Savings Account: देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। संसद में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बताया कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते मौजूद हैं जिनमें ग्राहकों को न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती। अगर खाते में पैसा नहीं भी है तो भी इन पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाता।

सरकार के मुताबिक भारत में करीब 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) सक्रिय हैं। इन खातों को खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो कम आय वाले हैं या पहले बैंकिंग सेवाओं से जुड़े नहीं थे। इन खातों में Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana के तहत खोले गए लाखों खाते भी शामिल हैं।
जीरो बैलेंस पर भी मिलती हैं बैंकिंग सुविधाएं
बीएसबीडीए खातों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जीरो बैलेंस अकाउंट के रूप में चलाया जा सकता है। यानी ग्राहक को खाते में किसी निश्चित रकम को बनाए रखना जरूरी नहीं है।
इन खातों में ग्राहक पैसे जमा कर सकते हैं, जरूरत पड़ने पर पैसे निकाल सकते हैं और एटीएम जैसी सुविधाओं का उपयोग भी कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के बैंकिंग सेवाएं मिल सकें।
वित्तीय समावेशन को मिल रहा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि ऐसे खातों की वजह से देश में वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को इससे काफी फायदा हुआ है।
जब लोगों के पास बैंक खाता होता है तो सरकारी योजनाओं की राशि सीधे उनके खाते में भेजना आसान हो जाता है। इससे पारदर्शिता भी बढ़ती है और लोगों को पैसा समय पर मिल पाता है।
सामान्य खातों के नियम अलग
हालांकि सभी प्रकार के बैंक खातों में यह सुविधा नहीं होती। सामान्य बचत खाते और चालू खाते के लिए कई बैंकों में न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी होता है। अगर ग्राहक यह राशि बनाए नहीं रखते हैं तो बैंक अपने नियमों के अनुसार शुल्क ले सकते हैं।
इन मामलों में दिशा-निर्देश Reserve Bank of India द्वारा तय किए जाते हैं, ताकि ग्राहकों के साथ किसी तरह की अनियमितता न हो।
कई बैंकों ने भी दी राहत
ग्राहकों को सुविधा देने के लिए कुछ बड़े बैंकों ने भी न्यूनतम बैलेंस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। देश के प्रमुख बैंक State Bank of India ने साल 2020 में ही बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना समाप्त कर दिया था।
सरकार का कहना है कि ऐसे कदमों से ज्यादा लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़ेंगे और देश में बचत और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।


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