कैंसर इंश्‍योरेंस पॉलिसी के बारे में जानें विस्‍तार से

यहां पर आपको कैंसर की इंश्‍योरेंस पॉलिसी में मिलने वाले प्रीमियम और कवर के बारे में बताएंगे।

पिछले कुछ दिनों में आपने कई बॉलीवुड सेलेब्रिटी जैसे सोनाली बेंद्रे, इरफान खान और श्रृषि कपूर के कैंसर ट्रीटमेंट के बारे में सुना होगा। कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो कि किसी को कभी भी हो सकती है। इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बीमारी जानलेवा भी है लेकिन यदि यह उपचार युक्‍त है तो इसका खर्चा लाखों करोड़ों रुपए तक आ सकता है। इसलिए आम लोगों में इस बीमारी से लड़ने का साहस लगभग ना के बराबर होता है। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने का साहस देने के लिए लाइफ इंश्‍योरेंस कंपनियां कैंसर से जुड़ी पॉलिसी का प्रचार करती रहती हैं। तो आइए जानते हैं कि कितनी जरुरी हैं ये कैंसर पॉलिसी।

60 लाख तक का हो सकता है कवर

60 लाख तक का हो सकता है कवर

आपको बता दें दुनियाभर में होने वाली हर छठी मौत की वजह कैंसर है। कैंसर में होने वाले खर्च की लागत को कम करने के लिए कैंसर पॉलिसी लाभदायी हो सकती है। इसके लिए सम इश्‍योर्ड 60 लाख रुपए तक हो सकता है। ये पॉलिसी कैंसर की शुरुआत से लेकर एडवांस स्‍टेज तक कवर करती हैं। बीमारी का पता चलने पर पॉलिसी के आधार पर 3 से 5 वर्षों के लिए भविष्‍य के प्रीमियम नहीं लिए जाते हैं ताकि पॉलिसीहोल्‍डर पर बोझ कम पड़े।

क्‍लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया आसान

क्‍लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया आसान

कैंसर पॉलिसी में क्‍लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया आसान है। ये फिक्‍स्‍ड पॉलिसी होती हैं, जो डायग्‍नोसिस होने पर पहले से तय रकम देती हैं। रेगुलर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कवर केवल हॉस्पिटलाइजेशन की लागत रीम्‍बर्स करता है, लेकिन कैंसर पॉलिसी का उपयोग रिकवरी के दौरान इनकम लॉस में किसी कमी की भरपायी के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा प्रीमियम वैरिएंट्स के तहत ज्‍यादा सम एश्‍योर्ड के विकल्‍प भी हैं, जिनमें हर क्‍लेम-फ्री ईयर के लिए कवर 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है।

इन लाभों के बावजूद इन पॉलिसी को जोरदार प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। भारत में कई कैंसर प्रोडक्‍ट्स लॉन्‍च किए गए हैं और जागरुकता बढ़ने, इस बीमारी की मांग बढ़ने, मेडिकल सर्पोट में सुधार और इलाज की लागत बढ़ने से कैंसर कवर लेने में कई गुना बढ़ोत्‍तरी हो सकती है।

कैंसर के कवर

कैंसर के कवर

लाइफ इंश्‍योरेंस कंपनियों के कैंसर कवर से अलग स्‍टार हेल्‍थ का कैंसर केयर प्‍लान उन लोगों को कवर देता है, जिनमें रेगुलर कैंसर के पहले या दूसरे स्‍टेज में होने का पता चला हो। इसे पायलट बेसिस पर लॉन्‍च किया गया है। यह प्रोडक्‍ट रेगुलर हॉस्पिटलाइजेशन के खर्च के साथ बीमारी दोबारा होने के जोखिम, मेटास्‍टैटिक्‍स, सेकेंड कैंसर और पहले कैंसर से अलग दूसरी मैलिग्‍नेंसी को भी कवर करता है।

पॉलिसी के बारे में अच्‍छे से प्राप्‍त करें जानकारी

पॉलिसी के बारे में अच्‍छे से प्राप्‍त करें जानकारी

पॉलिसी के बारे में फैसला करने से पहले उसके बारे में सारी जानकारी अच्‍छे से प्राप्‍त कर लें। जीवन बीमा कंपनियों की कैंसर पॉलिसी में कैंसर के शुरूआती चरणों के लिए कवरेज सम एश्‍योर्ड के 20-25 पर्सेंट तक रहता है। कैंसर के इससे आगे के चरणों वाले क्‍लेम्‍स होने पर शुरुआती चरणों में अगर किसी क्‍लेम पर पेमेंट हुआ तो उस रकम को पूरे सम एश्‍योर्ड से घटाकर बचने वाली राशि दी जाएगी। हालांकि कुछ प्‍लान कैंसर के काफी एडवांस स्‍टेज में होने पर सम एश्‍योर्ड के 150 प्रतिशत तक पेमेंट करते हैं।

साथ ही यह भी देख लें कि किसी खास कैंसर या एक ही अंग को बार-बार प्रभावित करने वाले कैंसर से जुड़े क्‍लेम को कवरेज से बाहर तो नहीं रखा गया है। उदाहरण के लिए एगॉन लाइफ की पॉलिसी स्किन कैंसर को कवर नहीं करती है। कैंसर पॉलिसी में 180 दिनों का सरवाइवल पीरियड और सात दिनों का सरवाइवल पीरियड होता है।

 

यौन रोग पर नहीं मिलता कवर

यौन रोग पर नहीं मिलता कवर

पहले से मौजूद बीमारी को तो कवर के दायरे से बाहर ही रखा जाता है, एचआईवी, सेक्‍सुअली बीमारी या कंजेनाइटल कंडीशन और रेडिएशन या रेडियोएक्टिविटी के संपर्क में आने से होने वाले कैंसर को भी इन पॉलिसी में कवर नहीं किया जाता है। यदि किसी को दूसरी गंभीर बीमारियां हों तो कैंसर कवर से बात नहीं बनेगी। गंभीर बीमारियों को कवर करने वाली पॉलिसी या राइडर से कई बीमारियों में काम चल जाता है।

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