अगर आप फाइनेंशियल प्लानिंग खुद करते हैं, तो भी आपको उसके बारे में किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए।
नई दिल्ली: अगर आप फाइनेंशियल प्लानिंग खुद करते हैं, तो भी आपको उसके बारे में किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। बाजार में इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स की भरमार होने के चलते निवेश के उद्देश्य और रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से सही विकल्प का चुनाव करना मुश्किल होता है। हम कई बार गलत प्रॉडक्ट चुन लेते हैं क्योंकि हम चुनाव से पहले रिस्क उठाने की अपनी क्षमता और निवेश के अपने उद्देश्यों का विश्लेषण नहीं करते। इस तरह हम अपने दोस्तों की सलाह या रिश्तेदारों और सहकर्मियों के निवेश वाली जगह पर निवेश कर डालते हैं। लेकिन यकिन मानिये फाइनैंशिल प्लानिंग खुद करने के बजाय प्रफेशनल की सलाह लेना सही होता है।
बचत का सही निवेश
लोग इन्वेस्टमेंट करके खूब पैसा कमाते हैं, लेकिन वे पर्सनल फाइनैंस की बुनियादी बातों को समझ नहीं पाते हैं।ये बात भी सच हैं कि निवेश में समुचित ग्रोथ हासिल नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए फाइनैंशल अडवाइजर की सलाह बहुत जरूरी है। अकसर देखा गया हैं कि बहुत से लोगों के पास इतना समय नहीं होता कि वे अपनी बचत का सही निवेश कर सकें। कुछ लोगों के पास तो इसके लिए एकदम समय नहीं होता। ऐसे हालात में आपको अपना पैसा खुद मैनेज करने के बजाय उसे किसी एक्सपर्ट को दे देना चाहिए। अगर आपके पास एकदम टाइम नहीं है तो आपको थोड़ा कमीशन चुकाकर अडवाइजर की सर्विस लेनी चाहिए।
मुश्किल हालात में भी एडवाइजर सही सलाह देते
अक्सर देखा गया है कि लोग कोई फाइनेंशियल प्रॉडक्ट तब खरीदते हैं, जब बाजार में तेजी का रुझान होता है और जब मार्केट में कमजोरी आती है तो वे भी अपना निवेश समेट लेते हैं। अगर आपमें मुश्किल हालात से निपटने की क्षमता नहीं है तो आपको खुद से कोई निवेश करने से परहेज करना चाहिए और किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। इतना ही नहीं लोगों की जिंदगी में अक्सर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और कई चीजें एक साथ होती रहती हैं। ऐसे वक्त में लोगों अपना पैसा मैनेज करने के लिए समय नहीं मिल पाता है। इसलिए फाइनैंशल एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी होता है।
मार्केट के नियम, कानून, पॉलिसी की पूरी जानकारी
इस बात से बखूबी अवगत करा दें कि फाइनेंस की दुनिया में नियम, कानून और पॉलिसी अक्सर बदलती रहती हैं। इन सभी चीजों पर आपके एडवाइजर की नजर मार्केट में बनी रहती है। इसलिए हो सकता है कि आप उन सब पर नजर नहीं रख पाएं और जरूरत के हिसाब से निवेश में बदलाव नहीं कर पाएं। ऐसे में आपको इन्वेस्टमेंट प्लानिंग खुद करने से परहेज करना चाहिए। वर्चुअल वर्ल्ड में बहुत सी सूचनाएं होती हैं, लेकिन स्पेशलिस्ट अडवाइज के लिए ह्यूमन वर्ल्ड के अडवाइजर से मिलना जरूरी होता है। यहां आपको यह देखना होगा कि फी मॉडल पारदर्शी हो, मतलब आपको यह देखना होगा कि आप जितना पैसा निवेश कर रहे हैं उस हिसाब से कॉस्ट है या नहीं।
हर आदमी अलग होता है और उसकी चुनौतियां, फाइनेशियल गोल्स, रिस्क टॉलरेंस भी अलग होते हैं। इसलिए अपनी लाइफ की तुलना किसी और से करना बेमानी है। यह बात भी गांठ बांध कर रखने की जरूरत है कि मैनेजमेंट प्रोसेस का फल मिलने में बरसों लगते हैं। किसी भी इन्वेस्टमेंट साइकिल में कंपाउंडिंग की पावर और कॉस्ट मिनिमाइजेशन, टैक्स एफिसिअंसी का अहम रोल होता है। तो वेल्थ क्रिएशन के लिए थोड़ा धीरज रखना होगा।
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