स्मार्टफोन आने से गैजेट्स की दुनिया तेजी से बदल गयी है। मार्केट में हजार से लेकर कई लाख रुपये की रेंज के गैजेट्स उपलब्ध है। जहां महंगे मोबाइल फोन का क्रेज बढ़ा है।
स्मार्टफोन आने से गैजेट्स की दुनिया तेजी से बदल गयी है। मार्केट में हजार से लेकर कई लाख रुपये की रेंज के गैजेट्स उपलब्ध है। जहां महंगे मोबाइल फोन का क्रेज बढ़ा है। वहीं चोरी होने या खो जाने का डर भी बना रहता है। दुख तो तब और ज्यादा होता हैं जबकि आप फोन की ईएमआई भर रहे हो।
आपको उस फोन की ईएमआई भरनी होगी जो अब आपके पास है भी नहीं। यह एक ऐसी विचित्र सी स्थिति होती है जिसे आप चाहकर भी नहीं बदल पाते हैं। लेकिन ऐसी परिस्थितियों में मोबाइल इंश्योरेंस एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है जिसके बारे में सिर्फ चुनिंदा लोग ही जानते हैं। आज हम आपको मोबाइल इंश्योरेंस के बारे में हर छोटी-छोटी बात को बतायेंगे।
क्या है मोबाइल इंश्योरेंस
किसी भी अन्य बीमा उत्पाद की ही तरह मोबाइल फोन बीमा जोखिम कवर प्रदान करता है। इस तरह के मामलों में इंश्योरेंस आपको फोन खोने, चोरी और नुकसान जैसी स्थितियों के लिए जोखिम कवर प्रदान करता है।
इस तरह के बीमा को गैजेट खरीदने या बिलिंग के दिन से अधिकतम पांच दिन की अवधि के भीतर खरीदा जा सकता है। इंश्योरेंस बीमा का प्रीमियम गैजेट के मूल्य पर निर्भर करता है। यह कवर पीरियड सामान्य तौर पर एक साल के लिए होता है, लेकिन बाजार में कुछ ऐसे बीमाकर्ता भी हैं जो दो साल के लिए भी कवर प्रदान करते हैं।
क्यों जरुरी हैं मोबाइल फोन बीमा?
- फोन का टूट जाना
- फोन के चोरी होने पर, हड़ताल या दंगा के दौरान नुकसान या चोरी
- पानी में गिरने पर
- चोरी और हाउसब्रेकिंग के मामले में
- आग, बिजली और विस्फोट से होने वाले नुकसान में व्यक्तिगत लापरवाही के परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान जैसे कि खोना,भूल जाना/भूल गए/कहीं छोड़ देना, गायब हो जाना या फिर कहीं गिर जाना
- भारतीय क्षेत्र के बाहर हुआ कोई भी नुकसान
- गलत इंस्टालेशन और गलत सेट-अप के कारण होने वाले नुकसान पर साइबर हमले, आतंकवादी गतिविधियों और घृणित गतिविधियों के दौरान हुए नुकसान पर।
इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त ध्यान दें
ज्यादातर बीमा कंपनियां फोन पर 6 महीने की इंश्योरेंस देती हैं और अगर फोन में कुछ होता है तो फोन को बदलने की जगह रिपेयरिंग का विकल्प रहता है। इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त या देख लें कि आपको कौन सा प्लान मिल रहा है।
इसके अलावा कुछ केस ऐसे हैं जिनमें फोन की कॉलिंग का कवर भी नहीं मिलता है। जैसे मान लीजिए आपका फोन चोरी हो गया हो और इससे कॉलिंग की गई है, तो इस कॉलिंग का बिल आपको खुद भरना पड़ेगा। इसलिए इंश्योरेंस लेते वक्त पॉलिसी के बारे में अच्छे से जान समझ लें।
मोबाइल फोन बीमा के लिए कितना करना होगा पेमेंट?
आपको फोन के बीमा के लिए लिए कितना पेमेंट करना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका फोन कैसा है, कितना महंगा है।
कौन सा इंश्योरेंस रहेगा सही?
आजकल ज्यादातर नेटवर्क ऑपरेटर्स फोन पर इंश्योरेंस कवर दे रहे हैं। आप अपने हिसाब से कोई सा भी इंश्योरेंस चुन सकते हैं। इसके अलावा बैंक की ओर से भी इंश्योरेंस कवर दिया जाता है। आप चाहें तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी भी ले सकते हैं।
कौन-कौन सी कंपनियां देती हैं मोबाइल बीमा
बता दें कि बहुत सारी बीमा कंपनियां थर्ड पार्टी सेवा प्रदाताओं के माध्यम से मोबाइल/गैजेट बीमा प्रदान करती हैं। बजाज आलियांस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी इस सेवा की पेशकश करने वाले कुछ प्रमुख नाम हैं। वहीं थर्ड पार्टी के अलावा सिस्को गैजेट्स, बिस्कोट, गैजेटकॉप्स, इन्फी शील्ड, वारंटी बाजार, ऐप्स डेली और ऑनसाइट पर भी मोबाइल इंश्योरेंस के लिए संपर्क किया जा सकता है।
क्लेम के लिए क्या करें
बाजार में उपलब्ध तमाम बीमाकर्ताओं की ओर से उपलब्ध करवाए गए बीमा पर क्लेम करने की प्रक्रिया कुल मिलाकर सभी की एक जैसी होती है। जिस तरह से जीवन बीमा और अन्य प्रकार के इंश्योरेंस पर क्लेम किया जाता है उसी प्रक्रिया से मोबाइल बीमा का भी क्लेम आसान है।
हालांकि इसमें शर्त यह होती है कि किसी व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके, नुकसान/चोरी या फोन के नुकसान के बारे में बीमाकर्ता को सूचित करना चाहिए।
वारंटी है तो भी इंश्योरेंस क्यों?
ज्यादातर लोग मानते हैं कि वारंटी है तो इंश्योरेंस की जरुरत नहीं है। लेकिन कवरेज के मामले में ये दोनों अलग-अलग हैं। मार्केट एक्सपट्स के मुताबिक वारंटी के तहत सिर्फ मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल खराबी पर कवरेज मिलता है।
लेकिन ग्राहकों की खास चिंता स्क्रीन डैमेज होने, चोरी या गुम होने जैसी दुर्घटनाओं को लेकर होती है, जो कि वारंटी का हिस्सा नहीं होती है। इसी कारण इंश्योरेंस की जरुरत महसूस होती है। बता दें कि आजकल कई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों का इंश्योरेंस कंपनियों से ही टाई-अप होता है।
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