बच्‍चों में ऐसे डालें पैसे की वैल्‍यू समझने की आदत

जीवन की अन्य चीजों की तरह, आपको वित्त (Finance) को संभालते समय विवेकपूर्ण (Prudent) होने की जरूरत है।

नई दिल्‍ली: जीवन की अन्य चीजों की तरह, आपको वित्त (Finance) को संभालते समय विवेकपूर्ण (Prudent) होने की जरूरत है। इससे न केवल आप ये सीखते हैं कि कैसे पर्याप्त रूप (Adequate form) से अच्छा पैसा कमाएं बल्कि यह भी कि कैसे सुरक्षित रखें। और वास्तव में आपके लिए आपके पैसे कमाने में सक्षम हों। इस तरह करने से आपके छोटे बच्‍चें में भी शुरू से ही पैसे के महत्‍व (Importance of money) को समझने की कला आ जायेगी। और यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं, जिससे आपके बच्चे को धनवान होने में मदद मिल सके। इतना ही नहीं बच्चों को पैसों का महत्व (Importance of money)शुरू से ही समझाना चाहिए ताकि अपने स्कूल या कॉलेज (School or college) जाने के दिनों में वे अपने जेब खर्च का बेहतर प्रबंधन कर अपने छोटे-मोटे शौक खुद से पूरी कर सकें और जब वे बड़े हों तो उन्हें बचत और निवेश (Savings and investment) संबंधी निर्णय लेने में मदद मिल सके। इस बात का ध्‍यान अवश्‍य दें कि बच्चों को यह सब बातें विस्तार से बताने की कोई जरुरत नहीं होती है।

उदाहरण देकर समझाएं पैसों का महत्‍व

उदाहरण देकर समझाएं पैसों का महत्‍व

इस बात की ध्‍यान दें कि बच्चों पर अपने मां-बाप की आदतों (Parents habits) का प्रभाव कुछ ज्यादा ही पड़ता है। अगर आप समझदारी से खर्च (Expenditure) या बचत (saving) नहीं कर रहे तो समझ लीजिए आपके बच्चे भी बड़े होकर आपका ही अनुकरण (Imitation) करने वाले हैं। आपको अपने बच्चों का आदर्श बनने की जरूरत है। इसके लिए आप चाहें तो पुस्तकों या वित्तीय सलाहकारों (Financial advisors) की मदद ले सकते हैं।

बच्चों को जिम्मेदारी का एहसास कराएं

बच्चों को जिम्मेदारी का एहसास कराएं

बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो परिस्थितियां (Circumstances) बचपन वाली नहीं रह जाती हैं। बड़े होने पर उन्हें जिन्दगी जीने के लिए कमाई करनी होती है एवं अपने खर्चों का प्रबंधन (Management of expenses) करना होता है। ऐसी महत्वपूर्ण बातों की आदत बच्चों में शुरू से ही डालनी चाहिए। इसके लिए बच्चों का साप्ताहिक पॉकेट खर्च (Weekly Pocket Expenses) उनकी जरूरतों के हिसाब से तय कर दें। अगर बच्चे छोटे हैं तो सप्ताहांत में उन्हें अपने साथ घुमाने ले जाएं एवं उन्हें अपने साथ खर्च करने का मौका दें। इससे बच्चों में सीमित आमदनी (Limited income) में अपना खर्च चलाने की समझ (Sense) बढ़ेगी।

जब आप खरीदारी करें तो उन्हें अपने साथ रहने के लिए प्रोत्साहित करें

जब आप खरीदारी करें तो उन्हें अपने साथ रहने के लिए प्रोत्साहित करें

इस तरह से आप उन्हें बाजार की गतिशीलता (Market mobility) यानी मांग और आपूर्ति की समझ (Understanding of supply and demand) को सक्षम कर सकते हैं, जो उत्पाद आपूर्ति में अच्छे हैं वे सामान की तुलना में सस्ता हैं जो आपूर्ति की कमी है। इसके अलावा, विभिन्न उत्पादों की कीमतों (Prices of different products) को जानकर, वे अपने लिए एक टोपी रख सकते हैं, जिससे खरीद के निर्णय (Purchase decisions) के साथ आगे बढ़ना उनके लिए सामान महंगा हो जाए।

समझदारी से खर्च करना सिखाएं

समझदारी से खर्च करना सिखाएं

ये बात सच हैं कि इच्छाएं अनंत होती हैं और सारी इच्छाएं पूर्ण हों यह आवश्यक (Important) नहीं है। खर्चे का अंदाजा पहले लगाया जाना चाहिए वह भी जरूरतों को ध्यान में रखकर। बच्चों को यह सब बातें सिखाएं। बच्चों से अपना मासिक बजट (monthly budget) बनाने को कहें। इस कार्य में आपको उनकी मदद करनी होगी। शुरुआत में वैसी वस्तुओं की सूची तैयार करें (Prepare the list of items) जिसकी खरीदारी जरूरी है। उसके बाद उनके साथ मिलकर विचार करें कि आप उनकी कौन-कौन सी इच्‍छा पूरी करने की सामर्थ्‍य रखते हैं।
परिवारिक बजट (Family budget) में बच्चों के पॉकेट खर्च (Pocket expenses) को भी शामिल करें। इन सबसे उन्हें जिम्‍मेदारी का बोध होगा साथ ही उन्हें लगेगा कि परिवार में उनका भी कुछ महत्व है।

 

 

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