आज आधार कार्ड हर व्यक्ति की पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता, गैस सब्सिडी, पेंशन, स्कॉलरशिप या मोबाइल सिम लगभग हर काम में आधार नंबर मांगा जाता है। लेकिन अगर किसी वजह से आपका आधार निष्क्रिय (डिएक्टिवेट) हो जाए, तो कई जरूरी सर्विसें रुक सकती हैं। हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि एक बार आधार बन गया तो हमेशा चालू रहेगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है।

किन कारणों से बढ़ता है खतरा?
दोहरा रजिस्ट्रेशन
कई बार लोग जानकारी अपडेट कराने या कार्ड खो जाने पर दोबारा नया आधार बनवाने की कोशिश कर देते हैं। सिस्टम में अगर एक ही व्यक्ति के नाम पर दो रिकॉर्ड मिलते हैं, तो जांच के बाद एक नंबर बंद किया जा सकता है। नियम साफ है हर व्यक्ति के लिए केवल एक ही वैध आधार नंबर मान्य है।
बायोमेट्रिक में दिक्कत
आधार में फिंगरप्रिंट और आंखों की स्कैन दर्ज होती है। समय के साथ इनमें बदलाव आ सकता है। अगर बैंक या किसी अन्य सर्विस के दौरान बार-बार बायोमेट्रिक मैच नहीं होता, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है। बच्चों को 5 और 15 साल की उम्र में बायोमेट्रिक अपडेट कराना जरूरी माना जाता है।
गलत या अधूरी जानकारी
नाम, जन्मतिथि या पते में गलती होने पर भी दिक्कत आ सकती है। अगर दस्तावेज सही न हों या जानकारी मेल न खाए, तो आधार की वैधता पर असर पड़ सकता है। इसलिए समय-समय पर अपनी डिटेल जांचना समझदारी है।
घर बैठे ऐसे करें जांच
आप आसानी से ऑनलाइन पता लगा सकते हैं कि आपका आधार एक्टिव है या नहीं। आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और OTP की मदद से लॉग इन करें। वहां स्टेटस और ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने का विकल्प मिलता है। अगर लगातार असफल प्रयास दिख रहे हों, तो तुरंत अपडेट की प्रक्रिया शुरू करें।
मृत परिजन का आधार भी कर सकते हैं बंद
अब परिवार के सदस्य ऑनलाइन आवेदन देकर दिवंगत रिश्तेदार का आधार डिएक्टिवेट करवा सकते हैं। इसके लिए पोर्टल पर लॉग इन कर जरूरी जानकारी भरनी होती है और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होता है। जांच पूरी होने के बाद निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
छोटी-सी लापरवाही आगे बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए आधार की जानकारी सही रखें और समय-समय पर स्टेटस जरूर जांचते रहें।


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