Aadhaar Card Rules Update: उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य में आधार कार्ड को जन्मतिथि साबित करने के दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सभी विभागों को आदेश भेजकर साफ कर दिया गया है कि किसी भी सरकारी काम, आवेदन या जांच के समय आधार कार्ड को जन्मतिथि का आधिकारिक सबूत नहीं माना जाए।

UIDAI की रिपोर्ट के बाद बदल गया नियम
यह फैसला उस रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें UIDAI ने बताया था कि आधार में दर्ज जन्मतिथि कई बार अनुमानित या अपूर्ण जानकारी के आधार पर भर दी जाती है। इसी वजह से इसे पूरी तरह सटीक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता। कई मामलों में जन्मतिथि बदलने की कोशिश भी होती रही है, जिससे गड़बड़ी बढ़ती है। सरकार ने कहा कि ऐसी स्थिति में जन्मतिथि के लिए अधिक भरोसेमंद दस्तावेजों का इस्तेमाल जरूरी है।
अब कौन-से दस्तावेज जन्मतिथि के लिए मान्य होंगे?
1. जन्म प्रमाणपत्र
सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जन्म प्रमाणपत्र होगा। नगर निगम, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत या रजिस्ट्रार ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स द्वारा जारी यह सर्टिफिकेट जन्म के असली रिकॉर्ड पर आधारित होता है।
2. लेट रजिस्ट्रेशन की सुविधा
अगर किसी के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, तो वह अपने स्थानीय निकाय में जाकर लेट रजिस्ट्रेशन करा सकता है। इस दौरान कुछ दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, जैसे अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप, टीकाकरण कार्ड,माता-पिता का हलफनामा, राशन कार्ड देरी के हिसाब से फीस भी लग सकती है।
स्कूल के दस्तावेज भी काम आएंगे
शहरों और कस्बों में पढ़े-लिखे लोगों के लिए हाई स्कूल मार्कशीट, इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट सबसे आसान विकल्प हैं। इन कागजों में दर्ज जन्मतिथि आम तौर पर एडमिशन समय जमा की गई जानकारी से मेल खाती है, इसलिए इन पर भरोसा किया जाता है।
पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेज
अगर पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस पहले से मान्य जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर बना है, तो कई विभाग इन्हें भी मान सकते हैं।
लोगों को क्या करना चाहिए?
अब यूपी के लोगों को अपना जन्मतिथि प्रमाणपत्र तैयार रखना जरूरी हो गया है। जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें जल्द से जल्द नई गाइडलाइन के अनुसार प्रमाणपत्र बनवाना चाहिए, ताकि सरकारी कामों में कोई दिक्कत न आए।


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