नई दिल्ली। इनकम टैक्स (Income income tax) बचाने के लिए अक्सर गलती कर देते हैं। इसके चलते उन पर बाद में टैक्स की देनदारी बन जाती है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि लोग अपनी आमदनी के हिसाब से टैक्स स्लैब पर नजर डालें और इसी आधार पर इनकम टैक्स बचाने के लिए निवेश करें। सरकार ने इस बजट में जो 5 लाख रुपये तक की आमदनी को टैक्स फ्री (income tax free) किया है, वह छूट अगले वित्त वर्ष (financial year) के लिए है। इसलिए भ्रम में न रहते हुए चालू वित्तीय वर्ष (Current fiscal year) के इनकम टैक्स स्लैब (Income income tax slab) को जरूर जानें। क्योंकि अगर इनकम टैक्स (Income income tax) की गणना में कोई चूक हो रही है तो अभी आपके पास निवेश का समय है।
3 स्लैब हैं इनकम टैक्स के
चालू वित्तीय वर्ष यानी वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स (Income income tax) के 3 स्लैब हैं। एक स्लैब 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए है। वहीं दूसरा इनकम टैक्स स्लैब (Income income tax slab) 60 से 80 साल की उम्र के लोगों के लिए है। इसके अलावा तीसरा इनकम टैक्स का स्लैब 80 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों के लिए है।
जानें अपनी उम्र के हिसाब से इनकम टैक्स स्लैब (Income tax slab)
60 साल की आयु के लोगों के लिए इनकम टैक्स स्लैब (Income tax slab)
-2.5 लाख रुपये तक इनकम टैक्स फ्री
-2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की इनकम (income) पर 5 फीसदी टैक्स। इसके अलावा इस टैक्स (tax) पर 4 फीसदी सेस भी देना होगा।
-5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक आमदनी पर 20 फीसदी इनकम टैक्स (income tax) के अलावा 4 फीसदी सेस भी देना होगा।
-10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 30 फीसदी इनकम टैक्स लगता है। इस टैक्स पर 4 फीसदी सेस (Cess on income tax) भी देना होता है।
60 साल से 80 साल की आयु के लोगों के लिए इनकम टैक्स स्लैब (Income tax slab)
-3 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री
-3 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की आमदनी पर 5 फीसदी इनकम टैक्स (income tax) लगता है। वहीं इस इनकम टैक्स पर 4 फीसदी सेस (Cess on income tax) भी देना होता है।
-वहीं 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की आमदनी पर 20 फीसदी इनकम टैक्स देना होगा। इस इनकम टैक्स पर 4 फीसदी सेस भी देना होता है।
-इसके अलावा अगर आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है तो 30 फीसदी इनकम टैक्स के अलावा 4 फीसदी सेस (Cess on income tax) भी लगता है।
80 साल की आयु से ज्यादा के लोगों के लिए इनकम टैक्स स्लैब (Income tax slab)
-5 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री
-5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी इनकम टैक्स देना होगा और इस टैक्स पर 4 फीसदी सेस (Cess on income tax) भी लगता है।
-10 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी इनकम टैक्स और 4 फीसदी टैक्स लगता है।
80C के तहत इनकम टैक्स बचाने के तरीके (Ways to save income tax under 80C)
इनकम टैक्स (Income tax) में सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत वाले निवेश विकल्पों में पैसे लगाते हैं तो 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट ले सकते हैं। सेक्शन 80C में वैसे तो बहुत सी जगह बताई गई हैं, जहां निवेश करते इनकम टैक्स बचाया जा सकता है, लेकिन उनमें कुछ प्रचलित जगह यें हैं।
पीपीएफ (PPF)
लोग पोस्ट ऑफिस या बैंक में PPF अकाउंट खोल कर निवेश कर सकते हैं। अगर पहले से यह अकाउंट चल रहा है तो हर साल इसमें निवेश करके इनकम टैक्स (Income Tax) बचाया जा सकता है। पीपीएफ (PPF) अकाउंट 15 सालों का होता है, जहां बीच में पैसा कुछ शर्तों के साथ निकाला जा सकता है।
कर्मचारी भविष्य निधि या स्वैच्छिक भविष्य निधि (EPF OR VPF)
