यहां पर आपको उन कारकों के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से आपको एसआईपी में निवेश नहीं करना चाहिए।
अगर डेढ-दो साल से कोई फंड अच्छा प्रदर्शन ना कर पा रहा हो तब इसका असर निवेशक के निवेश एवं उसके लक्ष्यों पर पड़ता है। हालांकि हर निवेश का जोखिम स्तर अलग होता है। इस वजह से हम केवल खराब प्रदर्शन को ध्यान में रख कर, फंड बदलने की सलाह नहीं दे सकते। कई बार ऐसा हुआ है कि कुछ फंडों का प्रदर्शन खराब रहा है परंतु लंबी अवधि में उस फंड ने अच्छा मुनाफा भी कमाकर दिया है। रिलायंस ग्रोथ फंड-ग्रोथ प्लान और फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड की विकास कहानी इस तरह के फंडों के दो उदाहरण हैं।
अगर बाज़ार नकारात्मक दिशा में बढ रहा हो
ऐसी स्थिति में हमें विशिष्ट तरह के फंड़ों में निवेश करना चाहिए। इस तरह के फंड लंबी अवधि में अच्छे रिटर्न प्रदान करवा सकते हैं।
किसी विशेष निधि के निवेश शैली और निधि प्रबंधक में बदलाव
किसी भी फंड का फंड मैनेजर उस फंड के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उसका प्रदर्शन 'अल्फा' अनुपात द्वारा तय किया जाता है जोकि ग्राहक को म्यूचुअल फंड चुनने की सलाह देते वक्त एक प्रमुख मानदंड है। एक म्यूचुअल फंड में सूचीबद्ध कंपनी उस म्यूचुअल फंड की सफलता में अहम भूमिका निभाती है। एक अच्छे म्यूचुअल फंड के रिटर्न में फंड प्रबंधक का अनुभव और निवेश दोनों काफी अहम हैं। व्यक्तिगत निधि प्रबंधकों की बजाय केवल अच्छे और बड़े एएमसी घरों में निवेश करना चाहिए। इसलिए किसी भी फंड प्रबंधक का बदलाव एसआईपी में निवेश ना करने का कारण नहीं मानना चाहिए।
निधि के उद्देश्य में परिवर्तन
सलाहकार ग्राहक के निवेश के लक्ष्यों को ध्यान में रख कर सलाह देता है। अगर उस फंड का उद्देश्य बदल जाए तब रिटर्न में कमी आ सकती है, ऐसी स्थिति में एसआईपी निवेश किसी ऐसे फंड में करना सही रहेगा जो निवेश के लक्ष्यों पर पूरा उतरे। फंड के उद्देश्यों के बदलाव के कारण निवेशक उस फंड में अपना विश्वास खो सकता है।
एएमसी द्वारा घोषित योजनाओं का विलय
विलय कभी भी बड़े फंड हाउस या कॉर हाउसों में नहीं होता यह ज्यादातर निवेश के छोटे घरों में होता है। ऐसे छोटे घरों में निवेश करना सही नहीं है। अगर विलय का असर निवेश के लक्ष्यों पर पड़ता है तो एसआईपी के लिए अन्य फंड ढूंढ लेना चाहिए।
निवेश पोर्टफोलियो में परिवर्तन
निवेश पोर्टफोलियो के बदलावों को काफी गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव दोनों हो सकते हैं। निवेश शैली को स्थानांतरित करने का कारण ध्यान से जांचना चाहिए क्योंकि यह बाजार दिशाओं के बारे में अनुमान दे सकता है। यह ग्राहक के अन्य निवेशों की समीक्षा में सलाहकार की मदद कर सकता है।
SIP निवेश ना करने के संबंध में आप किसी अन्य कारकों या कोई अन्य सूचना देना चाहेंगे। एसआईपी के माध्यम से हम हर महीने एक सीमित राशि निवेश करते हैं। इस निवेश में मदद करने के लिए कई फंड हाउस निवेशकों को मासिक, द्वि-मासिक और पाक्षिक निवेश की सुविधा प्रदान करते हैं।
इसके अलावा, स्टेप-अप एसआईपी निवेशकों को समय-समय पर एसआईपी राशि बढ़ाने की इजाजत देता है। 'अलर्ट एसआईपी' नियमित व्यवस्थित निवेश योजना का एक और रूप है जो बाजार में गिराव के दौरान निवेशकों को अधिक निवेश के अलर्ट भेजता है।
'सतत एसआईपी' में, निवेशकों को एसआईपी की समाप्ति तिथि चुनने की ज़रूरत नहीं पड़ती। लक्ष्य पूरा होने पर, निवेशक फंड हाउस को लिखित संचार भेजकर एसआईपी निवेश बंद कर सकते हैं।
आम तौर पर, जब एसआईपी निवेश किसी विशिष्ट लक्ष्य के कारण किया जाता है और जब लक्ष्य पूर्ण हो जाता है तब ग्राहकों को एसआईपी में निवेश बंद कर देना चाहिए और अन्य उद्देश्यों के लिए अधिशेष निधि का उपयोग करना चाहिए। यदि ग्राहक/निवेशक निवेश जारी रखना चाहते हैं और वे बाजार को लेकर आशावादी हैं तो उन्हें निवेश जारी रखना चाहिए।
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