जब आप कुछ विशेष अवसरों जैसे शादी, वेडिंग एनिवर्सरी (शादी की सालगिरह) या नामकरण आदि के लिए पैसे बचाना चाहते हैं तो गोल्ड सेविंग स्कीम्स में निवेश करना सुविधाजनक हो सकता है। यह रिकरिंग डिपॉजिट योजना की तरह ही होता है जहां आप किसी विशेष अवसर के लिए बचत करते हैं। ज्वैलर्स के पास कई गोल्ड स्कीम्स होती हैं अत: आपको निर्णय लेने से पहले अपने लिए एक स्कीम का चुनाव करना होगा।
GRT गोल्डन इलेवन फ्लेक्सी प्लान
वर्तमान में यह सबसे अच्छी योजना है। इस योजना में आप 500 रूपये की राशि से भी प्रारंभ कर सकते हैं। यह ग्यारह महीनों की योजना है और इस योजना को खोलने से पहले आपको एक प्लान चुनना पड़ेगा। इसमें दो विकल्प हैं एक तो मूल्य आधारित योजना और दूसरी गोल्ड वेट (सोने के वज़न पर) आधारित योजना।
गोल्ड वैल्यू आधारित विकल्प में उस दिन के सोने के मूल्य के अनुसार राशि का भुगतान कर सकते हैं। इस तरह से सोने के मूल्य के बराबर वह राशि आपके खाते में जमा हो जाती है।
गोल्ड वेट बेस्ड विकल्प में आप सोने के वज़न के अनुसार किश्तें जमा करते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप हर महीने एक ग्राम सोना खरीदने की योजना बनाते हैं और उस एक ग्राम सोने के बराबर मूल्य किश्त के रूप में जमा करते हैं।
दोनों ही योजनाओं में भुगतान की कोई निश्चित तारीख नहीं होती। अच्छा होगा कि आप प्रतिदिन सोने का भाव देखें और तब भुगतान करें जब सोने का भाव कम हो ताकि आपको अधिक फायदा हो सके।
तनिष्क की गोल्डन हार्वेस्ट योजना
तनिष्क की गोल्ड हार्वेस्ट योजना में आपको दस महीनों तक भुगतान करना होता है एवं 10 वें महीने के बाद कंपनी आपको छूट देती है जो पहली किश्त का 55 से 75 प्रतिशत तक होती है। यहाँ इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह छूट आपको तभी मिलेगी जब आप छः महीनों तक छः किश्तों का भुगतान करेंगे।
आप 2000 रूपये की छोटी राशि से इसे प्रारंभ कर सकते हैं और बाद में आप इसे 1000 रूपये के गुणक के रूप में आगे बढ़ा सकते हैं। खाता खोलने के 421 दिन बाद यह योजना बंद हो जाती है। यह एक जाने माने ज्वैलर की गोल्ड सेविंग स्कीम है।
गीतांजलि की 'तमन्ना' योजना
'तमन्ना' योजना के तहत आप किश्ते चुका कर अंत में लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आप 12 महीनों के लिए किश्तें चुकाएं और डायमंड ज्वेलरी पर 2 महीने की किश्त मुफ्त और सोने की ज्वेलरी पर 1 महीने की किश्त मुफ्त पायेंगे।
पीसी ज्वेलर की 'ज्वेल्स फॉर लैस'
इसमें आपको 12 किश्ते चुकानी होंगी और अगली दो किश्तें पीसी ज्वेलर भरेंगे। तो यदि आप 12 महीनों के लिए 1000 रूपये चुकाते हैं तो 1000 रूपये की दो किश्तें पीसी ज्वेलर देंगे। 12 वीं किश्त चुकाने के तुरंत बाद ही आप 14 किश्तों के बराबर राशि की गोल्ड और डायमंड ज्वेलरी पीसी ज्वेलर्स से खरीद सकते हैं। इसमें आपको एक साल में 25% से अधिक रिटर्न्स मिलते हैं।
जोस अलुक्कास की स्वर्णनिधि (Jos Alukkas Swarnanidhi)
जोस अलुक्कास की स्वर्णनिधि योजना के तहत 18 महीने पूरे होने पर उपभोक्ता को निवेश की गयी राशि तथा सबस्क्राइब राशि का दुगुना जिसे कुल राशि में जोड़कर दिया जाता है, मिलती है जिससे वह बीआईएस 916 हॉलमार्क गोल्ड खरीद सकता है। नए सब्सक्राईबर को पहले भुगतान के समय ही सबस्क्राइब राशि के बराबर राशि का उपहार मिल जाता है। यह सरल और सुविधाजनक स्कीम हाउसवाइफ और कॉलेज के छात्रों के लिए बहुत लाभदायक है।
खजाना वेस्टेज स्कीम
खज़ाना ज्वेलर्स ने एक अच्छा ऑफर जारी किया है जिसे खज़ाना वेस्टेज स्कीम कहा जाता है। इस स्कीम की अवधि 1 से 11 महीनों की है। इसमें ग्राहक को एक महीने में राशि जमा करनी होती है। ग्राहक 1000 रूपये से 1,00,000 रूपये तक की राशि का भुगतान कर सकता है क्योंकि स्कीम इस राशि से ही शुरू होती है। 11 किश्तें पूरी होने पर ग्राहक उस दिन के सोने के मूल्य के अनुसार कुल जमा कीमत का सोना खरीद सकता है।
उदाहरण के लिए यदि कोई ग्राहक 11 महीनों तक 1,000 रूपये प्रतिमाह जमा करता है तो उसके पास 11,000 रूपये जमा हो जाते हैं और वह 11,000 रूपये का सोना खरीद सकता है इस सोने का मूल्य उस दिन के सोने के भाव के अनुसार होगा। संक्षेप में आपके सोने का मूल्य उस दिन के अनुसार नहीं होगा जिस दिन आपने पैसा जमा किया था। तो जिस दिन आप सोना खरीदते हैं यदि उस दिन सोने का मूल्य कम होगा तो आपको उसका फायदा होगा।
ज्वेलर्स की गोल्ड सेविंग स्कीम के लिए जीएसटी नियमों में परिवर्तन
गोल्ड सेविंग स्कीम्स में जीएसटी के तहत जो बदलाव किये गए हैं उससे उपभोक्ता तथा ज्वेलर्स दोनों को ही फायदा होगा। पहले गोल्ड सेविंग स्कीम में ज्वेलर्स 11 महीनों के लिए किश्तें लेते थे और 12 वीं किश्त स्वयं देते थे और जमा हुए पैसे को नकद के रूप में वापस करते थे परन्तु अब ये स्कीम्स ग्राहकों के लिए अधिक फायदेमंद हो गयी हैं।
जीएसटी काउंसिल ने उपभोक्ताओं को यह छूट दी है कि प्रत्येक किश्त पर 3% शुल्क देने के बजाय अब वे मिलने वाले भुगतान पर पहले ही 3% शुल्क दे सकते हैं। तो अब वस्तु या सेवाओं पर मिलने वाले एडवांस (पूर्व भुगतान) जीएसटी लागू होने के पहले तथा जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटी में निहितार्थ मूल्यों के समान ही है।
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