अगर आप नौकरी करते हैं तो यह कर्मचारी भविष्य निधि या स्वैच्छिक भविष्य निधि (EPF OR VPF) की मद में पैसा कटता होगा। इसमें आप के वेतन से कट कर जितना पैसा जमा होता है उस पर आपको इनकम टैक्स की छूट मिलती है।
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)
म्युचुअल फंड (Mutual Fund) में ईएलएसएस (ELSS) कैटेगरी के फंड में निवेश करके भी इनकम टैक्स बचाया जा सकता है। यहां पर निवेश 3 साल की लॉकइन रहता है। यह किसी भी टैक्स बचाने वाले साधन में सबसे कम है। इनको टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (Tax Saving Mutual Fund) भी कहा जाता है।
टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term plan)
टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान (Term plan) लेने पर दी गई प्रीमियम के बराबर इनकम टैक्स (Income Tax) की छूट ली जा सकती है। इनकम टैक्स (Income Tax) सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ लेने के लिए आपको हर साल नया प्लान लेने की जरूरत नहीं है। पॉलिसी में सालाना प्रीमियम देने पर भी यह टैक्स छूट मिलती है।
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP)
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) भी बीमे का ही एक प्रकार है। इसके लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर इनकम टैक्स की छूट ली जा सकती है।
5 साल की बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
इनकम टैक्स (Income Tax) बचाने के लिए 5 साल की बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी पैसा लगाया जा सकता है। बैंकों में इन विशेष एफडी में पैसा 5 साल भी निकाला जा सकता है। 5 साल के बाद एफडी पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेवल होता है।
पोस्ट ऑफिस (Post Office) में 5 साल की टाइम डिपॉजिट
पोस्ट ऑफिस (Post Office) में 5 साल के लिए टाइम डिपॉजिट (TD) करने पर भी इनकम टैक्स (Income tax) की छूट ली जा सकती है। यह बैंक एफडी की तरह ही होता है। पोस्ट ऑफिस (Post Office) में ब्याज दरें सरकार हर 3 माह में तय करती है।
राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC)
पोस्ट ऑफिस से लोग राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC) खरीद कर भी इनकम टैक्स (Income tax) बचा सकते हैं। यहां पर निवेश 6 साल बाद ही निकलता है। इसको देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस से खरीदा जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS)
इस योजना में केवल वरिष्ठ नागरिक ही निवेश कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) में निवेश किया गया पैसा 5 साल बाद ही निकाला जा सकता है। सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स (Income Tax) बचाने के लिए भी यहां निवेश किया जा सकता है। हालांकि,अगर आप चाहें तो कुछ जुर्माना देकर इस वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) अकाउंट को 5 साल से पहले बंद कर सकते हैं।
होम लोन (Home Loan) के मूलधन पर इनकम टैक्स छूट (Income Tax Rebate)
अगर आपने होम लोन (Home Loan) लिया है, तो उसकी किस्त के मूलधन पर इनकम टैक्स (Income tax) की छूट ली जा सकती है। इसके ब्याज पर भी कुछ नियमों के साथ छूट मिलती है।
बच्चों की फीस पर छूट
2 बच्चों की ट्यूशन फीस पर लोग इनकम टैक्स (Income Tax) राहत ले सकते हैं। यदि आपके दो से अधिक बच्चे हैं, तो आप किसी भी दो बच्चों की फीस जमा कर इनकम टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि भारत में स्थित विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान को फीस का भुगतान किया गया हो। यह इनकम टैक्स की राहत केवल पूर्णकालिक शिक्षा (फुल टाइम एजुकेशन) के लिए ही उपलब्ध है।
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) के तहत अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप यह खाता खोल सकते हैं। सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) अकाउंट लड़की के 21 साल का होने पर मैच्योर होता है।
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