आजकल लोगों में लैण्ड (जमीन) के प्रति निवेश (Investment) करने का शौक बढ़ता जा रहा है।
नई दिल्ली: आजकल लोगों में जमीन (Land) के प्रति निवेश (Investment) करने का शौक बढ़ता जा रहा है। जमीन (Land) मे निवेश करके लंबे समय (Long term) के लिए संपत्ति बनाना एक बहुत अच्छा विचार है। इतना ही नहीं आजकल लोग जमीन में निवेश करके अपने बच्चों के लिए संपत्ति (Property) बनाने का एक अच्छा तरीका मानने लगे है। जो कि हर मायने में सही भी है। वहीं कुछ लोग जमीन इस नजरिये से भी खरीदना बेहतर समझते हैं ताकि उन्हें भविष्य में अपने बच्चों की शादी और पढ़ाई के दौरान मदद मिल सके। क्योंकि जमीन (Land) में निवेश करना देखा जाएं तो लाइफ लांग सेविंग (Life Long Saving) होती है। इसके साथ ही एक ऐसी पूंजी होती है जिसे आप कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
इतना ही नहीं देखा गया हैं कि कुछ व्यक्ति जैसे की एनआरआई या वरिष्ठ नागरिक (NRI or senior citizen) जिन्हे फ्लैट खरीदने या फिर किरायदारों को संभालने में परेशानी होती है, वो प्लॉट खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि, इसके अपने फायदे और नुकसान हैं। ये बात भी बिलकुल सच हैं कि जमीन में निवेश (Investment) करने के कुछ लाभ और नुकसान भी है।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले क्या देखें
- जहां संपत्ति (Property) खरीदने जा रहे हैं, वहां के नियम-कानून (Rule of law) के बारे में जानकारी लें। कई राज्यों के कानून अलग होते हैं। हाउसिंग सोसायटियों (Housing societies) के अपने नियम (Rule) होते हैं।
- सोसायटियों के मकानों (Houses of societies) में उनके बाइलॉज की कॉपी जरूर देखनी चाहिए। एनओसी (NOC) लेना चाहिए।
सही प्लॉट चुनें
प्लॉट खरीदने (Buy plot) से पहले एरिया के विकास की संभावनाओं और कानूनी मुद्दों पर जरूर ध्यान दें। जब आप किसी दूरदराज के इलाके में जमीन में निवेश (Investment) करते हैं, तो आप भविष्य पर दांव लगा रहे होते हैं। ऐसे में आपको एरिया के डेवलपमेंट प्लान (Development plan) की जानकारी होनी चाहिए। लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी (Local Development Authority) की वेबसाइट और न्यूजपेपर्स से आप इस बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। ऐसे क्षेत्र का चुनाव करें, जहां भविष्य में मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर (Manufacturing or service sector) के आने की उम्मीद हो।
कानूनी मुद्दा:
इस बात का अवश्य ध्यान दें कि अगर आप किसी डेवलपर (Developer) से प्लॉट (Plot) खरीद रहे हों, तो आपको इसका पता लगाना चाहिए कि उसके पास लाइसेंस और रजिस्टर टाइटल (License and Register Title) है कि नहीं? आपको यह भी देखना चाहिए कि जमीन फ्रीहोल्ड (Land freehold) है या लीजहोल्ड। अगर आप किसी अनअप्रूव्ड कॉलोनी (Unapproved colony) में प्लॉट खरीद रहे हैं, तो पिछले 30 साल में उसकी टाइटल हिस्ट्री (Title history) क्या रही है, यह जरूर देखें।
फिजिकल एस्पेक्ट्स:
इस पर भी करें गौर कि मेन रोड या हाईवे (Main road or highway) से प्लॉट तक पहुंचने का रास्ता आसान होना चाहिए। चूंकि, कई बायर्स वास्तु का ध्यान रखते हैं, ऐसे में ईस्ट (East) या नॉर्थ फेसिंग प्लॉट (North Facing Plot) ही लें। आपके प्लॉट (Plot) के सामने कम से कम 9 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए। अगर आपका प्लॉट किसी बड़े खेत या पार्क के करीब है, तो आपको इसकी ज्यादा कीमत मिल सकती है।
प्लॉट खरीदने के बाद इसका नियमित सीमांकन होना चाहिए और आपकी इसकी बाउंड्री की जानकारी (Boundary information) होनी चाहिए। इसके चारों ओर दीवार खड़ी करना जरूरी होता है। कुछ जगहों पर डेवलपमेंट अथॉरिटी (Development authority) यह शर्त जोड़ देती हैं कि आपको इस अवधि तक प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन (Construction on plot) पूरा कर लेना है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो होल्डिंग पीरियड (Holding Period) घट जाएगा। जमीन खरीदना लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट (Long term investment) है। ऐसे में आपके पास निवेश (Investment) के लिए 5-10 साल की अवधि होनी चाहिए।
ऐसा हो तो समझ जाएं ठगी हो सकती है
1. अगर विक्रेता पूरा का पूरा पैसा नकद मांग (Cash demand) रहा हो।
2. संपत्ति (Property) के मूल दस्तावेज न हों। दस्तावेजों में किए गए साइन में फर्क नजर आए।
3. संपत्ति के दस्तावेज (Property documents) सादे कागज पर हों। सौदे के वक्त विक्रेता मौजूद न हो।
4. संपत्ति गिरवी हो या उस पर कोई मुकदमा चल रहा हो।
5. संपत्ति कर, बिजली का बिल, पानी का बिल जैसी चीजों का भुगतान रुका हो।
6. संपत्ति पर विक्रेता के अलावा किसी और का कब्जा हो।
डॉक्युमेंटेशन का रखें ध्यान
आपको जमीन खरीदने से पहले इन दस्तावेजों को देखना चाहिए।
- अगर आप किसी अथॉरिटी से जमीन खरीद रहे हैं, तो आप इसके टाइटल को लेकर आश्वस्त हो सकते हैं। यह प्लॉट आपको अलॉटमेंट के जरिए बेचा जाएगा और आपको बतौर ओनरशिप एक रजिस्टर्ड सेल डीड मिलेगी।
- वहीं, अगर आप किसी डेवलपर से प्लॉट खरीद रहे हैं, तो कॉलोनी को उस इलाके के टाउन और कंट्री प्लानिंग ऑफिस से मंजूरी मिली होनी चाहिए। डेवलपर के पास कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस होना चाहिए।
- डेवलपर के पास टाउनशिप के लेआउट की मंजूरी भी होनी चाहिए।
- जमीन खरीदते आपके पास अलॉटमेंट लेटर, पजेशन लेटर और रजिस्टर्ड सेल डील ये तीन दस्तावेज होने चाहिए।
- डेवलपर से आप तक आने वाले टाइटल की जांच करें।
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