ये हैं शेयर मार्केट के गुरू, इनके टिप्स अपना कर कमा सकते हैं लाखों

Written By: Ashutosh
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शेयर बाजार में लोगों की दिलचस्पी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, तमाम लोग युवा से लेकर रिटायर हो चुके लोग शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं। पर उनके सामने बड़ी समस्या आती है शेयर बाजार के सलाहकार की जो उन्हें सही और सटीक सलाह दे सके। इस समय शेयर मार्केट के गुरु कहे जाने वाले कुछ बड़े निवेशक और एक्सपर्ट्स लोगों को सोशल मीडिया, टीवी और ब्लॉग के जरिए सलाह देते रहते हैं। ऐसे लोगों को आप फॉलो करके मार्केट में अपना पैसा लगाकर मुनाफा कमा सकते हैं। यहां हम आपकी मुलाकात कुछ ऐसे ही मार्केट गुरु से करा रहे हैं जिनके टिप्स आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं।

पोरिंजू वेलियाथ

केरल के रहने वाले पोरिंजू वेलियाथ निवेश और इक्विटी के क्षेत्र के गुरु माने जाते हैं। पोरिंजू वेलियाथ का सफर एक निवेश के रुप में शुरु हुआ था और आज वह एमबीए के टॉप बिजनेस स्कूल और यूनिवर्सिटीज में लेक्चर देते हैं। पोरिंजू वेलियाथ का पोर्टफोलियो आज की तारीख में 1,200 करोड़ रुपए का है और ये मुकाम उन्होंने खुद के दम पर हासिल किया है। पोरिंजू वेलियाथ लॉ ग्रेजुएट हैं, 1990 के दौरान ही उन्हें इक्विटी और निवेश का बड़ा चस्का लग गया। आज के दौर में वह स्मॉल कैप स्टॉक पिकर्स के रुप में उनका बड़ा हस्तक्षेप है। उन्हें निवेश के मूल्य की पहचान है क्योंकि पोरिंजू वेलियाथ की नजर में निवेश सिर्फ और सिर्फ मूल्य और उसके महत्व पर निर्भर करता है।

डॉली खन्ना

डॉली खन्ना को बुल मार्केट का स्टार कहा जाता है। डॉली खन्ना के पास इन दिनों 14 से अधिक लिस्टेड कंपनियों के 1 फीसदी से अधिक शेयर हैं। बताया जाता है कि डॉली खन्ना के पास जो शेयर हैं उनकी वैल्यू कुछ सौ करोड़ रुपए के आस-पास हैं। उनकी इसी कामयाबी ने दलाल स्ट्रीट को उनका बड़ा फॉलोवर बना दिया है। इकोनामिक टाइम्स के मुताबिक, डॉली होममेकर हैं और उनका इनवेस्टमेंट उनके पति राजीव खन्ना मैनेज करते हैं।

स्टॉक इनवेस्टिंग का शौक

चेन्नई बेस्ड खन्ना के लिए स्टॉक इनवेस्टिंग का शौक है। खन्ना का क्वॉलिटी मिल्क फूड्स पर मालिकाना हक है। उन्होंने 1995 में अपना आइसक्रीम बिजनेस यूनीलीवर को 1995 में बेच दिया था। बिजनेस बेचने से जो पैसा मिला, 67 साल के राजीव खन्ना ने उसे पहली बार 1996-97 में शेयर बाजार में लगाना शुरू किया। खन्ना ने 2007 में कंपनी के शेयर खरीदने की शुरुआत की थी। जून 2009 तक वह इसे खरीदते रहे। उनका ‌एवरेज प्राइस 130-140 रुपये था। आज हॉकिंस के एक शेयर की कीमत 3,400 रुपये है और यह कंपनी अपने प्रॉफिट का कम से कम 70 पर्सेंट डिविडेंड देती है। इसके बाद उन्होंने विम्प्लास्ट खरीदा, जिसने दो साल में 7 गुना रिटर्न दिया। सेरा सैनेटरीवेयर ने दो साल में 6 गुना, आरएस सॉफ्टवेयर ने दो साल में करीब 5 गुना और अवंति सीड्स ने 6 महीने से कम में 3 गुना रिटर्न दिया है।

आशीष चुग

निवेश की दुनिया का जाना माना नाम है आशीष चुग। आशीष चुग मनी कंट्रोल सीएनबीसी आवाज के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जहां वह लोगों को स्टॉक मार्केट, निवेश और म्यूचुअल फंड से जुड़े टिप्स देते हैं। दिल्ली से जुड़े जाने माने निवेशक आशीष चुग ने 4 वर्षों में 6 हजार फीसदी रिटर्न हासिल किया है जो कि कोई आम बात नहीं है।

रिस्क लेने से मत डरें

आशीष चुग स्टॉक निवेश को लेकर कहते हैं कि, स्टॉक निवेश आपको बिजनेस की एक बड़ी तस्वीर दिखाता है, इसका उद्देश्य ये नहीं है कि आप हर क्वार्टर में बड़े रिटर्न जोड़ें। चुग ने 1990 के दौर से स्टॉक्स में निवेश करना शुरु कर दिया था। तब उन्होंने 1000 रुपए में कैडिला का आईपीओ खरीदा था। जिसके बाद उन्हें 2 महीनों में 13 हजार रुपयों का फायदा हुआ। चुग मानते हैं कि स्टॉक खरीद में रिस्क है और ये रिस्क लेना भी चाहिए, उन्हें मार्केट में घाटे से डर नहीं है।

