यहां पर आपको अगले एक साल के लिए निवेश के पांच विकल्पों के बारे में बताएंगे।
निवेश दो तरह के होते हैं एक तो शॉर्ट टर्म और दूसरा लॉन्ग टर्म। जिसमें से आपको यह तय करना होता है कि आपके लिए लॉन्ग टर्म निवेश सही है या शॉर्ट टर्म निवेश सही है। यदि आप शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म निवेश में अंतर नहीं समझ पा रहे हैं तो आपको बता दें कि जो निवेश कम समय जैसे कि 6 महीने से लेकर 1 साल या दो साल तक के लिए होता है उसे शॉर्ट टर्म निवेश कहते हैं तो वहीं जो निवेश 5 साल से लेकर 10 साल तक हो उसे लॉन्ग टर्म निवेश माना जाता है।
तो आइए जानते हैं निवेश के उन 5 विकल्पों के बारे में-
फिक्स्ड डिपोजिट में निवेश
सेविंग अकाउंट से पैसे निकालकर बेहतर जगह लगाना है तो फिक्स्ड डिपॉजिट बेहतर विकल्प है। खाता खोलें। एफडी पर मिलने वाले रिटर्न पर उन्हीं दरों के मुताबिक टैक्स लगता है, जिनके दायरे में इन्वेस्टर आता है। अगर आपकी सालाना आमदनी 10 लाख रुपए से ज्यादा है तो टैक्स कटने के बाद रिटर्न 5 फीसदी से कम रहेगा। अगर आपके पास नेट बैंकिंग अकाउंट है तो एफडी खोलना बेहद आसान है। ज्यादातर बैंक समय से पहले एफडी तोड़ने पर जुर्माना नहीं लगाते हैं।
आरडी में निवेश
रिकरिंग डिपॉजिट (सावधि जमा) यानि आरडी एक ऐसा डिपॉजिट है जिसमें आप हर महीने राशि जमा कराते हैं। इससे परिपक्वता अवधि में एक अच्छी ख़ासी राशि जुड़ जाती है। आरडी में आप महीने के अंत में बचने वाली छोटी सी राशि से भी शुरुआत कर सकते हैं।
इस स्कीम में आपको महीने में नियमित राशि जमा करवानी होती हैं, इसमें एफ़डी की तरह कोई एकमुश्त नहीं जमा करवानी होती है। जब आपको राशि मैच्योर होती है तो आपको एकमुश्त राशि मिल जाती है।
इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश
आर्बिट्राज फंड एक तरह का इक्विटी म्युचुअल फंड होता है। ये फंड कैश मार्केट और स्पॉट मार्केट के बीच के अतंर को खत्म करने के लिहाज से एक बेहतर ऑप्शन है। इस फंड का कॉन्सेप्ट है कम पर खरीदो और ज्यादा पर बेचो। इक्विटी के मुकाबले इस फंड में रिस्क कम होता है। इसमें इन्वेस्टर्स को 6 से 9 फीसदी तक का रिटर्न मिलता है। अगर आप आर्बिट्राज फंड्स में निवेश करें और सालभर तक निवेश बनाए रखें तो आपके रिटर्न पर टैक्स नहीं लगेगा। स्टॉक्स और इक्विटी फंड्स की तरह इन फंड्स में किया गया निवेश सालभर से पहले न भुनाए, नहीं तो रिटर्न पर टैक्स ज्यादा लगेगा।
लिक्विड फंड में निवेश
लिक्विड फंड या कैश फंड एक तरह का म्यूचुअल फंड होता है। लिक्विड फंड वह म्यूचुअल फंड है, जो मनी मार्केट इन्स्ट्रुमेंट्स जैसे ट्रेजरी बिल्स आदि में निवेश करता है। इनमें रिस्क कम होता है। ये साल में 8 फीसदी तक रिटर्न दे सकते हैं। ज्यादातर म्यूचुअल फंड हाउसेज ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट सुविधा देते हैं और पूरी प्रक्रिया पूरी करने में 1 घंटे से ज्यादा नहीं लगते। इसमें मेच्योरिटी पीरियड भी कम होता है। जब भी जरूरी हो आप छोटी रकम निकाल सकते हैं, वहीं सरप्लस कैश होने पर ज्यादा निवेश कर सकते हैं।
पीपीएफ में निवेश
जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ एक अच्छा कर बचाने वाला निवेश है। हम इसे "एफिशियंट" कहेंगे क्योंकि इससे आपको 80 सी के तहत न केवल कर लाभ मिलता है बल्कि इस पर मिलने वाले ब्याज पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगता। यह निवेश की एक अच्छी योजना है क्योंकि इस पर 8.1% की दर से ब्याज मिलता है जो अभी तक की सबसे अधिक दर है। अत: यह सभी के लिए लाभदायक है। पीपीएफ पर निवेश की सीमा 1.5 लाख है। इस निवेश का एक नुकसान यह है कि इसमें 15 वर्षों का लॉक-इन पीरियड होता है।


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