EPS scheme के तहत उच्च पेंशन के लिए चयन करने से पहले इन बातों का ध्‍यान रखें

कुछ समय पहले तक, आपको कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (EPS) के तहत मिलने वाली पेंशन (Pension) 7,500 रुपये प्रति माह थी।

नई द‍िल्‍ली: कुछ समय पहले तक, आपको कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (EPS) के तहत मिलने वाली पेंशन (Pension) 7,500 रुपये प्रति माह थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की एक हाल में ल‍िए गये फैसले के जरिए अब इस ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है। बता दें कि अब आपकी पेंशन इस पर निर्भर करेगी कि आपकी आखिरी पेंशन योग्य सैलरी (बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर) (basic salary plus dearness allowance) कितनी थी।

Before Opting For Higher Pension Under EPS Scheme You Should Consider This

जानकारी दें कि इस रूलिंग से लेबर ऐक्टिविस्ट्स (labour activists) खुश हैं। भारतीय मजदूर संघ के ऑल इंडिया जनरल सेक्रटरी विरजेश उपाध्याय ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने सारा संदेह खत्म कर दिया है। अब सभी लोगों को उनकी आखिरी सैलरी (salary) के आधार पर पेंशन मिल सकती है। उन्‍होंने कहा कि मेरी तो राय यही है कि कर्मचारी फुल पेंशन (pension) का विकल्प चुनें।' हालांकि कदम बढ़ाने से पहले आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि यह ज्यादा पेंशन आपकी ही जेब से आएगी।

सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ में जाता

इस बात से आपको बखूबी अवगत करा दें कि अभी आपकी पेंशन योग्य सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ (EPF) में जाता है। आपका एंप्लॉयर इस 12 प्रतिशत रकम के बराबर अंशदान करता है। सुप्रीम कोर्ट (supreme court) की रूलिंग से पहले एंप्लॉयर के अंशदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा या 1,250 रुपये, जो भी ज्यादा हो, ईपीएस में जाता था और बाकी हिस्सा ईपीएफ में रहता था। अब अगर आप फुल पेंशन (full pension) का विकल्प चुनेंगे तो आपकी पेंशन योग्य सैलरी का पूरा 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस में जाएगा। इस तरह ईपीएस ( EPS) में आपका अंशदान बढ़ जाएगा, लेकिन ईपीएफ में आपका कंट्रीब्यूशन (contribution) उसी के अनुपात में कम हो जाएगा।

उदाहरण के ल‍िए इसे इस तरह से समझा जा सकता है। अगर आप 58 साल के हों और 35 साल की सर्विस के बाद रिटायर (retire) होने वाले हों और फुल पेंशन (full pension) चाहते हों तो आपको ईपीएफ में एंप्लॉयर के अंशदान का पूरा 8.33 प्रतिशत हिस्सा उस तारीख से ईपीएस में शिफ्ट कराना होगा, जब से आपने नौकरी शुरू की थी। इस तरह अगर आपकी सैलरी 7 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी हो और अभी 90,000 रुपये हो तो पिछले 35 वर्षों के लिए अतिरिक्त अंशदान करीब 10.35 लाख रुपये होगा। परंतु इसमें ब्याज (Intrest) भी जोड़ा जाएगा। असल फर्क ब्याज से ही पड़ेगा। जब आप ब्याज जोड़ेंगे तो अतिरिक्त अंशदान करीब 45.15 लाख रुपये हो जाएगा। आपको यह पूरी रकम ईपीएफ (EPF) से ईपीएस (EPS) में शिफ्ट करानी होगी। ऐसा होने पर ही आप पूरी पेंशन यानी 45,000 रुपये प्रति महीने पाने के हकदार हो पाएंगे।

पेंशन पर लगता है टैक्स

ईपीएस (EPS) के तहत पेंशन (pension) पर एन्युइटी (Annuity) की ही तरह टैक्स (Tax) लगता है। लिहाजा आपको रिटायरमेंट (retirement) के बाद अपनी टैक्स देनदारी का आकलन करना होगा।

सैलरी ग्रोथ

सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के निर्देश का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा, जिनकी सैलरी (salary) करियर के ज्यादातर वक्त में कम रही, लेकिन आखिर के कुछ साल में उसमें भारी बढ़ोतरी हुई। हालांकि अगर आपको इस बात की जानकारी नहीं हैं क‍ि समय के साथ आपकी सैलरी में कैसे बढ़ोतरी हुई है तो आप ईपीएफओ ऑफिस (EPFO office) से इसकी जानकारी ले सकते हैं। इससे आपको पता चलेगा कि ईपीएफ से ईपीएस में कितना पैसा ट्रांसफर (money transfer) करना होगा। ईपीएफओ (EPFO) आपसी सैलरी ग्रोथ (salary growth) के आधार पर इस रकम की जानकारी देगा।

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