पराग पारिख

पराग पारिख का नाम देश के बड़े निवेशकों में लिया जाता है। 3 मई 2015 को अमेरिका में एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। पराग पारिख की मौत ने भारतीय बाजार को हिला कर रख दिया था उनकी अचानक हुई मौत से हर कोई स्तब्ध था। निवेश और बाजार के रुख को समझने में उन्हें गुरू माना जाता था किसी को उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसे जाएंगे। पराग पारिख ने प्रतिष्ठित हार्वर्ड बिजनेस स्कूल शिक्षा प्राप्त की थी।

वॉरेन बफेट के प्रशंसक

पराग पारिख वॉरेन बफेट के बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने 28 मई, 2013 को पराग पारिख फाइनेंशियल ऐडवाइजरी सर्विसेज लॉन्ग टर्म वैल्यू फंड नामक अपना इक्विटी फंड लॉन्च किया। उनकी कंपनी सिर्फ एक योजना थी - एक विविध इक्विटी की "दीर्घकालिक" स्कीम। उन्होंने निवेशकों को सेंसेक्स और निफ्टी के बाहर कंपनियों की तलाश करने को कहा, जो अच्छे व्यवसाय हैं, विश्वसनीय प्रबंधन द्वारा चलाए जा रहे हैं। निवेश के नए तरीके तलाशना, स्टॉग का गहन विश्लेषण और मजबूत वित्तीय समझदारी उन्हें लीक से अलग खड़ा करती थी।

सीके प्रह्लाद

सीके प्रह्लाद ने मुंबई की धारावी को दुनिया की सबसे बड़ी झोपड़-पट्टी की तरह नहीं, बल्कि प्रभावशाली खरीदार समूह की तरह देखते थे। उन्होंने कहा कि ऐसी बस्तियों को चैरिटी की नजर से नहीं देखना चाहिए, बल्कि अपने प्रॉडक्ट की पैकेजिंग और मार्केटिंग इस प्रकार करनी चाहिए कि वह हर समूह तक पहुंच सके। इसका नतीजा यह हुआ कि दुनिया भर में फुटकर सामान का एक बड़ा बाजार खड़ा हो गया। आज बड़ी-से-बड़ी कंपनी का सामान छोटे-से-छोटे पैक में उपलब्ध है।

टाइम मैगजीन में बनाई जगह

सीके प्रह्लाद का जन्म 1941 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ था। उन्होंने चेन्नई के लॉयेला कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया और 19 साल में ही यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन में नौकरी करने लगे। चार साल नौकरी करने के बाद उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से मैनेजमेंट की मास्टर्स डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने हॉर्वर्ड बिजनेस स्कूल से अपनी रिसर्च तीन साल से भी कम वक्त में पूरी कर ली। कुछ समय बाद वह आईआईएम अहमदाबाद लौटे, पर ज्यादा दिन रुक न सके और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन में पढ़ाने अमेरिका वापस चले गए। 2005 आते-आते बिजनेस की उनकी समझ को अकैडमिक और प्रफेशनल दोनों तरह की पहचान मिलने लगी। दुनिया भर के बिजनेस समूहों का ध्यान उनके काम ने खींचा। 2009 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। इसी साल टाइम मैगजीन में प्रकाशित दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली विचारकों की लिस्ट में उन्हें पहला स्थान मिला। 2010 में 68 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

दीपक चंद्र जैन

दीपक चंद्र जैन को सही मायने में भारतीय बिजनेस गुरु कहना ज्यादा सही होगा। ऐसा कहने का कारण है उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि। उन्होंने अपनी ज्यादातर पढ़ाई भारत में ही की है। उनका जन्म असम के एक छोटे-से शहर तेजपुर में 1957 में हुआ। तेजपुर में ही गुवाहाटी विश्वविद्यालय के दारंग कॉलेज से स्टैटिस्टिक्स में ग्रैजुएशन और मास्टर डिग्री ली। इसके पांच साल तक इन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय में पढ़ाया। बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस से पीएचडी की।

बिजनेस की किताबों में छाए दीपक

1987 में कैलॉग स्कूल ऑफ बिजनेस में पढ़ना शुरू किया और जल्दी ही उनके विचारों और बिजनेस मॉडल्स की धूम मचने लगी। पढ़ाने के अलावा दीपक ने दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के लिए सलाहकार की भूमिका भी अदा की। सलाहकार के तौर पर वह जिन कंपनियों से जुड़े रहे, उनमें प्रमुख हैं - माइक्रोसॉफ्ट, नोवर्टिस, अमेरिकन एक्सप्रेस, सोनी, निसान, मोटोरोला, फिलिप्स, हयात इंटरनैशनल आदि। इनका मुख्य योगदान हाईटेक प्रॉडक्ट्स की मार्केटिंग और बाजार की प्रतिस्पर्धा को सही आंकने की क्षमता में है। किसी भी प्रॉडक्ट को अलग-अलग देशों में वहां के खास तौर-तरीकों और सभ्यता के साथ कैसे बेचा जाए, इसके गुर दीपक ने जितने सटीक तरीके से सिखाए शायद ही किसी और ने सिखाए हों। उन्होंने दुनिया की कई कंपनियों के प्रोडक्ट लॉन्च करने के लिए कामयाब रणनीति तैयार की।

English summary

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