमेंट करें और चालान की रसीद डाउनलोड कर लें। प्रक्रिया शुरू होने पर पहले चालान रेफरेंस नंबर (Challan Reference Number) जनरेट होता है, और पेमेंट पूरा होने के बाद चालान आइडेंटिफिकेशन नंबर (CIN) मिल जाता है।
एडवांस टैक्स पर लगने वाला ब्याज बनाम FD की ब्याज दरें
एडवांस टैक्स चुकाने में देरी या कम पेमेंट करने पर हर महीने 1% का ब्याज लगता है, यानी सालाना सीधा 12% का नुकसान। यह दर आमतौर पर बैंकों द्वारा 1 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज से काफी ज्यादा है। ऐसे में अगर आप टैक्स पेमेंट टालकर पैसे FD में रखने की सोच रहे हैं, तो वित्तीय गणित के हिसाब से समय पर टैक्स भर देना ही समझदारी है।
| विवरण | दर | यह क्यों अहम है |
|---|---|---|
| सेक्शन 234B/234C के तहत पेनल्टी ब्याज | 1% प्रति माह (~12% सालाना) | कम भुगतान और देरी होने पर लागू होता है |
| सामान्य 1‑साल की बैंक FD | 6.0–6.6% सालाना | FD पर मिलने वाला ब्याज पेनल्टी दर से काफी कम है |
आखिरी समय के लिए ज़रूरी टिप: तुरंत कन्फर्मेशन के लिए UPI, नेटबैंकिंग या पेमेंट गेटवे का ही इस्तेमाल करें। NEFT या RTGS में बैंक की टाइमिंग और चालान 'वैलिड टिल' की सीमाएं आड़े आ सकती हैं, इसलिए बिल्कुल आखिरी वक्त में इनसे बचने की कोशिश करें। भुगतान करने के बाद, कुछ दिनों में यह जांच लें कि CIN आपके Form 26AS या AIS में रिफ्लेक्ट हो रहा है या नहीं, और अपनी पेमेंट रसीद को सुरक्षित सेव कर लें।


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