नई दिल्ली। फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड डायरेक्ट (ग्रोथ) (Franklin India Prima Fund Direct Growth) देश का दूसरा म्युचुअल फंड (mutual fund) बन गया है जिसने अपने निवेशकों को करोड़पति (Crorepati) बना दिया है। इस फंड में अगर किसी ने लांचिग की तारीख में 1 लाख रुपये का निवेशक किया होगा तो आज उसकी वैल्यू 1 करोड़ रुपये हो गई है। क्योंकि इस म्युचुअल फंड स्कीम (Mutual fund scheme) की नेट आसेट वैल्यू (nav) 1000 रुपये से ज्यादा हो चुकी है। इससे पहले रिलायंस म्युचुअल फंड की स्कीम रिलायंस ग्रोथ फंड ने लोगों को करोड़पति बनाया था। इन दोनों ही फंड ने निवेशकों को हर साल करीब 20 फीसदी के आसपास का रिटर्न दिया है। यह रिटर्न पोस्ट ऑफिस (post office) और बैंक (bank) में मिलने वाले ब्याज से दोगुने से भी ज्यादा है। आमतौर पर म्युचुअल फंड में लम्बे समय का निवेश (investment) ऐसा ही रिटर्न दिलाता है।
जानें करोड़पति (Crorepati) बनाने वाली योजना के बारे में
फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड डायरेक्ट (ग्रोथ) (Franklin India Prima Fund Direct Growth) की 12 मार्च 2019 को एनएवी (nav) 1015.5344 रुपये थी, यानी जिसने भी शुरू में 1 लाख रुपया लगाया उसका निवेश बढ़कर 1 करोड़ रुपये (Crorepati) हो गया। इस म्युचुअल फंड स्कीम (Mutual fund scheme) की लांचिंग दिसंबर 1993 में हुई थी। इस फंड ने आसेट करीब 6491 करोड़ रुपये है। इस म्युचुअल फंड स्कीम ने औसतन हर साल 19.50 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं अगर पिछले 10 साल का रिटर्न देखें तो यह करीब 25 फीसदी से ज्यादा है। इस स्कीम के पोर्टफोलियों में इस वक्त 60 शेयर हैं।
रिलायंस ग्रोथ फंड पहले ही बना चुका है करोड़पति (Crorepati)
रिलायंस ग्रोथ फंड (Reliance Growth Fund) देश की पहली म्युचुअल फंड स्कीम (Mutual fund scheme) थी जिसकी नेट आसेट वैल्यू (NAV) पहली बार 1000 रुपये के पार निकली थी। रिलायंस ग्रोथ फंड को कंपनी ने अक्टूबर 1995 में लांच किया था। इस फंड में अगर किसी ने लांचिंग वाले दिन एक साथ 1 लाख रुपये लगाया होगा वह 2016 में करोड़पति बन चुके हैं। इस प्रकार म्युचुअल फंड स्कीम (Mutual fund scheme) ने निवेशकों को करीब 21 साल में करोड़पति (Crorepati) बना दिया है।
म्युचुअल फंड (mutual fund) में निवेश में क्या बातें ध्यान रखें
इन्वेस्टर्स (investor) को ध्यान रखना चाहिए कि वो शेयर मार्केट की गिरावट में अपनी एसआईपी (SIP) बंद नहीं करें। मार्केट में गिरावट के समय कम भाव में ज्यादा यूनिट मिलती है। लंबी अवधि के लिए सिप (sip) में बने रहने में ही फायदा है। एसआईपी (SIP) को अपने को वित्तीय लक्ष्य के साथ जोड़ना चाहिए। निवेशक अगर चाहें तो अपनी आमदनी बढ़ने पर निवेश राशि को बढ़ाते जाएं। ऐसा करने से उनका मुनाफा और बढ़ सकता है।
सिप (SIP) या एकमुश्त कर सकते हैं निवेश
म्युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश में दो विकल्प मिलते हैं। एक में पैसा एक साथ लगा सकते हैं, जबकि दूसरे में हर माह निवेश का विकल्प का मिलता है। हर माह निवेश के विकल्प को सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) कहते हैं। अगर आपके पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है तो आप सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से निवेश शुरू कर सकते हैं। म्युचुअल फंड की कई स्कीम 500 रुपये से निवेश की शुरुआत की अनुमति देती हैं।
जानें म्युचुअल फंड में सिप क्या है (What is SIP)
म्युचुअल फंड (mutual fund) में निवेश के एक तरीके को सिस्टेमेटिक प्लान (Sistmatic Investment Plan) यानी सिप (SIP) कहते हैं। सिप (SIP) में किसी म्यूच्यूअल फंड में एक निश्चित अंतराल पर लगातार निवेश किसा जाता है। दरअसल यह करीब करीब पोस्ट ऑफिस (Post office) की आरडी (RD) की तरह होता है। इस तरह का निवेश शेयर बाजार मे होने वाले उतार चढ़ाव का म्युचुअल फंड (mutual fund) पर पड़ने वाले निगेटिव प्रभाव को कम करता है और रिटर्न का बढ़ाने में मदद करता है।
सिप (SIP) से निवेश में आसानी
सिप (SIP) माध्यम से निवेश करने मैं बहुत ही आसानी है। इसमें निवेश करने के लिए आपको चुने गए म्युचुअल फंड (mutual fund) को अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होता है। इससे आपकी तरफ से तय की गई तारीख को आपकी तरफ से तय की गई रकम आपके बैंक अकाउंट से अपने आप ही कट कर म्युचुअल फंड कंपनी में चली जाती है। सिप (SIP) शुरू करने के बाद यह पूरा प्रोसेस अपने आप हर माह होता रहता है।
सिप (SIP) से घटता है निवेश का जोखिम
