यहां पर आपको जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड), पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) और ईपीएफ (एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड) के बीच के अंतर के बारे में बताएंगे।
प्रोविडेंट फंड (भविष्य निधि) एक सेविंग स्कीम है, जो कि भारत, मलेशिया और अन्य कई देशों में उपलब्ध है। प्रोविडेंट फंड अकाउंट को देश के नागरिकों के लिए सरकार द्वारा चलाया जाता है। यह एक सेविंग इनवेस्टमेंट टूल है जिसके मेच्योर होने पर मुनाफा मिलता है। खास तौर पर प्रोविडेंट फंड में कस्टमर अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा लगातार निवेश करते हैं और मेच्योर होने पर लाभ के साथ यह पैसा वापस मिलता है। यह एक तरह से रिटायरमेंट सेविंग प्लान है।
भारत में कई तरह के प्रोविडेंट फंड अकाउंट हैं, हर अकाउंट के अपने फीचर और फायदे हैं। हम आपको बता रहे हैं भारत में प्रसिद्ध प्रोविडेंट फंड अकाउंट्स के बारे में:
1. कर्मचारी भविष्य निधि खाता (एम्प्लोयी प्रोविडेंट फंड अकाउंट) EPF
2. सार्वजनिक भविष्य निधि खाता (पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट) PPF
3. सामान्य भविष्य निधि खाता (जनरल प्रोविडेंट फंड अकाउंट) GPF
जीपीएफ क्या है?
जीपीएफ या जनरल प्रोविडेंट फंड अकाउंट सरकारी कर्मचारियों के लिए होता है। एक सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा योगदान के रूप में देकर इसका सदस्य बन सकता है। इस फंड में जमा राशि सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति या रिटायरमेंट के समय मिल जाती है।
जीपीएफ के लिए योग्यता
सरकारी कर्मचारी जो भारत के नागरिक हैं वे जनरल प्रोविडेंट फंड अकाउंट के लिए पात्र हैं। सरकार के कुछ सैलरी वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य होता है। प्राइवेट कर्मचारी इस अकाउंट के लिए पात्र नहीं होते हैं।
जीपीएफ कैसे काम करता है?
जनरल प्रोविडेंट फंड सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बचत का माध्यम है। इस अकाउंट में खाताधारक अपनी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा एक निश्चित समय के लिए जमा करवाता है। रिटायरमेंट के समय फंड की राशि कर्मचारी को दे दी जाती है। खाताधारक खाता खोलते समय किसी को नॉमिनी भी बना सकता है। यदि खाताधारक के साथ कुछ हो जाता है तो नॉमिनी वह राशि और लाभ प्राप्त करता है।
जीपीएफ में GPF एडवांस फीचर होता है जो कि एक ब्याज रहित लोन होता है। उधार लिया हुआ यह पैसा नियमित मासिक किश्तों में चुकाया जा सकता है। जीपीएफ़ एडवांस कैश पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। आवश्यकतानुसार कितनी बार भी जीपीएफ़ एडवांस लिया जा सकता है।
पीपीएफ
पब्लिक प्रोविडेंट फंड बचत के साथ ही टैक्स सेविंग अकाउंट है। इसे 1968 में वित्त मंत्रालय के नेशनल सेविंग्स इन्स्टीट्यूट द्वारा शुरू किया गया। इसमें अच्छा खासा टैक्स सेविंग बेनिफ़िट मिलता है। खाताधारक पीपीएफ में कम से कम 500 रुपए और अधिकतम 1.50 लाख रुपए जमा करवा सकता है। 1.50 लाख के अधिक की राशि पर कोई ब्याज या टैक्स में छूट नहीं मिलती है।
पीपीएफ की योग्यता
भारत का कोई भी नागरिक यह खाता खोल सकता है। नाबालिगों को छोडकर एक व्यक्ति केवल एक पीपीएफ़ अकाउंट ही खोल सकता है। अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) पीपीएफ अकाउंट के पात्र नहीं है। हिंदू अविभाजित परिवार व्यक्ति पीपीएफ खाते के पात्र नहीं हैं।
पीपीएफ कैसे कमा करता है?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक बचत खाते और टैक्स सेविंग के रूप में काम करता है। पीपीएफ अकाउंट राष्ट्रीयकृत बैंक की किसी भी चुनिन्दा और अधिकृत शाखा और डाकघर शाखा में खोला जा सकता है। यह 15 साल की स्कीम है और 15 साल में यह मेच्योर होता है। पीपीएफ में मेच्योर होने से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता है। खाताधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को फंड की राशि दी जाती है। इसमें मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।
GPF और PPF में अंतर
जीपीएफ़ केवल सरकारी कर्मचारियों के होता है जब कि पीपीएफ़ सेल्फ-एम्प्लोयमेंट और अन्य सेक्टर्स के लोगों के लिए भी उपलब्ध है। जीपीएफ़ में लोन (जीपीएफ़ एडवांस) लिया जा सकता है, जब कि पीपीएफ़ में लोन या मेच्योर से पहले पैसे निकालने की सुविधा नहीं होती है। पीपीएफ़ अकाउंट 15 साल में मेच्योर होता है जब कि जीपीएफ़ रिटायरमेंट पर मेच्योर होता है।
ईपीएफ (EPF)
संगठित और असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए संचित निधि की जो व्यवस्था है, उसको एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड कहा जाता है। ईपीएफ में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का योगदान होता है। ईपीएफ को कर्मचारी भविष्य निधि भी कहा जाता है, यह वह पैसा होता है जो कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से कट कर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में जमा होता है।
आपको बता दें कि वर्तमान में रिटायरमेंट फंड बॉडी EPFO के सभी सदस्यों को उनके ईपीएफ खाते में जमा राशि पर 8.55 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। जिस कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं वहां कंपनी को अपने कर्मचारियों के लिए EPF की व्यवस्था करनी होती है। इस खाते में जमा राशि पर आंशिक निकासी की भी सुविधा मिलती है। जिसके तहत आप घर बनवाने, खरीदने, पुराने घर की मरम्मत, पढ़ाई के लिए, इलाज के लिए, बच्चों की शादी के लिए और लोन चुकाने के लिए आप इस पैसे को निकाल सकते हैं। बता दें कि इस खाते में जमा 1,50,000 रुपए तक की राशि पर आयकर की धारा 80सी के अंतर्गत कर छूट का लाभ मिलता है।
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