कई ऑनलाइन (online)और ऑफलाइन रिटेलर्स (Offline retailers) मोबाइल फोन (Mobile phone) , इलेक्ट्रॉनिक सामान (Electronic items) आदि पर 'नो कॉस्ट ईएमआई' (No-cost EMI) या 'जीरो कॉस्ट ईएमआई' (Zero Cost EMI) ऑ
नई दिल्ली: कई ऑनलाइन (online)और ऑफलाइन रिटेलर्स (Offline retailers) मोबाइल फोन (Mobile phone) , इलेक्ट्रॉनिक सामान (Electronic items) आदि पर 'नो कॉस्ट ईएमआई' (No-cost EMI) या 'जीरो कॉस्ट ईएमआई' (Zero Cost EMI) ऑफर करते हैं। यही कारण है कि लोग अक्सर समान मासिक किस्तों (EMI) (ईएमआई) पर उत्पाद खरीदने के लिए सुविधाजनक पाते हैं। ईएमआई (EMI) एक बड़ी राशि का भुगतान करने के बोझ को कम करता है।
नो-कॉस्ट EMI क्या है?
जब आप ईएमआई (EMI) यानी किस्तों पर कोई प्रोडक्ट या सर्विस (Product or Service) लेते हैं तो आपको एक तय अवधि तक समान अमाउंट (Amount) एक तय वक्त पर देना होता है। साथ ही ब्याज भी लगता है। वहीं, नो-कॉस्ट ईएमआई (No-cost EMI) में आपको केवल चीज का दाम ही EMI में चुकाना होता है और कोई ब्याज (Interest) नहीं देना होता है। यानी अगर 18000 की चीज 6 माह तक दी जाने वाली EMI पर खरीदी है तो हर माह केवल 3000 रुपये का भुगतान करना होगा। यानी आपकी जेब से केवल 18000 रुपये ही जाएंगे।
No-cost EMI इस तरह से काम करती
नो-कॉस्ट ईएमआई (No-cost EMI) ग्राहकों (Customers) को लुभाने का एक जरिया होता है। साधारण EMI में दिए जाने वाले ब्याज (Interest) की तरह कंपनियां (Company) इसमें भी ब्याज काउंट कर लेती हैं। इसके दो तरीके होते हैं। पहला तरीका यह कि कंपनियां नो-कॉस्ट ईएमआई (No-cost EMI) का ऑप्शन देती हैं तो प्रोडक्ट के एकमुश्त पेमेंट पर डिस्काउंट देती हैं, वहीं नो-कॉस्ट ईएमआई (No-cost EMI)पर आपको प्रोडक्ट पूरी कीमत पर खरीदना होता है। दूसरा तरीका यह कि इंट्रेस्ट प्रोडक्ट कॉस्ट (Interest Product Cost) में ही शामिल कर दिया जाता है। नो-कॉस्ट EMI पर भी ब्याज (Interest) लेने की वजह यह है कि RBI की ओर से जीरो परसेंट इंट्रेस्ट (Zero persent interest) को परमिशन (Permission) नहीं है।
इस बारें में आरबीआई क्या कहता है?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) (आरबीआई) ने वर्ष 2013 के एक सर्कुलेशन में कहा है कि कोई भी लोन ब्याज (Loan interest) मुक्त नहीं है। 17 सितंबर 2013 का सर्कुलर कहता है, 'क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग (Credit Card Outstanding) पर जीरो पर्सेंट ईएमआई (Zero Percent EMI) स्कीम (Scheme) में ब्याज की रकम की वसूली अक्सर प्रोसेसिंग फी (Processing fee) के रूप में कर ली जाती है। उसी तरह, कुछ बैंक लोन (Bank loan) का ब्याज प्रॉडक्ट से वसूल रहे हैं। चूंकि जीरो पर्सेंट इंट्रेस्ट (Zero percent interest) का कोई चलन ही नहीं है, ऐसे में पारदर्शी तरीका यह है कि प्रोसेसिंग चार्ज (Processing charge) और ब्याज को प्रॉडक्ट/सेगमेंट (Interest to product / segment) के अनुकूल रखे जाएं, न कि लोने देनेवाले अलग-अलग संस्थानों (Institutions) के मर्जी के मुताबिक। नो कॉस्ट ईएमआई (No cost emi) जैसी स्कीम का इस्तेमाल सिर्फ ग्राहकों को लुभाने और उनका शोषण करने के लिए किया जाता है।
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