नई दिल्ली। कॉफी कैफे डे यानी सीसीडी के मालिक वीजी सिद्धार्थ अचानक सोवमार को लापता हो गए थे, जिनका शव आज मिल गया है। वह पिछले कुछ दिनों से कारोबारी दबाव महसूस कर रह थे, जिसके चलते उनके आत्महत्या करने का अनुमान लगाया जा रहा है। मशहूर कॉफी चेन कॉफी कैफे डे यानी सीसीडी एक सफल कंपनी मानी जाती है, जिसे 5 लाख रुपये से शुरू कर वीजी सिद्धार्थ ने अरबों रुपये की कंपनी बना दिया।
लापता होने से पहले लिखा था एक पत्र
वीजी सिद्धार्थ के लापता होने के बाद एक पत्र सामने आया था। इसमें उन्होंने लिखा है कि था कि कई कारणों से वह एक सफल कारोबारी मॉडल नहीं खड़ा कर पाए। दो साल पहले ही अघोषित संपत्ति को लेकर इनकम टैक्स विभाग ने भी उनकी जांच की थी। हालांकि वह कंपनी को सफल चाहे न मानें, लेकिन दुनिया में कॉफी कैफे डे एक सफल कंपनी मानी गई है।
विरासत से हट कर शुरू किया कारोबार
चिकमंगलुरू में जन्मे वीजी सिद्धार्थ का परिवार कॉफी के कारोबार से जुड़ा हुआ था। उनके पास कॉफी के बागान हैं। इन बागानों में दुनिया की बहुत ही महंगी कॉफी उगाई जाती है। लेकिन वीजी सिद्धार्थ ने परिवार के कारोबार की जगह अपने लिए अलग रास्ता चुना। उन्होंने मंगलुरू यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री लेने के बाद मुंबई का रुख किया। यहां पर उन्होंने जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज काम शुरू किया।
बाद में ऐसे 5 लाख रुपये से की कारोबार शुरुआत
परिवार चाहता था कि वह नौकरी की जगह परिवार के कारोबार से जुड़ें। हालांकि उन्हें पारिवारिक कारोबार पसंद नहीं था। लेकिन वे परिवार की इच्छा पर मुंबई से लौटे और पिता से 5 लाख रुपये बिजनेस शुरू किया। उन्होंने सिवान सिक्युरिटीज के नाम से फाइनेंशियल कंपनी की शुरुआतकी। बाद में इसका नाम वेटूवेल्थ कर दिया। यह कंपनी वेल्थ मैनेजमेंट में जानी मानी कंपनी बनी।
बाद में शुरू किया कॉफी का कारोबार
इस वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी के बाद उन्होंने कर्नाटक में कॉफी का कारोबार शुरू किया। उन्होंने एक पारिवारिक कारोबार को अंतरराष्ट्रीय कारोबार बना दिया। उनकी कॉफी ट्रेडिंग कंपनी अमलगामेटेड बीन कंपनी का कारोबार 2500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
फिर की कॉफी कैफे डे की स्थापना
वीजी सिद्धार्थ ने 1996 में कॉफी कैफे डे यानी सीसीडी की स्थापना की। इस कंपनी के बदौलत वह कॉफी किंग बन गए। सीसीडी के देश में इस वक्त 1750 कैफे हैं। इनमें कइ सारे विदेश में है, जिनमें ऑस्ट्रिया, कराची, दुबई और चेक रिपब्लिक जैसे देश शामिल हैं। हालांकि पिछले 2 साल में कंपनी का कारोबार जिस तेजी से बढ़ा, उतनी ही तेजी से कर्ज भी बढ़ा। यही कर्ज बाद में उनके लिए समस्या बन गया।


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