जरूर कराएं FD, जानें ये 5 फायदे

नई दिल्ली। जो लोग रिस्क नहीं ले सकते हैं, उन्हें सिर्फ फिक्स डिपाजिट (एफडी) पर ही भरोसा करना चाहिए। शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में अगर बाजार अच्छा चलता है तो रिटर्न तो अच्छा मिलता है, लेकिन अगर शेयर बाजार में गिरावट आ जाए तो नुकसान तक हो जाता है। वहीं कंपनियों की एफडी में ब्याज तो ज्यादा मिलता है, लेकिन कई बार कंपनियां दिवालिया तक हो जाती हैं। ऐसे में लोगों का पैसा फंस जाता है। ऐसे में सबसे जरूरी है अपने निवेश की सुरक्षा को ध्यान में रखते पैसा सिर्फ एफडी में लगाना चाहिए। वैसे एफडी में पैसा लगाने पर 5 अन्य फायदे भी मिलते हैं, जिनको हर किसी को जानना चाहिए।

Fixed deposit

जानें एसबीआई एफडी पर कितना दे रहा है ब्याज
स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) 1 करोड़ रुपये से कम की एफडी पर अभी 5 साल से 10 साल तक के लिए 6.25 फीसदी ब्‍याज दे रहा है। वहीं, वरिष्ठ नागरिको को 6.75 फीसदी ब्‍याज दे रहा है। वहीं नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) की बात करें, तो यह एफडी पर ज्यादा ब्‍याज का ऑफर दे रही हैं। जैसे, बजाज फाइनेंस 12 महीने से 60 महीने की अविध के लिए 8 फीसदी से 8.95 फीसदी तक ब्‍याज का ऑफर दे रही है

एफडी के बदले लोन भी लेना संभव

एफडी के बदले लोन भी लेना संभव

अगर आपके पास एफडी है और आपको अचानक पैसों की जरूरत है तो आप इसे बिना खत्म करे, इसके बदले लोन भी ले सकते हैं। आमतौर पर जितने रुपये की एफडी होती है, उसका 90 फीसदी तक लोन के रूप में आसानी से लिया जा सकता है। आमतौर पर इस लोन पर एफडी से 1 फीसदी तक ज्यादा ब्याज लिया जाता है। एसबीआई एफडी पर लोन देने के लिए कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं लेता है और न ही प्रीपेमेंट पेनल्‍टी लगता है।

बीच में भी निकाल सकते हैं एपडी से पैसा

बीच में भी निकाल सकते हैं एपडी से पैसा

एफडी में पैसा जमा करने के बाद निवेशक के पास इसे पहले भी निकालने का मौका होता है। इसीलिए इसे लिक्विड निवेश भी कहा जाता है। अगर कोई आपात स्थिति आ जाए तो एफडी से पैसा तुरंत निकाला जा सकता है। लेकिन ऐसा करने वक्त निवेशक को मामूली सा चार्ज देना होता है। इस वक्त एसबीआई एफडी को पहले तुड़ाने पर 0.50 फीसदी से 1.0 फीसदी तक प्री-मैच्‍योर विद्ड्रॉल चार्ज लेता है। वैसे यह हर बैंक और एनबीएफसी का अलग-अलग होता है।

एफडी पर निश्चित ब्याज मिलता है

एफडी पर निश्चित ब्याज मिलता है

एफडी पर ब्याज दरों के बदलावा का फर्क नहीं पड़ता है। एक बार जिस ब्याज दर पर एफडी में निवेश हो जाता है, फिर वह एफडी पूरा होने तक मिलता रहता है। इस दौरान अगर ब्याज दर कम होती है तो भी तय ब्याज मिलता रहता है। लेकिन अगर इस दौरान बैंक अपनी ब्याज दर को बढ़ा देती है तो निवेशक को इसका फायदा नहीं मिलता है। निवेशक को कितना ब्याज के साथ कितना पैसा वापस मिलेगा, यह उसे पहले की बता दिया जाता है।

एफडी कराने में मिलती है पूर आजादी

एफडी कराने में मिलती है पूर आजादी

लोग जब एफडी कराते हैं तो उन्हें कई सारे विकल्प दिए जाते हैं। इसमें कितने भी रुपये की एफडी कराने कितने भी समय की एफडी कराने की छूट मिलती है। आमतौर पर एफडी 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए कराई जा सकती है। एसबीआई न्‍यूनतम 1000 रुपये तक की एफडी करता है। वहीं एसबीआई में एफडी की अधिकतम राशि को लेकर कोई सीमा नहीं है। वहीं अगर एफडी कराने वाला सीनियर सिटीजन है तो उसे बैंक 0.25 फीसदी ज्यादा ब्‍याज देता है।

एफडी में रिस्क फ्री रिटर्न

एफडी में रिस्क फ्री रिटर्न

एफडी देश में सबसे ज्यादा रिस्क फ्री निवेश आप्शन है। देश में जिस तरह से कंपनियों ने लोगों का मेहनत का पैसा डुबाया है, उसके बाद इसी पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जा सकता है। आज तक देश में किसी भी बैंक की एफडी में किसी का पैसा डूबा नहीं है, जबकि निजी कंपनियों और चिटफंड कंपनियों ने लोगों का काफी पैसा डुबाया है। इसीलिए रिस्क फ्री निवेश करने वाले चाहे जिस आयुवर्ग के हों, उन का एफडी पर ही भरोसा है।

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