केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिलेगी।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिलेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले लोगों को इस योजना के तहत लाभ नहीं मिलेगा, इसके लिए उन्हें पैसा खर्च करना पड़ेगा। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने कैंसर के उपचार और घुटने बदलवाने जैसी सर्जरी के नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। जिसके तहत मोतियाबिंद के ऑपरेशन को भी इसके दायरे से हटा दिया गया है।

बता दें कि आयुष्मान भारत के तहत 1300 मेडिकल पैकेज की लागत की समीक्षा के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर विनोद के पॉल इस समिति के प्रमुख थे। इस समिति ने मंगलवार को आयुष्मान भारत के नए प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया।
इस कमेटी में हेल्थ और हेल्थ रिसर्च के सेक्रेटरी और आयुष्मान भारत के सीईओ भी शामिल थे। समिति के सामने सबसे बड़ा काम मेडिकल पैकेज की समीक्षा का था। इससे यह तय होता है कि केंद्र सरकार आयुष्मान भारत के तहत इलाज के लिए अस्पतालों को कितना पैसा देगी।
आपको बता दें कि आयुष्मान भारत स्कीम पिछले साल सितंबर में लॉन्च हुआ था। तब से अस्पताल और डॉक्टर पैकेज के तहत सरकार की ओर से मिलने वाली राशि की समीक्षा की मांग कर रहे थे। कमेटी ने 200 पैकेज के रेट बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने 63 पैकेज के खर्च में कमी की है।
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिर्पोट के अनुसार इस मामले से जुड़ी एक अधिकारी ने बताया कि पहले पैकेज में कई खामियां थीं। जैसे लेफ्ट ब्रेस्ट की सर्जरी और राईट ब्रेस्ट की सर्जरी की राशि में 2000 रुपये का फर्क था। कार्डियो-थ्योरेसिक सर्जरी के तहत होने वाली सर्जरी जनरल सर्जरी पैकेज के मुकाबले काफी सूजन थी। इस तरह की खामियों को अब दूर कर दिया गया है।
अधिकारी के अनुसार मोतियाबिंद के ऑपरेशन को स्कीम के दायरे से हटाया जा रहा है। इस कैटेगरी के तहत हम फ्रॉड पर रोक लगाने में सक्षम नहीं हैं।


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