ड्राइवर का भी अब होगा 15 लाख रुपये का बीमा

अब सभी मोटर पॉलिसी में पर्सनल ऐक्सिडेंट प्रोटेक्शन को शामिल किया जाएगा जिसके तहत मालिक और ड्राइवर का 15 लाख का बीमा होगा। अगर ऐक्सिडेंट में मालिक या ड्राइवर की मौत हो जाती है तो उनके परिवार को

अब सभी मोटर पॉलिसी में पर्सनल ऐक्सिडेंट प्रोटेक्शन को शामिल किया जाएगा जिसके तहत मालिक और ड्राइवर का 15 लाख का बीमा होगा। अगर ऐक्सिडेंट में मालिक या ड्राइवर की मौत हो जाती है तो उनके परिवार को 15 लाख रुपये मिलेंगे।

इस कदम का उद्देश्य ऐक्सिडेंट में मारे गए लोगों के परिवार की सहायता करना है। ज्‍यादातर दुपहिया वाहन सवारों को दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। आईआडीएआई ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि 750 रुपये के अतिरिक्त प्रीमियम पर इस पर्सनल इंश्योरेंस को अनिवार्य किया जाए।

इंश्‍योरेंस रेगुलेटर ने मद्रास हाई कोट के न‍िर्देशों का पालन करते हुए यह कदम उठाया है। कंपन‍ियों के पास इन निर्देशों के पालन करने का 25 अक्‍टूबर तक का समय है।

कितना है कवर?

कितना है कवर?

वर्तमान में दुपहिया वाहनों पर 1 लाख और कमर्शल कार पर 2 लाख का पर्सनल इंश्योरेंस दिया जाता है। कार के लिए 100 रुपये का प्रीमियम है। यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक रूप से पर्सनल इंश्योरेंस उपलब्ध है। कई कंपनियां अडिशनल प्रीमियम पर ज्यादा कवर भी देती हैं। 

15 लाख का कवर अनिवार्य

15 लाख का कवर अनिवार्य

अब आईआरडीएआई ने कंपनियों से कहा है कि गाड़ी के मालिक और ड्राइवर को 15 लाख का कवर अनिवार्य रूप से दिया जाए। इसका प्रीमियम 750 रुपये सालाना होगा। कंपनियां इससे ज्यादा का कवर भी दे सकती हैं लेकिन कम से कम 15 लाख जरूर होना चाहिए।

सही कदम है ड्राइवर का बीमा कवर बढ़ाना

सही कदम है ड्राइवर का बीमा कवर बढ़ाना

इस बारे में बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी तपन सिंघल ने कहा कि नियामक के अनिवार्य व्यक्तिगत दुर्घटना के मामले में चालकों के लिये बीमा कवर बढ़ाकर 15 लाख रुपये करना सही दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि अगर किसी की दुर्घटना में मृत्यु होती है या वह अपंग होता है, ऐसी स्थिति में पालिसीधारकों तथा उनके परिवार के सदस्यों को प्रभावी फाइनेंशियल सपोर्ट के लिये उपयुक्त व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर जरूरी है।

क्या होता है कवर

क्या होता है कवर

पर्सनल ऐक्सिडेंट कवर मोटर इंश्योरेंस के साथ अनिवार्य होता है। अगर मोटर का इंश्योरेंस है और ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस है तो वह कवर का हकदार होता है। यह कवर ड्राइवर और गाड़ी के मालिक दोनों को मिलता है। अगर मालिक गाड़ी न भी चला रहा हो तो भी वह कवर का हकदार है। पीएसी में न केवल मौत का कवर होता है बल्कि डिसैबिलिटी होने पर भी इसका फायदा मिलता है।

 

वेबसाइट के जर‍िये गाड़ियों पर नजर

वेबसाइट के जर‍िये गाड़ियों पर नजर

सड़क मंत्रालय एक वेबसाइट शुरू करने जा रही है, जिस पर हर गाड़ी की जानकारी होगी, जो बिना बीमा के देश भर में चल रही हैं। इस वेबसाइट की मदद से देश के हर राज्य का ट्रांसपोर्ट विभाग और ट्रैफिक पुलिस ऐसे लोगों पर सख्ती कर सकेगी, जो अपनी गाड़ियों का बिना बीमा कराये ही सड़कों पर दौड़ाते हैं।

55 फीसदी गाड़ियों का नहीं है बीमा

55 फीसदी गाड़ियों का नहीं है बीमा

अभी देश भर में करीब 55 फीसदी गाड़ियां ऐसी हैं, जिनका इनका बीमा नहीं है। इसके अलावा कई गाड़ियां कबाड़ या फिर लंबे समय से खड़ी हैं, जिनका इस्तेमाल कोई नहीं करता है। केवल 40-50 फीसदी दोपहिया मालिकों ने बीमा करा रखा है।

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