टैक्स और एडवाइजरी फर्म EY के सर्वे के अनुसार बजट 2018 में सरकार आयकर स्लैब में बदलाव कर सकती है और आम जन के बोझ को कम कर सकती है। 69 प्रतिशत लोगों ने माना है कि सरकार आयकर की सीमा को बढ़ा सकती है ताकि आम आदमी के हाथों में ज़्यादा राशि कर रहित रहे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले बजट में इस स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन 2.5 लाख से 5 लाख की वार्षिक आय वाले छोटे करदाताओं के लिए इसे 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करके उन्हें थोड़ी राहत प्रदान की थी। आपको बता दें कि 1 फरवरी को वित्त मंत्री 2018-19 का बजट पेश करने वाले हैं।
आमजन को बजट 2018 से ये 10 आशाएँ हैं:
1) स्टैंडर्ड डिडेक्शन फिर से शुरू हो सकता है
ईवाई के सर्वे के अधिकतर प्रतिभागियों के अनुसार मल्टीपल आउट डेटेड डिडेक्शन के बजाय स्टैंडर्ड डिडेक्शन शुरू हो सकता है, जिससे की कर्मचारियों को टैक्स के बोझ से राहत मिलेगी। स्टैंडर्ड डिडेक्शन एक समान या निश्चित कटौती है जो एक वेतन पाने वाले कर्मचारी की सैलरी से की जाती है। साल 2006-07 से सैलरी से किए जाने वाले इस स्टेंडर्ड डिडेक्शन को हटा दिया गया था। चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स ने कम से कम 1 लाख का वेतन पाने वाले कर्मचारियों की सैलरी से स्टेंडर्ड डिडेक्शन फिर से शुरू करने का सुझाव दिया है।
2) टैक्स स्लैब में बदलाव
ऐसी आशा की जा रही है कि आम आदमी और छोटे उद्यमियों के हाथ में खरीदने की ज्यादा क्षमता प्रदान करने के लिए सरकार टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकती है। अशोक महेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी में टैक्स और रेगुलेटरी निदेशक संदीप सहगल का कहना है कि सरकार टैक्स छूट की वार्षिक सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर सकती है।
3) मेडिकल रीएम्बर्समेंट (भरपाई)
इसकी सीमा 1999 में 15000 रुपए की गई थी। टैक्समन के डीजीएम नवीन वाधवा के अनुसार "मेडिकल खर्चों की सीमा सालाना 50,000 रुपए की जा सकती है"।
4) बचत योजना में छूट का प्रावधान
आयकर अधिनियम की धारा 80 सी आम आदमी को बचत करने में मदद करती है। अशोक माहेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के श्री सहगल कहते हैं कि कटौती की यह सीमा वित्तीय वर्ष 2014-15 में 1 लाख से 1.5 लाख की गई थी। इसमें कई माध्यमों से बचत करने के लिए प्रेरित किया जाता है जैसे कि पीपीएफ, टैक्स सेविंग एफडी आदि। इसकी सीमा अब 2 लाख की जा सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार टैक्स-छूट प्राप्त रिटेल टर्म डिपॉजिट (टैक्स सेवर फैक्स डिपॉजिट) की अवधि सरकार मौजूदा 5 साल से घटाकर 3 साल कर सकती है।
5) डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (लाभांश वितरण टैक्स)
EY इंडिया के अनुसार सरकार फरवरी के बजट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को खत्म करने पर विचार कर सकती है। एक घरेलू कंपनी द्वारा दिया जाने वाला यह लाभांश कुल घोषित लाभांश का 15% होता है। सरचार्ज और सेस मिलाकर प्रभावी रेट 20.35% रहती है। निवेशकों के लिए यह लाभांश आय टैक्स-फ्री होती है, फिर भी यदि कुल लाभांश राशि 10 लाख से अधिक रहती है तो, इस पर 10 प्रतिशत का (साथ में सरचार्ज और सेस अलग से) अतिरिक्त टैक्स लगता है।
6) एचआरए
टैक्समन के वाधवा कहते हैं कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई इन चार महानगरों के एम्प्लाई का एचआरए ज़्यादा कटता है। जबकि बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों में भी हाउस रेंट इन महानगरों से कम नहीं है। इसलिए, सरकार ज़्यादा एचआरए वाले शहरों में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, जयपुर, नोएडा, गुड़गांव जैसे शहरों को भी शामिल कर सकती है।
7) प्रॉपर्टी को रखने की अवधि में कमी
54 और 54 एफ जैसे प्रावधानों में रेजीडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी के निवेशक को तीन साल की अवधि तक इसे होल्ड रखना पड़ता है ताकि लंबे समय के लाभ पर छूट प्राप्त हो। ऐसा माना जा रहा है कि इस अवधि को 2 साल किया जा सकता है। इस प्रकार, एक व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को खरीदकर उसे 2 साल रखकर बेच सकता है और लंबा मुनाफा कमा सकता है। फिर भी, छूट को प्राप्त करने के लिए, तीन साल के लिए अपने पास रखना पड़ता है, जो कि एकदम बेतुका सा है। इसलिए "इसमें सुधार किया जाना चाहिए और इस अवधि को 3 के बजाय 2 साल की जानी चाहिए" ये कहना है अशोक माहेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के संदीप सहगल का।
8) सिर्फ वास्तविक सैलरी पर लगे टैक्स
जो कर्मचारी एक महीने का नोटिस पीरियड सर्व नहीं करते हैं उन्हें कंपनी को कुछ राशि देनी पड़ती है। वाधावा के अनुसार यह कर्मचारी के लिए दोगुनी परेशानी है कि एक तो उसे कंपनी को पैसा भुगतान करना पड़ता है और साथ ही वे इस पैसे में छूट की मांग भी नहीं कर सकते हैं। हाल ही में एक मामले में, आयकर ट्रिब्यूनल ने कहा कि टैक्स केवल कर्मचारी द्वारा प्राप्त वास्तविक सैलरी पर ही लगाया जाना चाहिए। इसलिए, ऐसे सुझाव है कि सेक्शन 16 में सुधार के साथ नोटिस पे डिडेक्शन पर पुनः विचार किया जाएगा।
9) यात्रा भत्ते या एलटीसी छूट
वर्तमान टैक्स कानून के अनुसार, भारत में किए गए ट्रैवल पर किए गए खर्च पर टैक्स छूट मिलती है और चार कैलेंडर इयर्स के ब्लॉक में की गई दो यात्राएं इसमें शामिल हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस नियम को आसान बनाया जाना चाहिए और साल की एक यात्रा पर छूट मिलनी चाहिए।
10) बच्चों की शिक्षा पर मिलने वाली छूट की सीमा बढ़े
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल के खर्चों पर मिलने वाली छूट सीमा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। वर्तमान कानून के अनुसार, दो बच्चों तक, प्रति बच्चा 100 रुपए मासिक का शिक्षा भत्ता और प्रति बच्चा 300 रुपए का हॉस्टल खर्च भत्ता टैक्स मुक्त है।
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