8th Pay Commission Latest News: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए कई अहम मांगें सामने आई हैं। कर्नाटक पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस पेंशनर्स एसोसिएशन (KPTPA) ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर करीब ₹69,000 करने और न्यूनतम पेंशन को ₹9,000 से बढ़ाकर ₹34,470 करने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। इसके अलावा एसोसिएशन ने आयक्रॉयड फॉर्मूले को अपडेट करने, सालाना इंक्रीमेंट की दर बढ़ाने और परिवार की यूनिट की गणना में बदलाव करने का सुझाव दिया है। हालांकि, ये सभी मांगें हैं और इन्हें अभी केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली है।

₹69,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन
सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है। KPTPA ने आठवें वेतन आयोग के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है। फिटमेंट फैक्टर एक गुणक है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित बेसिक पे में बदलने के कैलकुलेशन में किया जाता है।
अगर ₹18,000 की मौजूदा बेसिक सैलरी पर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाए, तो रकम ₹68,994 होगी। इसे राउंड ऑफ करने पर करीब ₹69,000 मिलते हैं। इसी आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। NC-JCM के स्टाफ साइड और AIDEF जैसे संगठनों की ओर से भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग सामने आई है। वहीं, BPMS ने चार के फिटमेंट फैक्टर और ₹72,000 न्यूनतम बेसिक पे का प्रस्ताव रखा है।
मिनिमम पेंशन ₹34,470 करने की मांग
KPTPA ने न्यूनतम पेंशन को मौजूदा ₹9,000 से बढ़ाकर करीब ₹34,470 करने की मांग भी की है। इसके लिए भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर का आधार लिया गया है। हालांकि, ₹9,000 को 3.833 से गुणा करने पर ₹34,497 की रकम आती है। इसलिए प्रस्ताव में बताई गई ₹34,470 की राशि और सीधे गणित से निकलने वाली रकम में थोड़ा अंतर है।
फिलहाल यह पेंशन की प्रस्तावित राशि है। आठवें वेतन आयोग और केंद्र सरकार की ओर से इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
आयक्रॉयड फॉर्मूले में बदलाव क्यों चाहती है एसोसिएशन?
आयक्रॉयड फॉर्मूला न्यूनतम वेतन तय करने से जुड़ा एक पुराना मानक है। इसका नाम डॉक्टर वालेस आयक्रॉयड के नाम पर पड़ा। 1957 में 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन में इससे जुड़े सिद्धांतों को स्वीकार किया गया था। इसमें परिवार की बुनियादी जरूरतों, भोजन, कपड़े, ईंधन और दूसरे जरूरी खर्चों को ध्यान में रखा जाता है। भोजन के लिए प्रतिदिन 2,700 कैलोरी और कपड़ों के लिए सालाना 72 यार्ड जैसे मानक भी इससे जुड़ी पारंपरिक गणना में शामिल रहे हैं। शिक्षा और मेडिकल जैसी जरूरतों के लिए अतिरिक्त खर्च का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है।
एसोसिएशन का कहना है कि पुराने मानकों को आज की जरूरतों के अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए। अब परिवारों के खर्च में इंटरनेट, मोबाइल, ऑनलाइन सेवाओं, आधुनिक शिक्षा और हेल्थकेयर की भी अहम भूमिका है। इसलिए न्यूनतम वेतन तय करते समय इन खर्चों और महंगाई को बेहतर तरीके से शामिल करने की मांग की गई है।
परिवार की यूनिट 3 से बढ़ाकर 5.6 करने का प्रस्ताव
पारंपरिक गणना में तीन यूनिट वाले परिवार को आधार बनाया जाता है। KPTPA ने इसे बढ़ाकर पांच यूनिट करने और माता-पिता की जरूरतों को भी शामिल करने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित गणना में कर्मचारी, पति या पत्नी और दो बच्चों के लिए एक-एक यूनिट तथा माता-पिता के लिए 0.8-0.8 यूनिट जोड़ने की बात है। इस तरह कुल परिवार इकाई 5.6 हो जाती है।
अगर यूनिट की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाती है, तो संख्या में करीब 66.7% की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि न्यूनतम सैलरी भी अपने आप इतनी बढ़ जाएगी। वास्तविक वेतन निर्धारण में दूसरे खर्चों और संबंधित मानकों का भी आकलन करना होगा।
सालाना इंक्रीमेंट 3% से 6% करने की मांग
एसोसिएशन ने सालाना इंक्रीमेंट की दर को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव भी दिया है। इसके अलावा पे लेवल को मर्ज करने और वेतन संरचना में अन्य बदलावों की मांग की गई है। इंक्रीमेंट की दर में बदलाव से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सालाना बढ़ोतरी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भी अंतिम फैसला होना बाकी है।
8th Pay Commission की रिपोर्ट कब आएगी?
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और इसे सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समयसीमा के आधार पर रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है। अक्टूबर 2026 में बेंगलुरु में KPTPA सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से आयोग की मुलाकात की बात सामने आई है। हालांकि, आयोग के सामने मांग रखने का मतलब उसकी मंजूरी नहीं है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए जरूरी Disclaimer: ₹69,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी, ₹34,470 न्यूनतम पेंशन और 3.833 फिटमेंट फैक्टर अभी प्रस्ताव हैं। अंतिम राशि और लागू होने की तारीख आयोग की सिफारिशों तथा केंद्र सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।


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