जब भी आप अपनी जॉब बदलने की कोशिश करते हैं तो सबसे पहले आपके दिमाग में एक ही चीज आती है कि नई जॉब से आपको कितनी सैलरी मिलेगी? या फिर इंटरव्यू के दौरान कितने पैकेज की बात की जाए? नई नौकरी आप इसीलिए तलाश करते हैं ताकि आपकी सैलरी बढ़ जाए।
लेकिन यह कामयाबी इंटरव्यू और वार्षिक मूल्यांकन की कसौटी पर खरे उतरने पर ही प्राप्त होती है। आपकी पिछली सफलताओं के आधार पर आपका भावी पैकेज तय किया जाता है। एक अच्छा पैकेज पाने के लिए व्यक्ति में केवल कार्य क्षमता ही नहीं बल्कि मोल भाव करने की भी क्षमता होनी चाहिए। यहां पर आपको बताएंगे कि कैसे इंटरव्यू के दौरान सैलरी और पैकेज की बात रखनी चाहिए।
जानकारी इकट्ठा करें
सबसे पहले यह पता करें कि आप जिस पद के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हैं, वह कंपनी या अन्य कंपनियां उस पद के लिए कितना वेतन दे रही हैं। यह जानकारी इंटरनेट या आपके कार्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से इकट्ठा की जा सकती हैं। यह भी पता लगाएं कि क्या आप मैं मौजूदा पद के लिए ज़रूरी कौशल और अनुभव है या नहीं साथ ही आपका चुनाव क्या कंपनी के लिए लाभकारी साबित होगा।
इंटरव्यू में दिखाएं दिलचस्पी
रिसर्च से पता चला है कि इंटरव्यू के तनाव के कारण व्यक्ति वेतन के मामले में उचित निर्णय नहीं ले पता है। याद रखें कि आपको वेतन का निर्णय अपनी नहीं बल्कि आपने परिवार की ज़रूरतों को ध्यान में रख कर लेना है। इसलिए इंटरव्यू को नम्रता और शालीनता से दें ताकि बदलाव कि स्थिति में कंपनी आप से संपर्क कर सके। अपनी उत्सुकता से उन्हें यह एहसास कराएं कि आपको नौकरी में दिलचस्पी है लेकिन कुछ बदलाव से आपके लिए ऑफर बेहतर साबित हो सकता है।
दूसरा तरीका
एक ही कंपनी के भरोसे ना रहें। यदि एक ही समय में आपको दो अलग कंपनियों से इंटरव्यू का ऑफर आए तो समझदारी दोनों विकल्पों को आज़माने में होगी। जिस भी कंपनी का ऑफर बेहतर लगे आप उसे चुनें। इस तरह आप निश्चिंत होकर चयन कर पाएंगे।
वेतन की चर्चा आखिर में करें
इंटरव्यू का पहला नियम है कि कंपनी को अपने वेतन की कामना ना बताई जाए। लेकिन इंटरव्यू में इस सवाल का उठना भी लाज़मी है। इसलिए जवाब के तौर पर आप वेतन पर अधिक ज़ोर ना डालकर कंपनी में अपने पद पर ज़ोर डालें। साथ में यह भी जाहिर करें कि आप उचित पद और अच्छे वेतन के साथ काम करना पसंद करेंगे और इस बात का फैसला कंपनी बेहतर कर सकती है। बातचीत के दौरान, जब नियोक्ता आपको पहला ऑफर दे तो आप ऑफर के आधार पर उसे स्वीकार सकते हैं या बातचीत को जारी रख सकते हैं।
समय लेकर निर्णय लें
ऑफर सुन कर कुछ समय के लिए सोचें। जवाब की प्रतिक्षा में इंटरव्यूअर विस्तार से समझाने की कोशिश करेगा या ऑफर से जुडी कुछ अन्य बातें भी बताएगा। बातचीत के दौरान आप उनके दृष्टिकोण का अनुमान लगा पाएंगे। सोच समझ कर लिया गया फैसला अच्छे वेतन को कमाने का अवसर बन सकता है।
पूरा पैकेज जानें
अपना ध्यान केवल वेतन पर ही नहीं बल्कि वेतन के साथ मिलने वाली अन्य सुविधाओं पर भी केंद्रित रखें। उदाहरण के लिए कार, फर्नीचर भत्ता या बोनस जैसे कर-मुक्त लाभ वेतन को एक बेहतर सौदा बना सकते हैं। आपके पिछले वेतन की जानकारी इकट्ठा करके नियोक्ता आपके लिए एक बेहतरीन और रोमांचक पैकेज को बनाता है।
हार ना माने
अपनी बात को मनाने की कोशिश करते रहे। यदि आप मिलने वाले आधारभूत वेतन से असंतुष्ट हैं तो साइन-ऑन बोनस या छह महीने के बाद वेतन वृद्धि की मांग करें। जवाब ना में मिलने पर अपनी मांग के कारणों को विस्तार में बताएं। बात ना बनें तो दो दिन बाद पुनः प्रयास करें। हो सकता है आपको स्वास्थ्य बीमा, बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति या बेहतर बोनस का प्रस्ताव मिल जाए।
समाप्ति की रणनीति
इंटरव्यू में बातचीत सिर्फ एक ही विषय पर केंद्रित ना रखें। पद के साथ आने वाली जिम्मेदारियों, बोनस, सुविधाओं को भी बातचीत में जोडें। इस तरह नियोक्ता को लगेगा कि आप कई चीज़ों को ध्यान में रख कर फैसला लेंगे। हमेशा ज़रूरत से अधिक मांगे तभी आपको वह मिलेगा जिसके आप हकदार हैं।
कम वेतन पर राजी ना हो
आप जिस वेतन के लिए हामी भरेंगे उसमें आपको अपना अगला एक साल गुजारना होगा। यदि आप कम पैसों पर काम करने के लिए तैयार होंगे या बिना बातचीत किए मना कर देंगे तो इसमें गलती आपकी है। अधिक मांगने में नुकसान नहीं है लेकिन अगर ऑफर पिछली नौकरी से बेहतर है तो सोचने में भी बुराई नहीं है।
भावुक ना हों
यदि आप अपनी कंपनी को अपनी ज़रूरते गिनवाएंगे तो इसका कोई लाभ नहीं होगा। बल्कि आपको यह जताना होगा कि आप उस कंपनी के लिए कितने फायदेमंद और मेहनती कर्मचारी सिद्ध होंगे तथा उसी क्षेत्र की अन्य कंपनियों द्वारा दिए जा रहे वेतन को ध्यान में रख कर मोल भाव करें।
जल्दबाजी ना करें
किसी भी निर्णय को जल्दबाज़ी में ना लें। आपकी नई नौकरी आपके कैरियर को आगे ले जाने की क्षमता रखती है। नई नौकरी से आपके कैरियर व व्यक्तिगत जीवन में आने वाले लाभों को परखें।
मौखिक के बजाय लिखित प्रस्ताव की मांग करें
हमेशा लिखित प्रस्ताव की मांग करें। कोई भी उचित नियोक्ता इस अनुरोध को मनाह नहीं करेगा। यदि यह अनुरोध अस्वीकार हो जाए, तो मानक प्रथाओं के बारे में कंपनी के अन्य कर्मचारियों से पूछें तथा अपने फैसले पर दोबारा सोचें।
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