यदि आप भी जीवन बीमा पॉलिसी लेकर रखे हैं तो बता दें कि जल्द ही कंपनी पॉलिसी को लेकर कई बदलाव करने वाली है। ये बदलाव आपके लिए लाभकारी होंगे या घाटे वाले यह तो आपको लेख पढ़कर ही पता चलेगा।
यदि आप भी जीवन बीमा पॉलिसी लेकर रखे हैं तो बता दें कि जल्द ही कंपनी पॉलिसी को लेकर कई बदलाव करने वाली है। ये बदलाव आपके लिए लाभकारी होंगे या घाटे वाले यह तो आपको लेख पढ़कर ही पता चलेगा। आपको बता दें कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एण्ड डेवलपमेंट अथॉरिटटी ऑफ इंडिया ने हाल ही में टर्म, एंडोमेंट, यूलिप और पेंशन प्लान से जुड़े नियम जारी किए थे। तो आइए जानते हैं कि कौन-कौन से बदलाव की संभावना है।
पेंशन प्लान
बता दें कि पेंशन प्लान के तहत मच्योरिटी पर निकासी की अधिकतम सीमा को एक तिहाई से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। फिलहाल यह नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के बराबर नहीं होगा। एनपीएस में मच्योरिटी पर 60 प्रतिशत निकासी की इजाजत है और उस पर टैक्स नहीं चुकाना होता है। पेंशन योजना में 60 प्रतिशत निकासी की इजाजत दी गई है, लेकिन इसका एक तिहाई हिस्सा ही कर मुक्त होगा।
रिर्पोट के अनुसार कॉरपस के एक तिहाई तक विड्रॉल्ड टैक्स फ्री होगा, लेकिन इससे ऊपर की रकम पर टैक्स देना होगा। तय समय से पहले निकासी से जुड़े नियम भी बदल गए हैं। पांच साल का लॉक इन खत्म होने पर पॉलिसीहोल्डर फंड वेल्यू के 25% के बराबर निकासी कर सकते हैं, लेकिन ऐसी पॉलिसी टेनर में केवल तीन बार की जा सकती है। ऐसे विड्रॉल्स की इजाजत तब होगी, जब हायर एजुकेशन, बच्चों की शादी, मकान खरीदने या मकान बनाने और अपने या जीवनसाथी की गंभीर बीमारी के इलाज की जरूरत हो।
इक्विटी में निवेश की आजादी
सबसे अधिक असर डालने योग्य परिवर्तन के साथ यूनिट लिंक्ड पेंशन से बढ़ाव से जुड़ा है। इस सेगमेंट की चमक यह शर्त लगाने से कम हुई थी कि डेफर्ड पेंशन प्लान जारी करने वाली बीमा कंपनी से ही ऐन्युइटी खरीद होगी। अभी बीमा कंपनियों को वेस्टिंग डेट (इस तारीख से ऐन्युइटी होस्टर को पॉलिसी बेनिफिट्स मिलने लगते हैं) पर एक यकीन देनी होता है जिसके चलते उन्हें डेट में ज्यादा निवेश करना पड़ता है और वे ऊंचा इंतजार कर जेनरेट नहीं कर पाती हैं।
ऐन्युटी खरीदने में ज्यादा विकल्प
निवेश योग्य राशि के 50 प्रतिशत तक ऐन्युइटी खरीदने के लिए बाजार खोलने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अभी पॉलिसीहोल्डर के पास मच्योरिटी पर उसी बीमा कंपनी से ऐन्युइटी खरीदनी पड़ती है, जो पॉलिसी जारी करती है। कॉम्पिटीशन नहीं होने से पॉलिसीहोल्डर के हितों पर असर पड़ता है क्योंकि वे ऊंचे ऐन्युइटी रेट्स के लिए दूसरी जगहों पर नहीं कर सकते। ऐन्युइटी रेगुलर तौर पर मिलने वाली गारंटीड पेंशन इनकम होती है। यह इन्वेस्टिंग डेट से लेकर पॉलिसीहोल्डर का निधन होने तक उसे मिलता है।
सरेंडर वैल्यू पाने के लिए छोटी अवधि
बता दें कि पॉलिसी की गारंटीड सरेंडर वैल्यू पाने के लिए तीन साल इंतजार करने की जरूरत नहीं रह गई है। सरेंडर वैल्यू वह राशि होती है, जो तय समय से पहले नीति से एग्जिट करने पर आपको मिलती है। प्रीमियम चुकाने की शर्तें चाहे जो हों, अब कम से कम दो साल तक प्रीमियम किए गए नीति को मिनिमम सर्ंटीड सरेंडर वेल्यू हासिल हो जाएगा। अभी तक 10 साल से ज्यादा की अवधि तक प्रीमियम पेइंग टर्म वाली पॉलिसी में कम से कम तीन साल तक प्रीमियम पेमेंट होने की शर्त है।
प्रीमियम घटाने की सहूलियत
पॉलिसीधारकों को पॉलिसी के पांच साल के बाद प्रीमियम घटाने की सहूलियत भी नए नियमों ने दी है। लॉन्ग टर्म प्रोडक्ट होने के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम सालाना चुकाने होते हैं और उस तारीख के आसपास अगर कोई वित्तीय परेशानी नहीं होती है तो पॉलिसी लैप्स कर सकती है। इसके बजाय आप प्रीमियम को 50 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं और पॉलिसी जारी भी रख सकते हैं।
यूलिप का प्रीमियम
यूलिप में मिनिमम कवर सालाना प्रीमियम के 10 गुने के बजाय सात गुना रह जाएगा। अभी बीमा कंपनियों को 45 साल से कम उम्र वालों को एनुअल प्रीमियम का दस गुना और 45 साल से ऊपरवालों को सात गुना मिनिमम कवर ऑफर करना होता है। प्रोटेक्शन एलिमेंट न चाहने वाले नीति निर्माताओं के मामले में कवर छोटा होगा तो मोर्टलिटी चार्ज भी कम हो जाएगा।
सेक्शन 80 सी और 10 (10 डी) के तहत मैक्सिमम टैक्स बेनिफिट लेने के लिए लाइफ पॉलिसी को ऐनुअल प्रीमियम के दस गुना कवर देना होगा। सात गुने कवर वाली पॉलिसी में 10 (10D) के तहत टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
यूलिप रिवाइव पीरियड
यूलिप रिवाइव करने की चाहत रखने वाले लोगों को दो के बजाय अब तीन साल मिलेंगे। नॉन-लिंक्ड प्लान के मामले में यह अवधि बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। बीमा कंपनियों को पॉलिसीधारकों को पॉलिसी लैप्स होने के तीन महीने के भीतर जानकारी देनी होगी, अगर वे पॉलिसी रिवाइव करना चाहते हैं तो उचित कदम उठा सकते हैं।
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