मैटरनिटी इंश्‍योरेंस के बारे में 5 जरुरी बातें

यहां पर आपको बताएंगे कि मातृत्‍व बीमा क्‍या होता है, साथ ही यह भी बताएंगे कि मैटरनिटी इंश्‍योरेंस को लेकर भारत में किस प्रकार का नियम फॉलो किया जाता है।

महंगाई के जमाने में पैसा बचा पाना बहुत मुश्किल हो गया है। उसमें अगर अस्पताल जाना हो जाये तो 2 से 3 महीने का बजट ही बिगड़ जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी नए दंपत्तियों को होती है, बच्चों के जन्म पर आने वाले खर्चों में बढ़ोत्‍तरी से इन्‍हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये सब जानते हैं कि बच्चे के जन्म से लेकर उसके पालन-पोषण में बेतहाशा पैसा खर्चा होता है। अगर आप बच्चा प्लान कर रहे हैं तो पहले अपने आप से पूंछे कि क्या आपने कभी मातृत्व और बच्चे के जन्म पर होने वाले खर्च के बारे में विचार किया है। क्या हमने अपने बच्चे के पैदा होने पर आने वाले खर्च के लिए पैसा बचाया है? क्या आप ये भी जानते हैं कि बीमा पॉलिसी खरीदने के बाद 2 से लेकर 6 साल तक बच्चे के जन्म पर आने वाले खर्च की भरपाई के लिए दावा नहीं कर सकते? तो चलिए हम आपको इस बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

मातृत्व बीमा क्या है?

मातृत्व बीमा क्या है?

मातृत्व बीमा योजना विशेष रुप से मातृत्वक से संबंधित खर्च को कवर करने वाली स्पेशल स्कीम है। इस स्कीम के माध्यम से मां फैमिली प्लानिंग कर सकती है और आर्थिक रुप से अपने पैरेंटहुड को बिना किसी टेंशन के इंज्वाय कर सकती है। बच्चे के जन्म पर आने वाले खर्च की परिभाषा आईआरडीए के 2013 में जारी सर्कुलर में मानक परिभाषा का हिस्सा है। इसलिए सभी बीमा कंपनियों के लिए इसे मानना जरूरी है। मुख्यतौर पर इसमें बच्चे के जन्म से जुड़े और अस्पताल में भर्ती होने वाले खर्चे शामिल होते हैं।

इसके क्या-क्या फायदे होते हैं

इसके क्या-क्या फायदे होते हैं

इसमें अस्पताल में भर्ती होने से पहले 30 दिन तक के और बच्चे के जन्म के 60 दिन बाद तक के खर्चे शामिल होते हैं। इसके तहत सामान्य तरीके से बच्चे को जन्म देने पर मातृत्व कवर और नवजात बच्चे के दावे की सीमा 15000 से 30000 रुपये तक ही होती है। जबकि सर्जरी के जरिए बच्चा होने पर दावा 25000 रुपये से 50000 रुपये के बीच कवर सीमित होता है। इसमें अस्पताल या नर्सिंग होम के कमरे का किराया, नर्स और सर्जन का खर्च, डॉक्टर की फीस, इमर्जेंसी एंबुलेंस का खर्च शामिल माना जाता है।

इस बीमा योजना की जरूरी बातें

इस बीमा योजना की जरूरी बातें

मातृत्व बीमा का दावा करने के लिए पॉलिसी की खरीद के बाद 2 से लेकर 4 साल तक इंतज़ार की समय सीमा होती है। कुछ योजना में इसकी समय सीमा 6 साल तक भी होती है तो किसी में नौ महीने की भी होती है। मातृत्व बीमा का फायदा लेने के लिए पॉलिसी खरीदने वाले की उम्र 45 साल तक ही सीमित होती है।

इस बीमा योजना में क्या शामिल नहीं होता

इस बीमा योजना में क्या शामिल नहीं होता

अगर गर्भ ठहरने के 12 हफ्ते में ही गर्भ गिर जाए तो इससे जुड़ा कोई इलाज का खर्च कवर में शामिल नहीं किया जाता। असामान्य तरीके के गर्भधारण जैसे टेस्ट ट्यूब बेबी या सरोगेसी के ज़रिए बच्चे को जन्म देने पर आने वाले खर्च का कवर इसमें शामिल नहीं होता।

प्रीमियम
इस बीमा योजना का प्रीमियम काफी ज़्यादा होता है। हालांकि मातृत्व बीमा आपके वित्तीय बोझ को कम करता है। ये एक ऐसा कवर है जो एक तरह की निश्चित घटना को कवर करता है।

पॉलिसी खरीदने के सुझाव

पॉलिसी खरीदने के सुझाव

बेहतर होगा कि मातृत्व पर आने वाले खर्चों की भरपाई के लिए खुद का फंड बनाएं जिसे किसी मियादी जमा योजना में या म्यूचुअल फंड की तरल योजना में रख सकते हैं। बीमा कंपनी उस स्थिति में कवर नहीं देगी अगर पहले से ही गर्भधारण किया हो। उस पर इंतज़ार की मियाद भी लागू होगी। इसलिए गर्भधारण को बेहतर ढंग से प्लान करना अहम होगा। भारत में 5 बेस्‍ट मैटरनिटी इंश्‍योरेंस प्‍लान

निष्कर्ष

निष्कर्ष

बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा कवर में मातृत्व कवर से जुड़े फायदों को विशिष्ट रूप से दर्शाती हैं। ऐसे दंपत्ति जो इस कवर को खरीदना चाहते हैं उन्हें पॉलिसी के दायरे को ठीक से समझ लेना चाहिए। ये समझ लेना चाहिए कि क्या-क्या चीज़ें कवर के बाहर होंगी। पॉलिसी की कीमत कितनी होगी? ये सब जान लेना चाहिए। साथ ही इन सभी ज़रूरतों को ध्यान में रखकर अलग मेडिकल फंड बनाना चाहिए। ताकि वो ऐसे हालात में ज़रूरतें पूरी कर सकें।

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