म्युचुअल फंड (mutual fund) में सिस्टेमेटिक प्लान (Sistmatic Investment Plan) यानी सिप (SIP) माध्यम से निवेश करने से जोखिम कम होता है और ज्यादा लाभ मिलने का चांस बढ़ जाता है। जब भी हम किसी म्युचुअल फंड में सिप (SIP) के माध्यम से निवेश करते हैं तो हमारा पैसा एक निश्चित अंतराल पर म्यूच्यूअल फंड (mutual fund) में निवेश होता है जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करता है। इसके अन्य फायदे जानते हैं
छोटी रकम से निवेश
अगर आप के पास एकमुश्त रकम नहीं है तो सिप (SIP) की शुरुआत केवल 500 रुपये से भी हो सकती है। बाद में धीरे धीरे यही छोटी रकम एक दिन बड़ी रकम का रूप ले लेगी।
कम रिस्क
सिप (SIP) में एक निश्चित अंतराल पर रकम म्यूच्यूअल फंड (mutual fund) में डाली जाती है। इससे मार्केट में होने वाली है उतार-चढ़ाव मे होने वाले जोखिम को कम करता है। इसे समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आपके पास 1,00000 रुपये निवेश करने के लिए है। और इस रकम को आप एक साथ निवेश ना करके आप इस रकम को 10,000-10,000 हजार रुपये की 10 किस्त में हर महीने जमा करते हैं यानी हर महीने 10,000 हजार रुपये का निवेश करते हैं। ऐसे में शेयर बाजार मे होने वाले उतार चढ़ाव को एवरेज करने का मौका आपको 10 बार मिलेगा, जो आपका रिस्क कम कर देगा।
म्युचुअल फंड (Mutual fund) से जुड़े शब्द
एनएवी (NAV) (Net Asset Value) : जब भी म्यूचुअल फंड (Mutual fund) की बात होती है तब एक टर्म जो बार-बार प्रयोग में आती है, वह है- NAV. एक म्यूचुअल फंड (Mutual fund) कई जगह पैसे निवेश करता है इसलिए अगर किसी समय फंड से पैसा वापस लेना है तो यह उसकी NAV पर निर्भर करता है। अगर बेचना न भी हो तो फंड में पैसे के बारे में जानने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। किसी म्यूचुअल फंड (Mutual fund) की NAV वो कीमत है जिससे उस फंड की एक यूनिट खरीदी या बेची जा सकती है।
ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी एसेट (Asset Management Company) (AMC) : मैनेजमेंट कंपनी वह कंपनी होती है जो अलग-अलग प्रकार की म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम लेकर बाजार में आती हैं। जैसे रिलायंस ग्रोथ फंड (म्यूचुअल फंड स्कीम) को रिलायंस कैपिटल ऐसेट मैनेजमेंट लिमिटेड ने लॉन्च किया, जो एक एएमसी यानी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी है।
पोर्टफोलियो मैनेजर (Portfolio Manager) : एक बार अगर आपका पैसा म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम में चला गया, तब उस धन का प्रबंधन पोर्टफोलियो मैनेजर करते हैं। वे आपके धन को शेयर या फिर बॉन्ड में निवेश करते हैं, यह निवेश आपकी स्कीम कैसी है उस पर निर्भर करता है। अगर स्कीम के नजरिये से देखा जाये तो उनके निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे सिर्फ आपका नहीं, बल्कि आपके जैसे हजारों लोगों के धन का प्रबंधन करता है।
म्युचुअल फंड इंट्री लोड (MF Entry load) : म्युचुअल फंड इंट्री लोड एक महत्वपूर्ण शब्द है, जो हर म्यूचुअल फंड (Mutual fund) निवेशक के सामने आता है। एंट्री लोड और एक्जिट लोड यानी जब आप निवेश कर रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क और जब आप स्कीम से बाहर निकल रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क, जब आप म्चूचुअल फंड (Mutual fund) खरीदते हैं तब कई बार आपको एनएवी से ज्यादा पैसा देना पड़ता है। और बेचते वक्त हो सकता है आपको कम एनएवी मिले. हालांकि यह निवेशकों के लिये अच्छा नहीं होता।
म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो (Mutual Fund Portfolio) : सभी शेयर और निवेश किया गया धन मिलकर पोर्टफोलियो बनता है, तो अगर कोई म्यूचुअल फंड स्कीम रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज ऑटो, आईडीबीआई बैंक और कुछ सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं तो ये सभी एकत्र होकर एक पोर्टफोलियो बनते हैं।
एएमयू (AMU) : पूर्ण धन जो निवेश किया गया है, उस कुल धन को एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम कहते हैं। एयूएम (AMU) बाजार के वातावरण और निवेशकों के निवेश व धन निकालने की तीव्रता के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है।
एसआईपी (SIP) : ज्यादातर ओपन एंडेड में आप हर महीने छोटे-छोटे निवेश कर सकते हैं या फिर तिमाही, छहमाही या सालाना भी। इसे सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) कहते हैं. यह बैंक के आवर्ती जमा की तरह कार्य करता है।
एनएफओ न्यू फंड ऑफर (NFO) : म्यूचुअल फंड (Mutual fund) के नये ऑफर होते हैं जिनकी फेस वैल्यू 10 रुपए होती है।
(नोट-निवेश सलाह ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स के द्वारा दी गई हैं। कृपया अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए किसी भी तरह की सलाह की जांच कर लें। मार्केट में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।)
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